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Mohali News: नए सेक्टरों के लोगों ने बिल्डरों और गमाडा के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप
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मोहाली। गमाडा और बिल्डरों के अधीन नए सेक्टरों के निवासी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे है। काउंसिल ऑफ रेजिडेंट्स वेल्फेयर एसोसिएशन एंड सोसाइटी (मेगा) मोहाली ने गमाडा के कुछ अधिकारियों और बिल्डरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है। अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान को विभागीय कार्रवाई की मांग की है। दरअसल 22 रेजिडेंट्स वेल्फेयर एसोसिएशन की मिलकर बनी साझी जत्थेबंदी काउंसिल ऑफ रेजिडेंट्स वेल्फेयर एसोसिएशन एंड सोसाइटी (मेगा) मोहाली ने अपने पत्र में कहा है कि जो सेक्टर मेगा हाउसिंग प्रोजेक्ट के अधीन विकसित किए जा रहे हैं। इन सेक्टरों के निवासियों के साथ बिल्डरों और गमाडा के कुछ जिलाधिकारी लूट कर रहे हैं।
साल 2006-07 में पंजाब में मेगा हाउसिंग टाउनशिप की नीति के तहत बहुत से निजी बिल्डरों ने अपने-अपने प्रोजेक्टों की शुरुआत की थी। लेकिन उस समय जो नीतियां बनाई गई वह सभी बिल्डरों के हक में और उपभोक्ता के विरोध में बनी, जो आज तक ज्यों की त्यों चल रही है। इस कारण आम लोगों की लूट निरंतर जारी है।
बता दें कि 1995 के पापरा एक्ट में बिल्डरों को उत्साहित करने के लिए छूट दी गई, जो आज भी जारी है। फायदा लोगों के बजाए बिल्डर ले रहे हैं। इन बिल्डरों के काम में अनेक कमियां होने के बावजूद इनके विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की जाती। यहां तक कि लोगों से पूरे पैसे लेकर भी उन्हें प्रॉपर्टी नहीं दी जाती है। बिल्डरों द्वारा कुल प्लॉटों की संख्या से ज्यादा प्लॉट बेच दिए गए हैं जबकि असल में प्लॉट है ही नहीं। इन बिल्डरों के विरुद्ध कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है। जबकि लोगों की ओर से गमाडा/पुडा को समय-समय पर शिकायतें दी जा रही हैं। इन शिकायतों को गमाडा के अधिकारी दबाकर बैठे हैं।
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इन सेक्टरों के निवासियों की हालत में ग्रामीणों से भी बदतर है। बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, पानी, सीवरेज और सड़कों को माना जाता है। लेकिन यहां के निवासियों को यह भी नसीब नहीं होता। यहां तक कि इन सेक्टरों के निवासियों को न ही शहरी और न ही ग्रामीण माना जाता है। इस कारण यहां के लोगों की सबसे छोटी इकाई पंचायत और काउंसिल की वोट भी पोल नहीं होती। जबकि चुनाव आयोग द्वारा वोट पोल करने के लिए यहां विज्ञापन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। दूसरी ओर वोट के अधिकार को दबाया जा रहा है।
काउसिंह के बताया कि पुडा/गमाडा के दफ्तर में कुछ अधिकारी पिछले 15 सालों से एक ही सीट पर काम कर रहे हैं। इस कारण भ्रष्टाचार से इनकार नहीं किया जा सकता। ईमानदार अफसरों को भी सही काम करने नहीं दिया जा रहा है। बिल्डरों की ओर से मनमर्जी की प्रॉपर्टी ट्रांसफर फीस ली जाती हैं। इससे सरकार के राजस्व का नुकसान हो रहा है। यहां तक कि लोगों से कॉमन एरिया मेंटेनेंस चार्ज लिए जा रहे हैं, उसमें बिना किसी रोक के हर साल बढ़ोतरी की जा रही है। इस करके इन सेक्टरों के निवासी खुद को लुटा हुआ महसूस कर रहे हैं।
ये हैं मांगें
1. इन प्रोजेक्टों को सरकार या पुडा अपने अधिकार में लें।
2. नए प्रोजेक्टों के लाइसेंस देने सरकार बंद करे।
