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यूक्रेन से कुराली का केशव पहुंचा घर, परिजनों में खुशी की लहर
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कुराली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ओडेसा शहर में फंसा एमबीबीएस फाइनल ईयर का कुराली निवासी विद्यार्थी केशव सिंगला सकुशल घर लौट आया है। भारत सरकार के ऑपरेशन गंगा के तहत उसकी वतन वापसी हुई है। दिल्ली एयरपोर्ट से देर रात घर पहुंचने के बाद केशव सिंगला और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली और उनके पिता राजीव सिंगला की आंखें अपने बेटे को देखकर खुशी से भर आईं।
अपने अनुभव साझा करते हुए केशव ने बताया कि हमने किताबों में युद्धों के बारे में पढ़ा था, अब आंखों से युद्ध के हालात और तबाही देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि रूस के हमले के बाद रोजाना बदतर हो रहे हालात के बीच उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अब घर वापसी कैसे होगी। हालांकि इस दौरान वह भारतीय दूतावास और फोन पर अपने अभिभावकों के संपर्क में रहा। भारत सरकार ने यूक्रेन से निकलने की एडवाइजरी जारी की, पर बॉर्डर तक पहुंचना आसान नहीं था। यूक्रेन सरकार की ओर से विद्यार्थियों के लिए चलाई गई विशेष ट्रेन से वह अपने साथियों सहित ओडेसा शहर से 1020 किमी का सफर तय कर किसी तरह हंगरी बॉर्डर तक पहुंचे। इस 16 घंटों के सफर के दौरान सभी सहमे हुए थे।
खाने-पीने की चीजों के लिए भटकना पड़ा
केशव सिंगला ने बताया कि यूक्रेन में विद्यार्थियों को खाने-पीने की चीजों के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं हंगरी पहुंचने पर भारत सरकार की ओर सभी स्टूडेंट्स को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के साथ उन्हें स्पेशल फ्लाइट से दिल्ली और वहां उनके शहरों तक फ्लाइट से भेजा गया।
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यूक्रेन पुलिस नहीं कर रही भारतीय विद्यार्थियों की मदद
केशव ने बताया कि हंगरी के निकट यूक्रेन बॉर्डर के पास से हंगरी बॉर्डर तक पहुंचने के लिए उन्हें बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस दौरान यूक्रेन पुलिस ने भी उनकी सहायता नहीं की और जैसे तैसे वह हंगरी बॉर्डर को क्रॉस करने में कामयाब रहे।
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अपने अनुभव साझा करते हुए केशव ने बताया कि हमने किताबों में युद्धों के बारे में पढ़ा था, अब आंखों से युद्ध के हालात और तबाही देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि रूस के हमले के बाद रोजाना बदतर हो रहे हालात के बीच उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अब घर वापसी कैसे होगी। हालांकि इस दौरान वह भारतीय दूतावास और फोन पर अपने अभिभावकों के संपर्क में रहा। भारत सरकार ने यूक्रेन से निकलने की एडवाइजरी जारी की, पर बॉर्डर तक पहुंचना आसान नहीं था। यूक्रेन सरकार की ओर से विद्यार्थियों के लिए चलाई गई विशेष ट्रेन से वह अपने साथियों सहित ओडेसा शहर से 1020 किमी का सफर तय कर किसी तरह हंगरी बॉर्डर तक पहुंचे। इस 16 घंटों के सफर के दौरान सभी सहमे हुए थे।
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खाने-पीने की चीजों के लिए भटकना पड़ा
केशव सिंगला ने बताया कि यूक्रेन में विद्यार्थियों को खाने-पीने की चीजों के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं हंगरी पहुंचने पर भारत सरकार की ओर सभी स्टूडेंट्स को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के साथ उन्हें स्पेशल फ्लाइट से दिल्ली और वहां उनके शहरों तक फ्लाइट से भेजा गया।
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यूक्रेन पुलिस नहीं कर रही भारतीय विद्यार्थियों की मदद
केशव ने बताया कि हंगरी के निकट यूक्रेन बॉर्डर के पास से हंगरी बॉर्डर तक पहुंचने के लिए उन्हें बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस दौरान यूक्रेन पुलिस ने भी उनकी सहायता नहीं की और जैसे तैसे वह हंगरी बॉर्डर को क्रॉस करने में कामयाब रहे।