{"_id":"6060e9be8ebc3eda731ba039","slug":"holi-will-be-celebrate-in-vip-city-mohali-news-pkl4086650113","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना के बीच वीआईपी सिटी में होली की उमंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना के बीच वीआईपी सिटी में होली की उमंग
विज्ञापन
मोहाली। रविवार को वीआईपी सिटी के बाजार होली के रंगों में रंगे नजर आए। छुट्टी के दिन लोग होली की खरीदारी के लिए बाजारों में पहुंचे। बच्चों में खास उत्साह देखने को मिला। खास बात यह रही कि चीनी रंग बाजारों से गायब दिखे। हर्बल रंगों की मांग लोगों की बीच खासी रही। वहीं, बच्चों को कार्टून करेक्टर वाली पिचकारियां ज्यादा पसंद आईं।
कोरोना काल के बीच मन रही दूसरी होली के लिए रविवार को लोगों ने बाजारों में रंगों की खरीदारी की। लाल, पीले, नीले, हरे, गुलाबी, परपल, आसमानी रंगों और रंग बिरंगी पिचकारियों से सजी दुकानों पर बच्चों सहित युवाओं की भीड़ देखने को मिली। छोटे बच्चे भी तरह-तरह की पिचकारियां खरीदने में व्यस्त दिखे। इस होली बाजारों से चीनी पिचकारियां और रंग गायब हैं। दुकानदारों ने भी मांग न होने के चलते चीनी सामान नहीं खरीदा। इस बार होली के लिए हर्बल रंगों की जबरदस्त मांग देखने को मिली। व्यापारियों के अनुसार इस बार होली पर हर्बल, आर्गेनिक, फ्रूट और ठंडे रंग लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हर्बल रंगों के गिफ्ट पैक भी बाजारों में खूब बिके। जिसमें रंगों के साथ सूखे फूलों को डाला गया है। सामाजिक दूरी बना कर होली खेलने के लिए गुलाल की खास पैकिंग भी लोगों को खूब पसंद आई। इस पेकिंग की खासियत यह है कि इसे खोलते ही चार रंग के गुलाल एक साथ सभी दिशाओं में उड़ेंगे। बाजार में 50 रुपए से लेकर 1000 रुपए की पिचकारी भी खूब बिकी। बच्चों पंप वाली, मोटू पतलू वाली, डोरेमोन वाली, माशा द बीयर वाली पिचकारी सहित पिस्टल, मछली, बैग की तरह कंधों पर टांगने वाली पिचकारी पसंद की। इसके साथ ही राफेल पिचकारी, एके 47, टैंक व प्रेशर पिचकारी सहित कलर बैलून भी बच्चों को पसंद आए।
बाक्स
सिविल अस्पताल मोहाली के डॉ. भूषण कहते हैं कि होली के केमिकल युक्त रंग जहां चमड़ी रोग, स्किन कैंसर का कारण बनते हैं वहीं अस्थमा के रोगियों के लिए भी मौत का कारण बन सकते हैं। अस्थमा रोगियों को हवा में उड़ रहे केमिकल युक्त रंगों से दूर ही रहना चाहिए। कोविड -19 के चलते भी इस बार अधिक सावधानी रखने की जरूरत है। जिसको जुकाम, खांसी, बुखार है वह परिवार व खुद की सुरक्षा के लिए लोगों दूरी बनाकर रखे। उन्होंने कहा कि बाजार में जो रंग बिक रहे हैं, उनमें अधिकतर केमिकल के इस्तेमाल से बने हैं, जिनसे आंखों की रोशनी जाने के अलावा त्वचा कैंसर तक हो सकता है। किसी जमाने में होली फूलों और प्राकृतिक मेहंदी, हल्दी आदि से बनाए रंगों से खेली जाती थी, लेकिन अब इन रंगों की जगह केमिकल ने ले ली है। कुछ सालों से बाजार में ऐसे भी रंग बिक रहे हैं, जिनमें कांच का चूरा तक पाया जाता है। ऐसे में जरूरी है कि होली के रंग खरीदते समय और इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरती जानी चाहिए
विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना काल के बीच मन रही दूसरी होली के लिए रविवार को लोगों ने बाजारों में रंगों की खरीदारी की। लाल, पीले, नीले, हरे, गुलाबी, परपल, आसमानी रंगों और रंग बिरंगी पिचकारियों से सजी दुकानों पर बच्चों सहित युवाओं की भीड़ देखने को मिली। छोटे बच्चे भी तरह-तरह की पिचकारियां खरीदने में व्यस्त दिखे। इस होली बाजारों से चीनी पिचकारियां और रंग गायब हैं। दुकानदारों ने भी मांग न होने के चलते चीनी सामान नहीं खरीदा। इस बार होली के लिए हर्बल रंगों की जबरदस्त मांग देखने को मिली। व्यापारियों के अनुसार इस बार होली पर हर्बल, आर्गेनिक, फ्रूट और ठंडे रंग लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हर्बल रंगों के गिफ्ट पैक भी बाजारों में खूब बिके। जिसमें रंगों के साथ सूखे फूलों को डाला गया है। सामाजिक दूरी बना कर होली खेलने के लिए गुलाल की खास पैकिंग भी लोगों को खूब पसंद आई। इस पेकिंग की खासियत यह है कि इसे खोलते ही चार रंग के गुलाल एक साथ सभी दिशाओं में उड़ेंगे। बाजार में 50 रुपए से लेकर 1000 रुपए की पिचकारी भी खूब बिकी। बच्चों पंप वाली, मोटू पतलू वाली, डोरेमोन वाली, माशा द बीयर वाली पिचकारी सहित पिस्टल, मछली, बैग की तरह कंधों पर टांगने वाली पिचकारी पसंद की। इसके साथ ही राफेल पिचकारी, एके 47, टैंक व प्रेशर पिचकारी सहित कलर बैलून भी बच्चों को पसंद आए।
विज्ञापन
बाक्स
सिविल अस्पताल मोहाली के डॉ. भूषण कहते हैं कि होली के केमिकल युक्त रंग जहां चमड़ी रोग, स्किन कैंसर का कारण बनते हैं वहीं अस्थमा के रोगियों के लिए भी मौत का कारण बन सकते हैं। अस्थमा रोगियों को हवा में उड़ रहे केमिकल युक्त रंगों से दूर ही रहना चाहिए। कोविड -19 के चलते भी इस बार अधिक सावधानी रखने की जरूरत है। जिसको जुकाम, खांसी, बुखार है वह परिवार व खुद की सुरक्षा के लिए लोगों दूरी बनाकर रखे। उन्होंने कहा कि बाजार में जो रंग बिक रहे हैं, उनमें अधिकतर केमिकल के इस्तेमाल से बने हैं, जिनसे आंखों की रोशनी जाने के अलावा त्वचा कैंसर तक हो सकता है। किसी जमाने में होली फूलों और प्राकृतिक मेहंदी, हल्दी आदि से बनाए रंगों से खेली जाती थी, लेकिन अब इन रंगों की जगह केमिकल ने ले ली है। कुछ सालों से बाजार में ऐसे भी रंग बिक रहे हैं, जिनमें कांच का चूरा तक पाया जाता है। ऐसे में जरूरी है कि होली के रंग खरीदते समय और इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरती जानी चाहिए
विज्ञापन