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Mohali News: लीगल एड डिफेंस काउंसिल नीति के विरोध में वकीलों का आंदोलन तेज

Thu, 16 Jul 2026 02:09 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2026 02:09 AM IST
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Lawyers' agitation against the Legal Aid Defense Counsel policy intensifies.
डेराबस्सी। जॉइंट एक्शन कमेटी, पंजाब के आह्वान पर 7 जुलाई से जारी वकीलों का असमय संघर्ष आज भी पूरे जोश के साथ जारी रहा। लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलऐडीसी) नीति के खिलाफ पंजाब भर की बार एसोसिएशन्स ने एक सुर में आवाज बुलंद की। प्रदेश भर में वकीलों ने न्यायालयीन कार्य का पूर्ण बहिष्कार करते हुए तीव्र विरोध प्रदर्शन किए, जिससे अदालती कामकाज पूरी तरह ठप रहा।
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डेरा बस्सी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह दप्पर ने बताया कि 14 जुलाई को पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय के माननीय जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज की अध्यक्षता में गठित कमेटी के साथ प्रदेश की समस्त बार एसोसिएशन्स के अध्यक्षों व पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में वकील बिरादरी ने एलऐडीसी नीति की गंभीर खामियों तथा इसके न्याय व्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को विस्तार से उजागर किया। हालांकि, इस उच्च स्तरीय बैठक के बावजूद कोई ठोस समाधान न निकलने पर समूह बार एसोसिएशन्स ने सर्वसम्मति से आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
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वकील नेताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व में कमेटी पर भरोसा जताते हुए आंदोलन स्थगित किया गया था, लेकिन अब यह लड़ाई वकीलों के अधिकारों की रक्षा हेतु एक बड़े आंदोलन का स्वरूप ले चुकी है। आज डेरा बस्सी बार एसोसिएशन के वकीलों ने अदालत के मुख्य गेट पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करते हुए हड़ताल को पूरी तरह सफल बनाया।
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इस मौके पर उपाध्यक्ष राम कुमार धीमान, सचिव इंदरपाल सिंह खारी, ज्वाइंट सेक्रेटरी सीमा धीमान के साथ सीनियर वकील सूच्चा सिंह, राजबीर मुन्दरा, नितिन कौशल, जसबीर चौहान, सुमित गोयल, जसवंत सिंह तूर, कंवलजीत वर्मा, राजेश सागर, गुरप्रीत बैदवान, जुज़ार सिंह, अरुण गुप्ता, अमन गाजीपुर और सुमन चौहान सहित बड़ी संख्या में वकील मौजूद रहे।

नीति पर उठे सवाल: वकीलों के हितों को नुकसान
प्रैक्टिस पर असर: वकील नेताओं का आरोप है कि मौजूदा एलऐडीसी नीति रोजमर्रा की प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के हितों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा रही है।
तार्किकता पर सवाल: प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि एक तरफ सरकार सरकारी वकील (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) नियुक्त कर मामले की पैरवी करवा रही है और दूसरी ओर आरोपियों को भी सरकारी खर्च पर एलऐडीसी के तहत वकील उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो न्यायसंगत नहीं है।

आर-पार की लड़ाई: वकीलों ने साफ किया है कि जब तक इस त्रुटिपूर्ण नीति को वापस या संशोधित नहीं किया जाता, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
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