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अब बारिश में नहीं कटेगा मसौल का शहरों से संपर्क

Mon, 23 May 2016 10:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली Updated Mon, 23 May 2016 10:29 AM IST
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masaul villege, not dicanect ather cities, mohali
अब बारिश में नहीं कटेगा मसौल का शहरों से संपर्क - फोटो : अमर उजाला
 पंजाब-हिमाचल की सीमा पर बसा गांव मसौल अब बारिश के दिनों में भी राजधानी से जुड़ा रहेगा। दरअसल, इस गांव को जाने वाली सड़क पर अब तक कोई पुल नहीं था। इस कारण बारिश के सीजन में मसौल गांव का संपर्क शहर से कट जाता था। सरकार ने नया गांव से लेकर मसौल तक चार पुल बनाने के योजना को हरी झंडी देकर निर्माण कार्य शुरू किया है। इन पुलों का निर्माण कार्य लगभग 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जबकि शेष 40 प्रतिशत निर्माण कार्य जनवरी 2017 से पहले पूरा होने की उम्मीद है। इन पुलों के निर्माण के बाद बारिश के दिनों में भी मसौल व इसके आसपास क्षेत्र में आने वाले लोगों का शहरों से संपर्क बना रहेगा। विशेषकर विपरीत हालात दुर्घटना, बीमारी और दूसरे कारणों से तत्काल शहर आने-जाने की सुविधा में किसी किसी प्रकार की रुकावट नहीं होगी। हालांकि, अब तक बारिश के समय में मसौल व इसके आसपास क्षेत्र में रहने वाले लोगों का यहां से निकलना संभव नहीं था।
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पूरी हो रही है मसौल वासियों की मुराद
सरकार की इस पहल से मसौल वासी खुश हैं। इनका कहना है कि पिछले वर्षों में जो परेशानी वह झेल चुके हैं, उससे उन्हें छुटकारा मिल जाएगा। गांव वासियों के मुताबिक, सुविधाओं के लिहाज से उनका गांव काफी पिछड़ा हुआ है।
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अब तक यहां नहीं हैं मेडिकल सुविधाएं
गांव वालों की मानें तो तो अभी तक यहां स्वास्थ्य सेवाएं तक उपलब्ध नहीं है। आम दिनों में यहां दूर शहर जाकर वे मेडिकल सुविधाएं ले सकते हैं, लेकिन बारिश के दिनों में मरीज को शहर ले जाना मुश्किल था। गौरतलब है कि मसौल से चंडीगढ़ करीब 30 से 35 किलोमीटर की दूरी पर है।
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ऊंट मसौल में है उपयोगी
रेगिस्तान का जहाज कहे जाने वाले ऊंट का उपयोग पंजाब के मसौल में होता है। क्योंकि इस इलाके में काफी क्षेत्र रेतीला है,जहां ऊंट का उपयोग कारगर है। इसलिए मसौल में रहने वाले ऐसे कई ग्रामीण हैं, जोकि ऊंट पालते हैं और अपने कामकाज में ऊंट का ही उपयोग करते हैं।


जीवाश्म मिलने के बाद चर्चा में आया मसौल
मसौल का जिक्र देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुबान से भी हो चुका है, क्योंकि इंडिया-फ्रांस के पुरातत्वविद् मसौल में संयुक्त अभियान चलाकर खुदाई कर चुके हैं। इन्हें मसौल में खुदाई के दौरान कई प्राचीन वस्तुएं मिली। वहीं चर्चा ये भी हुई कि यहां से कुछ ऐसे जीवाश्व मिले हैं, जोकि दुनिया के सबसे पुराने जीवाश्व हो सकते हैं। वहीं पीएमओ भी इस क्षेत्र में अंवेक्षण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को पत्र भेज चुका है।
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