मोहाली। श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान घायल खरड़ के गांव भड़ौजियां निवासी हवलदार तेजिंदर सिंह को 24 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उनका हक मिल गया है। एक्स सर्विसमैन ग्रिवांस सेल की निरंतर मेहनत और कानूनी प्रयासों के चलते उन्हें बैटल कैजुअल्टी पेंशन प्रदान कर दी गई है। संगठन के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल एसएस सोही (रिटायर्ड) और संस्था के अधिवक्ता आरएन ओझा ने इस केस को हथियारबंद बल ट्रिब्यूनल चंडीमंदिर तक पहुंचाकर जीत हासिल की। पंजाब रेजीमेंट (3 पंजाब) के जवान तेजिंदर सिंह 31 जुलाई 1985 को सेना में भर्ती हुए थे। 1987 में उनकी यूनिट को आईपीकेएफ के हिस्से के तौर पर श्रीलंका भेजा गया, जहां एलटीटीई के खिलाफ कड़े मोर्चों पर लड़ाई के दौरान वे रोड ओपनिंग पार्टी के समय हुए एक घातक हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी बांह, कंधे, गर्दन और पीठ पर गोलियां लगीं, लेकिन समय रहते बचाव से उनकी जान बच गई। हालांकि मेडिकल कैटेगरी में डाले जाने के बावजूद उन्हें सेवा जारी रखने की अनुमति मिली और 16 साल से अधिक की सेवा के बाद वे 2001 में रिटायर हुए। रिटायरमेंट के समय वादा की गई अपंगता पेंशन उन्हें कभी नहीं दी गई। वर्षों तक प्रयासों के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। 2015 में चंडीमंदिर कमांड अस्पताल में हुए मेडिकल बोर्ड ने 50% डिसेबिलिटी की सिफारिश की, लेकिन उसे भी लागू नहीं किया गया। अंत मामला एएफटी में पहुंचा, जहां लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए तेजिंदर सिंह को बैटल कैजुअल्टी पेंशन पेंशन का पूर्ण हकदार माना। अदालत ने उन्हें 2001 से 2006 तक 40% और 2006 से अब तक 75% बैटल कैजुअल्टी पेंशन देने के निर्देश जारी किए। तेजिंदर सिंह को लगभग 35 लाख रुपये बकाया राशि मिली है और अब उन्हें मासिक करीब 60,200 रुपये पेंशन प्राप्त हो रही है, जो उनकी पूर्व वेतन का 75% है। इसके अलावा वे 10 लाख रुपये एक्स-ग्रेशिया और अन्य लाभों के भी पात्र हैं।