3. गमाडा/पुडा के जरिए ही नए सेक्टर विकसित किए जाएं।
4. बिल्डरों को पापरा नियम की छूट तुरंत बंद की जाए।
5. लंबे समय से एक सीट पर बैठे गमाडा/पुडा के अधिकारियों की बदलियां मोहाली से बाहर पंजाब में की जाएं।
6. किसी भी अधिकारी की पोस्टिंग का समय तीन साल निश्चित किया जाए।
7. इन अधिकारियों और इनके रिश्तेदारों की जायदादों की विजिलेंस जांच करवाई जाए, दोषी पाए जाने पर अधिकारियों के खिलाफ विभाग की ओर से सख्त कार्रवाई की जाए।
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साल 2006-07 में पंजाब में मेगा हाउसिंग टाउनशिप की नीति के तहत बहुत से निजी बिल्डरों ने अपने-अपने प्रोजेक्टों की शुरुआत की थी। लेकिन उस समय जो नीतियां बनाई गई वह सभी बिल्डरों के हक में और उपभोक्ता के विरोध में बनी, जो आज तक ज्यों की त्यों चल रही है। इस कारण आम लोगों की लूट निरंतर जारी है।
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बता दें कि 1995 के पापरा एक्ट में बिल्डरों को उत्साहित करने के लिए छूट दी गई, जो आज भी जारी है। फायदा लोगों के बजाए बिल्डर ले रहे हैं। इन बिल्डरों के काम में अनेक कमियां होने के बावजूद इनके विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की जाती। यहां तक कि लोगों से पूरे पैसे लेकर भी उन्हें प्रॉपर्टी नहीं दी जाती है। बिल्डरों द्वारा कुल प्लॉटों की संख्या से ज्यादा प्लॉट बेच दिए गए हैं जबकि असल में प्लॉट है ही नहीं। इन बिल्डरों के विरुद्ध कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है। जबकि लोगों की ओर से गमाडा/पुडा को समय-समय पर शिकायतें दी जा रही हैं। इन शिकायतों को गमाडा के अधिकारी दबाकर बैठे हैं।
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इन सेक्टरों के निवासियों की हालत में ग्रामीणों से भी बदतर है। बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, पानी, सीवरेज और सड़कों को माना जाता है। लेकिन यहां के निवासियों को यह भी नसीब नहीं होता। यहां तक कि इन सेक्टरों के निवासियों को न ही शहरी और न ही ग्रामीण माना जाता है। इस कारण यहां के लोगों की सबसे छोटी इकाई पंचायत और काउंसिल की वोट भी पोल नहीं होती। जबकि चुनाव आयोग द्वारा वोट पोल करने के लिए यहां विज्ञापन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। दूसरी ओर वोट के अधिकार को दबाया जा रहा है।
काउसिंह के बताया कि पुडा/गमाडा के दफ्तर में कुछ अधिकारी पिछले 15 सालों से एक ही सीट पर काम कर रहे हैं। इस कारण भ्रष्टाचार से इनकार नहीं किया जा सकता। ईमानदार अफसरों को भी सही काम करने नहीं दिया जा रहा है। बिल्डरों की ओर से मनमर्जी की प्रॉपर्टी ट्रांसफर फीस ली जाती हैं। इससे सरकार के राजस्व का नुकसान हो रहा है। यहां तक कि लोगों से कॉमन एरिया मेंटेनेंस चार्ज लिए जा रहे हैं, उसमें बिना किसी रोक के हर साल बढ़ोतरी की जा रही है। इस करके इन सेक्टरों के निवासी खुद को लुटा हुआ महसूस कर रहे हैं।
ये हैं मांगें
1. इन प्रोजेक्टों को सरकार या पुडा अपने अधिकार में लें।
2. नए प्रोजेक्टों के लाइसेंस देने सरकार बंद करे।
3. गमाडा/पुडा के जरिए ही नए सेक्टर विकसित किए जाएं।
4. बिल्डरों को पापरा नियम की छूट तुरंत बंद की जाए।
5. लंबे समय से एक सीट पर बैठे गमाडा/पुडा के अधिकारियों की बदलियां मोहाली से बाहर पंजाब में की जाएं।
6. किसी भी अधिकारी की पोस्टिंग का समय तीन साल निश्चित किया जाए।
7. इन अधिकारियों और इनके रिश्तेदारों की जायदादों की विजिलेंस जांच करवाई जाए, दोषी पाए जाने पर अधिकारियों के खिलाफ विभाग की ओर से सख्त कार्रवाई की जाए।