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Mohali News: जमीन अधिग्रहण मुआवजे में बड़ी बढ़ोतरी, प्रति एकड़ 3.86 करोड़ रुपये करने के आदेश कोर्ट से
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय मोहाली ने गांव होशियारपुर में अधिग्रहित जमीन के मालिकों के पक्ष में सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय मोहाली ने गांव होशियारपुर में अधिग्रहित जमीन के मालिकों के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने भूमि अधिग्रहण कलेक्टर द्वारा निर्धारित मुआवजे को बढ़ाकर 3,86,86,925 रुपये प्रति एकड़ करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं को कानून के तहत मिलने वाले सभी वैधानिक लाभ भी दिए जाएंगे। यह जमीन मुल्लांपुर से कुराली-सिसवां टी-जंक्शन तक 200 फीट चौड़ी सड़क के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। पंजाब सरकार ने 9 सितंबर 2013 को अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 8 जुलाई 2015 को अवार्ड नंबर 558 पारित कर मुआवजा निर्धारित किया था। जमीन मालिकों ने 20 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि जमीन चंडीगढ़ से सटे क्षेत्र में है और स्टेट हाईवे पर होने के कारण इसकी व्यावसायिक एवं आवासीय क्षमता अधिक है। अदालत ने 31 जनवरी 2024 के एक समान मामले को आधार बनाया। उस फैसले में भी मुआवजा 3,86,86,925 रुपये प्रति एकड़ तय हुआ था। गमाडा की देरी की दलील खारिज कर दी गई। अदालत ने पाया कि अवार्ड पारित होने के समय याचिकाकर्ताओं की मौजूदगी या प्रतिनिधित्व का कोई रिकॉर्ड नहीं था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय मोहाली ने गांव होशियारपुर में अधिग्रहित जमीन के मालिकों के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने भूमि अधिग्रहण कलेक्टर द्वारा निर्धारित मुआवजे को बढ़ाकर 3,86,86,925 रुपये प्रति एकड़ करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं को कानून के तहत मिलने वाले सभी वैधानिक लाभ भी दिए जाएंगे। यह जमीन मुल्लांपुर से कुराली-सिसवां टी-जंक्शन तक 200 फीट चौड़ी सड़क के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। पंजाब सरकार ने 9 सितंबर 2013 को अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 8 जुलाई 2015 को अवार्ड नंबर 558 पारित कर मुआवजा निर्धारित किया था। जमीन मालिकों ने 20 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि जमीन चंडीगढ़ से सटे क्षेत्र में है और स्टेट हाईवे पर होने के कारण इसकी व्यावसायिक एवं आवासीय क्षमता अधिक है। अदालत ने 31 जनवरी 2024 के एक समान मामले को आधार बनाया। उस फैसले में भी मुआवजा 3,86,86,925 रुपये प्रति एकड़ तय हुआ था। गमाडा की देरी की दलील खारिज कर दी गई। अदालत ने पाया कि अवार्ड पारित होने के समय याचिकाकर्ताओं की मौजूदगी या प्रतिनिधित्व का कोई रिकॉर्ड नहीं था।