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Mohali News: मजीठिया के करीबी हरप्रीत सिंह गुलाटी को कोर्ट ने पटियाला जेल भेजा
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मोहाली। आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूर्व अकाली मंत्री विक्रम सिंह मजीठिया के करीबी हरप्रीत सिंह गुलाटी को विजिलेंस ने कोर्ट में पेश किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए उसे पटियाला जेल भेजने के आदेश दिए और 20 दिसंबर 2025 को विशेष अदालत मोहाली में पेश करने के निर्देश दिए। आदेश की प्रति आरोपी के वकील और विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी गई है।
सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी द्वारा आगे पुलिस रिमांड मांगे जाने के अधिकार को लेकर अदालत में दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने केस डायरी और मेडिकल रिकॉर्ड का अवलोकन किया। मेडिकल रिपोर्ट में आरोपी को किसी प्रकार की चोट नहीं मिली। आरोपी के वकील ने दलील दी कि अदालत जांच एजेंसी को आगे पुलिस कस्टडी मांगने की स्वतंत्रता देने संबंधी कोई आदेश पास नहीं कर सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 5 के तहत विशेष न्यायाधीश को मजिस्ट्रेट माना जाता है, इसलिए इस संबंध में आदेश जारी करना अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने अपने पक्ष में एक केस का हवाला दिया। वहीं, विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से कहा गया कि यह मुद्दा 2 दिसंबर 2025 के आदेश में पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है। जांच एजेंसी ने आरोपी को न्यायिक हिरासत भेजने के साथ-साथ आगे आवश्यकता पड़ने पर पुलिस रिमांड की मांग करने के अधिकार को सुरक्षित रखने की प्रार्थना की। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी बीएनएसएस के संबंधित प्रावधानों के तहत सक्षम अदालत के समक्ष आगे पुलिस रिमांड का अनुरोध कर सकती है।
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सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी द्वारा आगे पुलिस रिमांड मांगे जाने के अधिकार को लेकर अदालत में दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने केस डायरी और मेडिकल रिकॉर्ड का अवलोकन किया। मेडिकल रिपोर्ट में आरोपी को किसी प्रकार की चोट नहीं मिली। आरोपी के वकील ने दलील दी कि अदालत जांच एजेंसी को आगे पुलिस कस्टडी मांगने की स्वतंत्रता देने संबंधी कोई आदेश पास नहीं कर सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 5 के तहत विशेष न्यायाधीश को मजिस्ट्रेट माना जाता है, इसलिए इस संबंध में आदेश जारी करना अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने अपने पक्ष में एक केस का हवाला दिया। वहीं, विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से कहा गया कि यह मुद्दा 2 दिसंबर 2025 के आदेश में पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है। जांच एजेंसी ने आरोपी को न्यायिक हिरासत भेजने के साथ-साथ आगे आवश्यकता पड़ने पर पुलिस रिमांड की मांग करने के अधिकार को सुरक्षित रखने की प्रार्थना की। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी बीएनएसएस के संबंधित प्रावधानों के तहत सक्षम अदालत के समक्ष आगे पुलिस रिमांड का अनुरोध कर सकती है।
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