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अवैध कब्जे किए तो गुरुग्राम की तर्ज पर भरनी होगी फीस
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मोहाली। वीआईपी शहर में लोगों द्वारा कोठियों, प्लॉटों, फ्लैटों और शोरूमों के बाहर किए गए अवैध कब्जे हटाने के लिए आने वाले समय में नगर निगम गुरुग्राम मॉडल पर काम कर सकता है। इसके तहत निगम लोगों के किए कब्जे हटाएगा नहीं, बल्कि उनसे हर माह फीस वसूलेगा। इतना ही नहीं जो फीस नहीं भरेगा, उनकी संपत्ति तक अटैच की जा सकती है। नगर निगम के मेयर कुलवंत सिंह ने इस मुद्दे पर एक स्पेशल मीटिंग बुुलाने का फैसला लिया है। इस संबंधी सभी पार्षदों से सुझाव मांगे गए हैं और आने वाली मीटिंग में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने लोगों से भी इसके लिए सहयोग मांगा।
जानकारी के मुताबिक वीरवार को नगर निगम की मीटिंग में पार्षद सुखदेव सिंह पटवारी ने सुझाव दिया कि शहर में लोगों द्वारा कोठियों, प्लॉटों, फ्लैटों और शोरूमों में किए अवैध कब्जे हटाने के लिए गुरुग्राम का मॉडल अपनाया जाए। इस नीति के तहत उक्त संपत्ति मालिकों को गमाडा की नीति अनुसार कुछ शर्तों पर लैंड स्केपिंग के पूरे अधिकार दे और इसके बदले में प्रति फुट के हिसाब से किराया निश्चित कर ले। शुरुआत तीन रुपये प्रति फुट से की जा सकती है। यह अदायगी प्रॉपर्टी टैक्स की तरह वार्षिक भी हो सकती है। टैक्स न भरने वाले का चालान काटा जाए और फिर प्रॉपर्टी टैक्स वाली शर्तों के अधीन मकान सील किया जाए।
पटवारी का कहना है कि ऐसे में कोई भी सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं करेगा क्योंकि जमीन का बिल निगम की तरफ से भेजा जाएगा। इससे लोग खुद कहेंगे कि उन्हें उक्त जमीन नहीं लेनी है। वही इस काम के लिए कारपोरेशन व पुलिस की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे जहां निगम की आमदन भी बढ़ेगी, वहीं शहर से गैर-कानूनी कब्जे हटेंगे।
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जानकारी के मुताबिक वीरवार को नगर निगम की मीटिंग में पार्षद सुखदेव सिंह पटवारी ने सुझाव दिया कि शहर में लोगों द्वारा कोठियों, प्लॉटों, फ्लैटों और शोरूमों में किए अवैध कब्जे हटाने के लिए गुरुग्राम का मॉडल अपनाया जाए। इस नीति के तहत उक्त संपत्ति मालिकों को गमाडा की नीति अनुसार कुछ शर्तों पर लैंड स्केपिंग के पूरे अधिकार दे और इसके बदले में प्रति फुट के हिसाब से किराया निश्चित कर ले। शुरुआत तीन रुपये प्रति फुट से की जा सकती है। यह अदायगी प्रॉपर्टी टैक्स की तरह वार्षिक भी हो सकती है। टैक्स न भरने वाले का चालान काटा जाए और फिर प्रॉपर्टी टैक्स वाली शर्तों के अधीन मकान सील किया जाए।
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पटवारी का कहना है कि ऐसे में कोई भी सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं करेगा क्योंकि जमीन का बिल निगम की तरफ से भेजा जाएगा। इससे लोग खुद कहेंगे कि उन्हें उक्त जमीन नहीं लेनी है। वही इस काम के लिए कारपोरेशन व पुलिस की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे जहां निगम की आमदन भी बढ़ेगी, वहीं शहर से गैर-कानूनी कब्जे हटेंगे।
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