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डेराबस्सी में सक्रिय खनन माफिया, बेखौफ करते हैं माइनिंग
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
Updated Tue, 19 Jul 2016 09:59 AM IST
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बिरही गंगा में बदरीनाथ वन प्रभाग की ओर से यूं किसा जा रहा जेसीबी से खनन।
- फोटो : Amar Ujala
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देश भर में अवैध माइनिंग बैन है, लेकिन मोहाली के डेराबस्सी में दिनदिहाड़े बेखौफ होकर खनन किया जा रहा है। सरकारी आदेशानुसार बरसात के मौसम में जुलाई से लेकर सितंबर तक तीन महीने के लिए मंजुरशुदा घाटों पर भी खनन पर पूर्ण पाबंदी है परंतु इसके बावजूद हलका डेराबस्सी की कुदरती नदीयां, घग्गर, चौ आदि के समीप माईनिंग माफीया द्वारा गैरकानूनी खनन को पूरी निडरता के साथ सरेआम अंजाम दिया जा रहा है। दिन छिपने के बाद ही पौकलेन, जे.सी.बी मशीनों, टिप्परों व ट्रैक्टर ट्रालियों से 20 फुट गहराई तक गरैवल के रूप में कुदरती खनिज को निकाला जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट व नेशनल ग्रीन टयुबनल के आदेशों अनुसार वातावरण विभाग से प्रवानगी लिए बिना कोई भी रेत, मिट्टी, ग्रेवल की खुदाई नही कर सकता, परंतु सर्वोच्च अदालत की इन हिदायतों की परवाह किए बिना गैरकानूनी तरीके से नाजायज माईनिंग बेखौफ जारी है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हलके के गांव रामपुर, छत्त, बाकरपुर, पीरमुछल्ला, सनौली के साथ लगते क्षेत्र, ककराली व मुबारकपुर में सियासी रसुखदार व धनाढय लोगों द्वारा इस गैरकानूनी काम को अंजाम दिया जा रहा है। जब पत्रकारों की टीम ने संबंधित जगहों का दौरा किया तो गुंडा पर्ची द्वारा पैसे वसूलने वाले ठेकेदार अपने दफ्तरों को ताले लगाकर भाग गए।
वहां लगा भार तोलने वाला कांटा भी खराब पड़ा था व कंप्युटर को भी कंबलों से ढका हुआ था। भारी संख्या में टिप्पर व ट्रेक्टर चालकों ने पत्रकरों को बताया कि उन्हे बिना पर्ची के रॉयलटी के नाम पर एक टिप्पर पर प्रति सैंकड़ा साढे तीन रूपए व ट्रैक्टर से ढाई रूपए वसूला जाता है। उन्होंने बताया कि बिना पर्ची दिए दो गेटों की रोजाना की कमाई पांच लाख रूपए के करीब बनती है व एक महीने में करीब डेढ करोड़ रूपए बिना पर्ची के नाम पर गुंडागर्दी तरीके से वसूला जा रहा है। माईनिंग वाली जगहों की कवरेज कर रहे पत्रकारों को संबंधित ठेकेदारें द्वारा बुरे परिणाम भुगतने व किसी घिनोने जुर्म में फंसाने की धमकी दी गई। पास ही गांव के लोगों ने बताया कि नियमों अनुसार स्टोन क्रैशर लगाने के लिए मुख्य सड़क व घग्गर से दूरी निर्धारित की गई है पर कई लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर सड़कों किनारे व घगगर दरिया के बीच में ही क्रैशर लगाए हुए हैं। परंतु प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी आंख बंद कर बैठा है।
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इस बारे माईनिंग विभाग के जनरल मैनेजर चमन लाल से बात की गई तो वे पहले नाजायज माईनिंग से मुकर ही गए परंतु बाद में कहा कि जल्द ही इसे बंद करवा दिया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट व नेशनल ग्रीन टयुबनल के आदेशों अनुसार वातावरण विभाग से प्रवानगी लिए बिना कोई भी रेत, मिट्टी, ग्रेवल की खुदाई नही कर सकता, परंतु सर्वोच्च अदालत की इन हिदायतों की परवाह किए बिना गैरकानूनी तरीके से नाजायज माईनिंग बेखौफ जारी है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हलके के गांव रामपुर, छत्त, बाकरपुर, पीरमुछल्ला, सनौली के साथ लगते क्षेत्र, ककराली व मुबारकपुर में सियासी रसुखदार व धनाढय लोगों द्वारा इस गैरकानूनी काम को अंजाम दिया जा रहा है। जब पत्रकारों की टीम ने संबंधित जगहों का दौरा किया तो गुंडा पर्ची द्वारा पैसे वसूलने वाले ठेकेदार अपने दफ्तरों को ताले लगाकर भाग गए।
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वहां लगा भार तोलने वाला कांटा भी खराब पड़ा था व कंप्युटर को भी कंबलों से ढका हुआ था। भारी संख्या में टिप्पर व ट्रेक्टर चालकों ने पत्रकरों को बताया कि उन्हे बिना पर्ची के रॉयलटी के नाम पर एक टिप्पर पर प्रति सैंकड़ा साढे तीन रूपए व ट्रैक्टर से ढाई रूपए वसूला जाता है। उन्होंने बताया कि बिना पर्ची दिए दो गेटों की रोजाना की कमाई पांच लाख रूपए के करीब बनती है व एक महीने में करीब डेढ करोड़ रूपए बिना पर्ची के नाम पर गुंडागर्दी तरीके से वसूला जा रहा है। माईनिंग वाली जगहों की कवरेज कर रहे पत्रकारों को संबंधित ठेकेदारें द्वारा बुरे परिणाम भुगतने व किसी घिनोने जुर्म में फंसाने की धमकी दी गई। पास ही गांव के लोगों ने बताया कि नियमों अनुसार स्टोन क्रैशर लगाने के लिए मुख्य सड़क व घग्गर से दूरी निर्धारित की गई है पर कई लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर सड़कों किनारे व घगगर दरिया के बीच में ही क्रैशर लगाए हुए हैं। परंतु प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी आंख बंद कर बैठा है।
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इस बारे माईनिंग विभाग के जनरल मैनेजर चमन लाल से बात की गई तो वे पहले नाजायज माईनिंग से मुकर ही गए परंतु बाद में कहा कि जल्द ही इसे बंद करवा दिया जाएगा।