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अप्रैल से गमाडा क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटों का काम संभालेंगी निजी कंपनी
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मोहाली। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) के अधीन आने वाले क्षेत्रों में अब स्ट्रीट लाइटों की देखरेख का काम निजी कंपनी को ठेके पर देने का फैसला लिया गया है। कंपनी एक साल के लिए स्ट्रीट लाइटों की देखरेख करेगी, जिसके लिए गमाडा की ओर से 85.5 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा। इस परियोजना में गमाडा नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी।
बता दें कि हर महीने कंपनी द्वारा किए जाने वाले काम की समीक्षा भी की जाएगी। अप्रैल में कंपनी उक्त काम को संभाल लेगी। उम्मीद है कि इससे इलाके के लोगों को फायदा होगा।
मोहाली शहरी क्षेत्र का विस्तार एरोसिटी तो दूसरी तरफ मुल्लांपुर सिसवां तक हो गया है। इसके अलावा गमाडा ने नई सड़कों का जाल भी बिछा दिया है। परंतु 10 साल से मोहाली नगर निगम के क्षेत्र में बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में नगर निगम के 50 वार्ड के बाहर के क्षेत्र की स्ट्रीट लाइटों की सारी जिम्मेदारी गमाडा के पास है। इन क्षेत्रों में सेक्टर-88, 89, एरोसिटी, आईटी सिटी समेत कई हिस्से शामिल हैं।
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उक्त क्षेत्रों में काफी समय से लोगों को लाइटें खराब होने से परेशान होना पड़ रहा है। यह मामला क्षेत्रवासी अधिकारियों के समक्ष कई बार उठा चुके हैं। इसके बाद अब गमाडा ने इस समस्या के स्थायी हल की दिशा में काम शुरू किया है।
छुट्टी वाले दिन भी होगी मरम्मत
जानकारी के मुताबिक लाइटों का काम कंपनी को सौंपने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हफ्ते के सातों दिन कंपनी के मुलाजिम काम करेंगे। इसके अलावा बिजली का सामान चोरी होने की घटनाएं भी कम होने की उम्मीद है। अब छुट्टी वाले दिन भी स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत का काम किया जाएगा। ऐसे में गमाडा के अधीन आने वाले क्षेत्र में रात के समय होने वाले अपराधों में भी कमी होगी।
गुजरात में लगीं लाइटों की प्रणाली समझी
मोहाली पंजाब का पहला शहर है, जहां पर सभी क्षेत्रों में एलईडी लाइटें लगाई गई हैं। यहां तक कि पार्कों में भी एलईडी लाइटें लगी हुई हैं। इसके साथ ही गमाडा हर महीने लाखों रुपये बिजली के बिल के रूप में बचाता है। इस परियोजना को मोहाली में लागू करने से पहले पंजाब सरकार के अधिकारियों ने गुजरात के जामनगर का दौरा किया था। इस दौरान वहीं लगीं एलईडी लाइटाें की प्रणाली को समझा था। पहले पीसीएल की लाइटों से चंडीगढ़ सीमा तक लाइटें लगाई थीं। यह परियोजना कामयाब रही थी, जिसके बाद इसे लागू किया गया था।
सेंसर प्रणाली पर आधारित हैं लाइटें
शहर में लगाई अधिकतर लाइटें सेंसर प्रणाली पर आधारित हैं। अंधेरा होने पर यह लाइटें अपने आप जलना शुरू हो जाती हैं। इन्हें इस ऊंचाई पर लगाया गया है कि लाइटों की रोशनी सीधी सड़क पर पड़े। ताकि धुंध आदि के मौसम में भी लोगों को परेशानी न आए और कोई लाइटों को नुकसान न पहुंचा सके।
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बता दें कि हर महीने कंपनी द्वारा किए जाने वाले काम की समीक्षा भी की जाएगी। अप्रैल में कंपनी उक्त काम को संभाल लेगी। उम्मीद है कि इससे इलाके के लोगों को फायदा होगा।
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मोहाली शहरी क्षेत्र का विस्तार एरोसिटी तो दूसरी तरफ मुल्लांपुर सिसवां तक हो गया है। इसके अलावा गमाडा ने नई सड़कों का जाल भी बिछा दिया है। परंतु 10 साल से मोहाली नगर निगम के क्षेत्र में बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में नगर निगम के 50 वार्ड के बाहर के क्षेत्र की स्ट्रीट लाइटों की सारी जिम्मेदारी गमाडा के पास है। इन क्षेत्रों में सेक्टर-88, 89, एरोसिटी, आईटी सिटी समेत कई हिस्से शामिल हैं।
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उक्त क्षेत्रों में काफी समय से लोगों को लाइटें खराब होने से परेशान होना पड़ रहा है। यह मामला क्षेत्रवासी अधिकारियों के समक्ष कई बार उठा चुके हैं। इसके बाद अब गमाडा ने इस समस्या के स्थायी हल की दिशा में काम शुरू किया है।
छुट्टी वाले दिन भी होगी मरम्मत
जानकारी के मुताबिक लाइटों का काम कंपनी को सौंपने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हफ्ते के सातों दिन कंपनी के मुलाजिम काम करेंगे। इसके अलावा बिजली का सामान चोरी होने की घटनाएं भी कम होने की उम्मीद है। अब छुट्टी वाले दिन भी स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत का काम किया जाएगा। ऐसे में गमाडा के अधीन आने वाले क्षेत्र में रात के समय होने वाले अपराधों में भी कमी होगी।
गुजरात में लगीं लाइटों की प्रणाली समझी
मोहाली पंजाब का पहला शहर है, जहां पर सभी क्षेत्रों में एलईडी लाइटें लगाई गई हैं। यहां तक कि पार्कों में भी एलईडी लाइटें लगी हुई हैं। इसके साथ ही गमाडा हर महीने लाखों रुपये बिजली के बिल के रूप में बचाता है। इस परियोजना को मोहाली में लागू करने से पहले पंजाब सरकार के अधिकारियों ने गुजरात के जामनगर का दौरा किया था। इस दौरान वहीं लगीं एलईडी लाइटाें की प्रणाली को समझा था। पहले पीसीएल की लाइटों से चंडीगढ़ सीमा तक लाइटें लगाई थीं। यह परियोजना कामयाब रही थी, जिसके बाद इसे लागू किया गया था।
सेंसर प्रणाली पर आधारित हैं लाइटें
शहर में लगाई अधिकतर लाइटें सेंसर प्रणाली पर आधारित हैं। अंधेरा होने पर यह लाइटें अपने आप जलना शुरू हो जाती हैं। इन्हें इस ऊंचाई पर लगाया गया है कि लाइटों की रोशनी सीधी सड़क पर पड़े। ताकि धुंध आदि के मौसम में भी लोगों को परेशानी न आए और कोई लाइटों को नुकसान न पहुंचा सके।