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खाना खजाना : वीआईपी रोड की मलाई टिक्का चाप नहीं खाई तो क्या खाया..
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खाना खजाना
जीरकपुर के वीआईपी रोड की मलाई टिक्का चांप नहीं खाई तो क्या खाया
माई सिटी रिपोर्टर
जीरकपुर। खाने के शौकीन बढ़िया खाने के लिए दूर-दूर तक चले जाते हैं। बढ़िया मलाई टिक्का चांप खाने के लिए आपको ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ेगा। वीआईपी रोड पर स्थित मीनूज किचन की मलाई टिक्का चांप ट्राइसिटी में लोग खूब पसंद करते हैं। किचन के मालिक महिंदरपाल सिंह ने बताया कि आमतौर पर जो लोग चांप खाने के शौकीन है, उन्हें असली स्वाद हमारी किचन से तैयार होने वाली चांप से मिलता है। इसका कारण यह है कि यहां बनने वाली ‘चांप’ का रॉ मैटीरियल दिल्ली से आता है, जिसमें गरम मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि किचन में काम करने वाले कर्मचारी (जो नाम व बड़े होटलों में काम कर चुके हैं) खुद तैयार किए मसाले डालते हैं।
थाईलैंड भी चख चुका है चांप का स्वाद
महिंदरपाल सिंह ने बताया उनका जन्म पंजाब के जिला लुधियाना में हुआ। इसके बाद मेरी सारी परवरिश थाईलैंड (ननिहाल) में हुई। वहां रहकर अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों को बनाने का काम सीखा। इसके बाद थाईलैंड में काम शुरू किया और सात वर्षों तक वहां लोगों को चांप का स्वाद चखाया जिसके बाद वह भारत आ गए। यहां आकर उन्होंने चांप की अलग-अलग वेरायटी बनाना शुरू की, जिसे धीरे-धीरे लोगों ने पसंद करना शुरू कर दिया। अब पूरे दिन के आर्डरों में सबसे ज्यादा डिमांड मलाई टिक्का चांप की होती है।
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जीरकपुर के वीआईपी रोड की मलाई टिक्का चांप नहीं खाई तो क्या खाया
माई सिटी रिपोर्टर
जीरकपुर। खाने के शौकीन बढ़िया खाने के लिए दूर-दूर तक चले जाते हैं। बढ़िया मलाई टिक्का चांप खाने के लिए आपको ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ेगा। वीआईपी रोड पर स्थित मीनूज किचन की मलाई टिक्का चांप ट्राइसिटी में लोग खूब पसंद करते हैं। किचन के मालिक महिंदरपाल सिंह ने बताया कि आमतौर पर जो लोग चांप खाने के शौकीन है, उन्हें असली स्वाद हमारी किचन से तैयार होने वाली चांप से मिलता है। इसका कारण यह है कि यहां बनने वाली ‘चांप’ का रॉ मैटीरियल दिल्ली से आता है, जिसमें गरम मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि किचन में काम करने वाले कर्मचारी (जो नाम व बड़े होटलों में काम कर चुके हैं) खुद तैयार किए मसाले डालते हैं।
थाईलैंड भी चख चुका है चांप का स्वाद
महिंदरपाल सिंह ने बताया उनका जन्म पंजाब के जिला लुधियाना में हुआ। इसके बाद मेरी सारी परवरिश थाईलैंड (ननिहाल) में हुई। वहां रहकर अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों को बनाने का काम सीखा। इसके बाद थाईलैंड में काम शुरू किया और सात वर्षों तक वहां लोगों को चांप का स्वाद चखाया जिसके बाद वह भारत आ गए। यहां आकर उन्होंने चांप की अलग-अलग वेरायटी बनाना शुरू की, जिसे धीरे-धीरे लोगों ने पसंद करना शुरू कर दिया। अब पूरे दिन के आर्डरों में सबसे ज्यादा डिमांड मलाई टिक्का चांप की होती है।
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