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Mohali News: धान की फसल सूखने लगी, किसान 10 घंटे बिजली आपूर्ति की मांग पर अड़े
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मोहाली। भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर ने जिले में कृषि क्षेत्र को अपर्याप्त बिजली आपूर्ति पर सवाल उठाए हैं। किसानों का कहना है कि सरकार के 8 से 10 घंटे बिजली देने के दावे झूठे हैं।
उन्हें केवल चार से पांच घंटे ही बिजली मिल रही है, जिससे धान की फसल सूख रही है।यूनियन के नेता मेहर सिंह थेड़ी और जिला प्रेस सचिव हकीकत सिंह घड़ूंआ ने बताया। मोहाली में किसानों ने 1 जून से धान की रोपाई शुरू की थी। शुरुआती दो सप्ताह तक करीब आठ घंटे बिजली मिली। अब अधिकांश रोपाई पूरी होने के बाद आपूर्ति घटकर चार-पांच घंटे रह गई है। बारिश न होने और नहरी पानी की सुविधा न होने से किसान पूरी तरह ट्यूबवेल पर निर्भर हैं। बिजली कटौती और बार-बार ट्रिपिंग से खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसान धान की रोपाई पर प्रति एकड़ करीब 10 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं। समय पर सिंचाई न होने पर उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
निर्बाध आपूर्ति की मांग
भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से कम से कम 10 से 12 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को तुरंत बिजली आपूर्ति बढ़ानी चाहिए। इससे किसानों की फसल बचाई जा सकेगी। उन्हें आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।
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उन्हें केवल चार से पांच घंटे ही बिजली मिल रही है, जिससे धान की फसल सूख रही है।यूनियन के नेता मेहर सिंह थेड़ी और जिला प्रेस सचिव हकीकत सिंह घड़ूंआ ने बताया। मोहाली में किसानों ने 1 जून से धान की रोपाई शुरू की थी। शुरुआती दो सप्ताह तक करीब आठ घंटे बिजली मिली। अब अधिकांश रोपाई पूरी होने के बाद आपूर्ति घटकर चार-पांच घंटे रह गई है। बारिश न होने और नहरी पानी की सुविधा न होने से किसान पूरी तरह ट्यूबवेल पर निर्भर हैं। बिजली कटौती और बार-बार ट्रिपिंग से खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसान धान की रोपाई पर प्रति एकड़ करीब 10 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं। समय पर सिंचाई न होने पर उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
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निर्बाध आपूर्ति की मांग
भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से कम से कम 10 से 12 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को तुरंत बिजली आपूर्ति बढ़ानी चाहिए। इससे किसानों की फसल बचाई जा सकेगी। उन्हें आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।
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