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वार्डबंदी मामले में हाईकोर्ट ने निकाय विभाग से मांगा जवाब
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मोहाली। नगर निगम के चुनावों को लेकर की जा रही वार्डबंदी का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया। अकाली पार्षदों की तरफ से उक्त वार्डबंदी को रद्द कर नए सिरे से करवाने संबंधी दायर याचिका की सोमवार को अदालत में सुनवाई हुई।
अदालत ने इस मामले में पंजाब सरकार व स्थानीय निकाय विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई छह जनवरी निश्चित की गई है। हालांकि अदालत ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से साफ इनकार किया है। इससे साफ है कि दिसंबर माह में चुनाव हो सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक नगर निगम के पूर्व पार्षद परविंदर सिंह सोहाना, सुरिंदर सिंह रोडा, गुरमुुख सिंह सोहल, कमजीत कौर व आरपी शर्मा के बेटे मनीष की तरफ से इस संबंधी याचिका पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि जब शहर की हदबंदी में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई तो ऐसे में नए सिरे से वार्डबंदी की कोई जरूरत नहीं थी। इसमें सिर्फ एडजस्टमेंट की जा सकती थी, जिसके तहत वार्ड-एक की शुरुआत पिछली वार्डबंदी के अनुसार होनी थी। लेकिन राजनीतिक हितों को देखते हुए इस बार वार्डबंदी के नंबरों की शुरूआत किसी अन्य स्थान से की गई। इसके साथ ही वार्डों के नंबर बदल गए जो कि कानूनी तौर पर सही नहीं है।
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वार्डों की हुई काट छांट
याचिका में कहा गया है कि सरकार की तरफ सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवारों को फायदा देने के लिए की गई नई वार्डबंदी के दौरान ज्यादातर वार्डों की बुरी तरह काट छांट की गई है। इतना ही कई जगह पर एक ही मोहल्ले को कई वार्डों में बांट दिया गया है। इसके अलावा वार्डबंदी की प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए थे। लेकिन इनको कोई राहत नहीं मिली है। जिक्रयोग है कि मोहाली नगर निगम में 50 वार्ड हैं। इनमें से 25 वार्ड इस बार महिलाओं के लिए सीधे आरक्षित कर दिए गए है जबकि अन्य वार्डों में भी बदलाव किया गया है।
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अदालत ने इस मामले में पंजाब सरकार व स्थानीय निकाय विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई छह जनवरी निश्चित की गई है। हालांकि अदालत ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से साफ इनकार किया है। इससे साफ है कि दिसंबर माह में चुनाव हो सकते हैं।
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जानकारी के मुताबिक नगर निगम के पूर्व पार्षद परविंदर सिंह सोहाना, सुरिंदर सिंह रोडा, गुरमुुख सिंह सोहल, कमजीत कौर व आरपी शर्मा के बेटे मनीष की तरफ से इस संबंधी याचिका पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि जब शहर की हदबंदी में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई तो ऐसे में नए सिरे से वार्डबंदी की कोई जरूरत नहीं थी। इसमें सिर्फ एडजस्टमेंट की जा सकती थी, जिसके तहत वार्ड-एक की शुरुआत पिछली वार्डबंदी के अनुसार होनी थी। लेकिन राजनीतिक हितों को देखते हुए इस बार वार्डबंदी के नंबरों की शुरूआत किसी अन्य स्थान से की गई। इसके साथ ही वार्डों के नंबर बदल गए जो कि कानूनी तौर पर सही नहीं है।
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वार्डों की हुई काट छांट
याचिका में कहा गया है कि सरकार की तरफ सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवारों को फायदा देने के लिए की गई नई वार्डबंदी के दौरान ज्यादातर वार्डों की बुरी तरह काट छांट की गई है। इतना ही कई जगह पर एक ही मोहल्ले को कई वार्डों में बांट दिया गया है। इसके अलावा वार्डबंदी की प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए थे। लेकिन इनको कोई राहत नहीं मिली है। जिक्रयोग है कि मोहाली नगर निगम में 50 वार्ड हैं। इनमें से 25 वार्ड इस बार महिलाओं के लिए सीधे आरक्षित कर दिए गए है जबकि अन्य वार्डों में भी बदलाव किया गया है।