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Mohali News: पीआईएलबीएस ने दी नहीं जिंदगी, सरकारी अस्पताल में पहली बार हुआ सफल लिवर ट्रांसप्लांट
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मोहाली। पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (पीआईएलबीएस) में पहली बार लिवर ट्रांसप्लांट किया गया है। लिवर ट्रांसप्लांट होेन के बाद 44 वर्षीय करम सिंह एक नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं। डेढ़ साल के इलाज और एक जटिल सर्जरी के बाद वह अब स्वस्थ होकर जल्द ही घर लौटने की तैयारी मेें हैं। करम सिंह डेढ़ साल से लिवर सिरोसिस के गंभीर चरण से जूझ रहे थे। इसका प्रमुख कारण लंबे समय तक शराब का सेवन करना था। उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि सामान्य दैनिक गतिविधियां भी मुश्किल हो गई थीं। परिवार को काफी समय से लीवर की तलाश थी, लेकिन उपलब्धता नहीं हो रही थी। निजी अस्पताल में इलाज कराने के रुपये भी उनके पास नहीं थे। इस कठिन दौर में सरकारी संस्थान में इलाज का विकल्प उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आया। पीजीआई चंडीगढ़ से अंगदाता मिलने के बाद ही यह जीवन रक्षक सर्जरी संभव हो सकी।
12 घंटे से अधिक समय में हुई सर्जरी
27 नवंबर 2025 को 12-घंटे से अधिक समय की यह सर्जरी हुई। पीआईएलबीएस के डायरेक्टर डॉ. विरेंदर सिंह की निगरानी में और सर्जन डॉ. राजशेखर की अगुवाई वाली डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने करम सिंह के लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक अंजाम दिया। करम सिंह बताते हैं उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जटिल सर्जरी सरकारी अस्पताल में सफलता से हो जाएगी। सेहत पहले से बेहतर है, अब अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन की ओर लौट सकूंगा। पूरी टीम ने मुझे नया जीवन दिया है, यह मेरे लिए दूसरा जन्म है।
अज्ञात अंगदाता को दिया श्रेय
करम सिंह ने नई जिंदगी का श्रेय एक अज्ञात अंगदाता को दिया है। इस अनमोल उपहार के प्रति वह गहरा आभार व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि अंगदान के लिए हमेशा आभारी रहूंगा। अगर किसी ने अंगदान नहीं किया होता, तो मेरी जिंदगी नहीं बच सकती थी। अब लोगों से अपील करूंगा कि वे अंगदान के लिए आगे आएं। एक दाता आठ लोगों की जान बचा सकता है। सरकारी अस्पताल में इस तरह की उन्नत सर्जरी आम आदमी के लिए सुरक्षित और किफायती है।
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पहली बार हुई सरकारी संस्थान में जटिल सर्जरी
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि यह पंजाब के चिकित्सा इतिहास में पहली बार है जब इतनी जटिल सर्जरी सरकारी संस्थान में सफलतापूर्वक की गई। यह जीवन रक्षक सर्जरी लगभग 12 लाख रुपये में हुई, जबकि निजी अस्पतालों में इसकी लागत लगभग 45-50 लाख रुपये होती। इस सफलता के बाद यह संस्थान पंजाब का पहला समर्पित लिवर और बिलियरी विज्ञान केंद्र बन गया है।
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12 घंटे से अधिक समय में हुई सर्जरी
27 नवंबर 2025 को 12-घंटे से अधिक समय की यह सर्जरी हुई। पीआईएलबीएस के डायरेक्टर डॉ. विरेंदर सिंह की निगरानी में और सर्जन डॉ. राजशेखर की अगुवाई वाली डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने करम सिंह के लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक अंजाम दिया। करम सिंह बताते हैं उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जटिल सर्जरी सरकारी अस्पताल में सफलता से हो जाएगी। सेहत पहले से बेहतर है, अब अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन की ओर लौट सकूंगा। पूरी टीम ने मुझे नया जीवन दिया है, यह मेरे लिए दूसरा जन्म है।
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अज्ञात अंगदाता को दिया श्रेय
करम सिंह ने नई जिंदगी का श्रेय एक अज्ञात अंगदाता को दिया है। इस अनमोल उपहार के प्रति वह गहरा आभार व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि अंगदान के लिए हमेशा आभारी रहूंगा। अगर किसी ने अंगदान नहीं किया होता, तो मेरी जिंदगी नहीं बच सकती थी। अब लोगों से अपील करूंगा कि वे अंगदान के लिए आगे आएं। एक दाता आठ लोगों की जान बचा सकता है। सरकारी अस्पताल में इस तरह की उन्नत सर्जरी आम आदमी के लिए सुरक्षित और किफायती है।
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पहली बार हुई सरकारी संस्थान में जटिल सर्जरी
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि यह पंजाब के चिकित्सा इतिहास में पहली बार है जब इतनी जटिल सर्जरी सरकारी संस्थान में सफलतापूर्वक की गई। यह जीवन रक्षक सर्जरी लगभग 12 लाख रुपये में हुई, जबकि निजी अस्पतालों में इसकी लागत लगभग 45-50 लाख रुपये होती। इस सफलता के बाद यह संस्थान पंजाब का पहला समर्पित लिवर और बिलियरी विज्ञान केंद्र बन गया है।