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सीएम सिटी की राजनीति गर्माई, अकाली दल के पार्षदों को अगवा करने की कोशिश
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खरड़। सीएम सिटी खरड़ की राजनीति मंगलवार को उस समय गर्मा गई, जब अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं ने खरड़ पहुंचकर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके करीबियों पर जुबानी हमला बोल दिया। उनका कहना था कि खरड़ नगर काउंसिल पर कब्जे के लिए कांग्रेस पार्टी के नेता अकाली पार्षदों को अगवा करने की कोशिश कर रहे हैं। जो कि बिल्कुल गलत है। उन्होंने इस संबंध में डीसी को भी शिकायत देकर उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर अकाली पार्षदों को किसी भी तरह का नुकसान हुआ तो अकाली दल के नेता और वर्कर सड़कों पर उतर जाएंगे।
खरड़ पहुंचे वरिष्ठ अकाली नेता एवं पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भाई मनमोहन सिंह और भतीजे मनप्रीत सिंह मन्ना पर कथित तौर पर गुंडागर्दी करके खरड़ के पार्षदों को अगवा करके कई तरह के लालच और धमकियां देने के आरोप लगाए हैं। खरड़ नगर काउंसिल के बहुत से पार्षदों को उठाकर मुख्यमंत्री से मिलाने का बहाना बनाकर उन्हें डराया धमकाया जा रहा है, जिससे उन पर शिरोमणि अकाली दल को छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का दबाव बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि वह आज ही डिप्टी कमिश्नर मोहाली को मिलने के लिए जा रहे हैं और इस पूरे मामले को उनके ध्यान में लाया जा रहा है। अगर खरड़ में गुंडागर्दी नहीं रोकी गई तो शिरोमणि अकाली दल की ओर से खरड़ की सड़कों को जाम कर दिया जाएगा। उन्होंने रात को ही इस मामले को जिला मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के ध्यान में लाया था। जिस पर पार्षदों को वापस कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पुरानी कार्यप्रणाली है, उसके कांग्रेसी भी सवाल खड़े कर रहे हैं, जिस तरह पांच साल में कांग्रेस ने लोगों के साथ झूठे वादे करके सत्ता संभाली है। उन्होंने कहा कि यदि खरड़ में पार्षदों और उनके परिवारों से कोई अन्याय होता है तो शिरामणि अकाली दल सीधे तौर पर टक्कर लेगा और शिरोमणि अकाली दल सड़कों पर आ जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ध्यान दूसरी तरफ ले जाना चाहती है। जबकि उनके ऊपर अवैध खनन, शराब की फैक्ट्रियां, जंगलों से लकड़ी बेचने पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। उन्होंने कहा कि किसानों को यूरिया नहीं मिल रहा है, धान की फसल आज भी मंडियों में पड़ी है, मुख्यमंत्री लोगों के मुद्दे हल करने के बजाए अपने चहेतों को सरेआम शह दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल एक जिम्मेदार पार्टी है, वह पंजाब को तबाह होता नहीं देख सकती। पार्टी ने हमेशा ही पंजाब के हितों के लिए आगे होकर संघर्ष किया है। आज पंजाब के मुख्यमंत्री पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्री की ड्रामेबाजी देख रहे हैं।
इस अवसर अकाली दल खरड़ के हलका इंचार्ज रणजीत सिंह गिल ने कहा कि जब चरणजीत सिंह चन्नी का मुख्यमंत्री के तौर पर एलान हुआ तो उस समय लोगों ने पार्टीबाजी से ऊपर उठकर उन्हें बधाइयां दीं। लेकिन आज अपनी ताकत से हलके के पार्षदों को डराया धमकाया जा रहा है। उन्होंने वादा किया था कि वह किसी भी पार्षद को शिरोमणि अकाली दल से टूटने नहीं देंगे। इस अवसर पर जिला प्रधान चरणजीत सिंह कालेवाल, अजमेर सिंह खेड़ा, काउंसिल प्रधान जसप्रीत सिंह लोंगिया, सर्बजीत सिंह, दर्शन सिंह शिवजोत, बसपा पंजाब के जनरल सचिव राजिंदर सिंह राजा ननहेडिय़ा समेत पार्टी के अन्य सदस्य भी मौजूद थे।
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मौजूदा समय में यह हैं हालात
