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Mohali News: गमाडा में घोटाले की जांच तेज, वरिष्ठ अधिकारियों और बिल्डर पर एफआईआर के लिए ईडी ने पंजाब पुलिस से किया संपर्क

Sun, 25 Oct 2026 02:13 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 02:13 AM IST
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Investigation into the GMADA scam intensifies; ED approaches Punjab Police for registration of an FIR against senior officials and a builder.
सेक्टर-62 के भूखंड पर वित्तीय रियायतों की जांच, पुराने दाम पर 441 प्लॉट आवंटित करने से 400 करोड़ के नुकसान का अनुमान
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) में जमीन के सौदों और वित्तीय रियायतों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गमाडा के वरिष्ठ अधिकारियों और दिल्ली की रियल एस्टेट कंपनी रेमिगेट बिल्डस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पंजाब पुलिस से संपर्क किया है। जांच का एक प्रमुख पहलू कंपनी को दी गई वित्तीय राहत और मोहाली के सेक्टर-62 में व्यावसायिक भूखंड के आवंटन से जुड़ा है। सितंबर 2015 में 1.13 एकड़ का फूड कोर्ट स्थल नीलामी के जरिये कंपनी को 32.50 करोड़ रुपये में आवंटित किया गया था। ईडी यह जांच कर रही है कि कंपनी को बकाया राशि, ब्याज और अन्य शुल्कों में किस आधार पर राहत दी गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 57 करोड़ रुपये के बकाये की छूट का मामला सामने आया है, जबकि लगभग 40 करोड़ रुपये की राहत अलग से चर्चा में रही है। पंजाब के आवास निर्माण एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव विकास गर्ग ने 15 अक्तूबर को कंपनी की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। साथ ही, गमाडा के अपीलीय अधिकारी की ओर से 5 फरवरी 2026 को जारी आदेश को भी रद कर दिया। इससे कंपनी को दी गई करीब 40 करोड़ रुपये की राहत वापस ले ली गई।
441 प्लॉट पुराने दाम पर आवंटित करने की जांच
ओस्टी नीति के तहत आवासीय प्लॉटों के आवंटन को लेकर भी ईडी जांच कर रही है। हिंदुस्तान टाइम्स की 23 अक्तूबर की रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी ने पुराने दाम पर प्लॉट आवंटित किए जाने से पंजाब सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2018-19 में प्लॉटों की दर 25,000 रुपये प्रति वर्ग गज थी, जो 2025-26 तक बढ़कर 65,000 रुपये प्रति वर्ग गज हो गई। इसके बावजूद पुरानी दरों पर आवंटन पत्र जारी किए जाने की जांच की जा रही है। जांच के अनुसार, वर्ष 2019 से 2026 के बीच आईटी सिटी के सेक्टर-82 अल्फा में 100 और सेक्टर-66 बीटा में 341 प्लॉट आवंटित किए गए। इस तरह कुल 441 प्लॉट आवंटित हुए, जबकि 169 आवेदन लंबित बताए गए हैं। ईडी आवंटन प्रक्रिया, दस्तावेज की जांच और निर्धारित समय में इरादा पत्र जारी करने से संबंधित कथित खामियों की भी पड़ताल कर रही है।
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पुड्डा भवन में 50 घंटे तक चली थी ईडी की तलाशी
ईडी ने 22 से 24 सितंबर के बीच मोहाली के सेक्टर-62 स्थित पुड्डा भवन में करीब 50 घंटे तक तलाशी और जांच की थी। इस दौरान सरकारी रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित सामग्री की पड़ताल की गई। गमाडा और पंजाब सरकार ने ईडी की इस कार्रवाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। 7 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ईडी और केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को निर्धारित है। अब एफआईआर दर्ज कराने के लिए ईडी की ओर से पंजाब पुलिस से संपर्क किए जाने के बाद जांच आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होना जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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