जानकारी के मुताबिक इस समय नगर काउंसिल पर अकाली दल का कब्जा है। नगर काउंसिल के कुल 27 पार्षद हैं। इनमें कांग्रेस के 11, अकाली दल के 9 और आजाद उम्मीदवार 7 जीते थे। इसके बाद अकाली दल ने आजाद चुने पार्षदों के साथ मिलकर नगर काउंसिल पर कब्जा किया था। लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही राजनीतिक जोड़तोड़ शुरू हो गए थे। पिछले दिनों से अकाली दल को समर्थन दे रहे आजाद पार्षदों को कांग्रेस मिलाने के लिए कोशिश की जा रही थी। अगर अकाली दल के प्रधान को हटाने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए, जो कि विरोधी दल के पास हो गया है।
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खरड़ पहुंचे वरिष्ठ अकाली नेता एवं पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भाई मनमोहन सिंह और भतीजे मनप्रीत सिंह मन्ना पर कथित तौर पर गुंडागर्दी करके खरड़ के पार्षदों को अगवा करके कई तरह के लालच और धमकियां देने के आरोप लगाए हैं। खरड़ नगर काउंसिल के बहुत से पार्षदों को उठाकर मुख्यमंत्री से मिलाने का बहाना बनाकर उन्हें डराया धमकाया जा रहा है, जिससे उन पर शिरोमणि अकाली दल को छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का दबाव बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि वह आज ही डिप्टी कमिश्नर मोहाली को मिलने के लिए जा रहे हैं और इस पूरे मामले को उनके ध्यान में लाया जा रहा है। अगर खरड़ में गुंडागर्दी नहीं रोकी गई तो शिरोमणि अकाली दल की ओर से खरड़ की सड़कों को जाम कर दिया जाएगा। उन्होंने रात को ही इस मामले को जिला मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के ध्यान में लाया था। जिस पर पार्षदों को वापस कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पुरानी कार्यप्रणाली है, उसके कांग्रेसी भी सवाल खड़े कर रहे हैं, जिस तरह पांच साल में कांग्रेस ने लोगों के साथ झूठे वादे करके सत्ता संभाली है। उन्होंने कहा कि यदि खरड़ में पार्षदों और उनके परिवारों से कोई अन्याय होता है तो शिरामणि अकाली दल सीधे तौर पर टक्कर लेगा और शिरोमणि अकाली दल सड़कों पर आ जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ध्यान दूसरी तरफ ले जाना चाहती है। जबकि उनके ऊपर अवैध खनन, शराब की फैक्ट्रियां, जंगलों से लकड़ी बेचने पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। उन्होंने कहा कि किसानों को यूरिया नहीं मिल रहा है, धान की फसल आज भी मंडियों में पड़ी है, मुख्यमंत्री लोगों के मुद्दे हल करने के बजाए अपने चहेतों को सरेआम शह दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल एक जिम्मेदार पार्टी है, वह पंजाब को तबाह होता नहीं देख सकती। पार्टी ने हमेशा ही पंजाब के हितों के लिए आगे होकर संघर्ष किया है। आज पंजाब के मुख्यमंत्री पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्री की ड्रामेबाजी देख रहे हैं।
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इस अवसर अकाली दल खरड़ के हलका इंचार्ज रणजीत सिंह गिल ने कहा कि जब चरणजीत सिंह चन्नी का मुख्यमंत्री के तौर पर एलान हुआ तो उस समय लोगों ने पार्टीबाजी से ऊपर उठकर उन्हें बधाइयां दीं। लेकिन आज अपनी ताकत से हलके के पार्षदों को डराया धमकाया जा रहा है। उन्होंने वादा किया था कि वह किसी भी पार्षद को शिरोमणि अकाली दल से टूटने नहीं देंगे। इस अवसर पर जिला प्रधान चरणजीत सिंह कालेवाल, अजमेर सिंह खेड़ा, काउंसिल प्रधान जसप्रीत सिंह लोंगिया, सर्बजीत सिंह, दर्शन सिंह शिवजोत, बसपा पंजाब के जनरल सचिव राजिंदर सिंह राजा ननहेडिय़ा समेत पार्टी के अन्य सदस्य भी मौजूद थे।
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जानकारी के मुताबिक इस समय नगर काउंसिल पर अकाली दल का कब्जा है। नगर काउंसिल के कुल 27 पार्षद हैं। इनमें कांग्रेस के 11, अकाली दल के 9 और आजाद उम्मीदवार 7 जीते थे। इसके बाद अकाली दल ने आजाद चुने पार्षदों के साथ मिलकर नगर काउंसिल पर कब्जा किया था। लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही राजनीतिक जोड़तोड़ शुरू हो गए थे। पिछले दिनों से अकाली दल को समर्थन दे रहे आजाद पार्षदों को कांग्रेस मिलाने के लिए कोशिश की जा रही थी। अगर अकाली दल के प्रधान को हटाने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए, जो कि विरोधी दल के पास हो गया है।