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मसोल: पंजाब का आखिरी गांव, यहां डर कोरोना का नहीं, बुनियादी सुविधाओं के अभाव का है
Wed, 12 May 2021 02:19 AM IST
मोहाली ब्यूरो
वेद शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, नयागांव (पंजाब)
वेद शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, नयागांव (पंजाब)
Published by: मोहाली ब्यूरो
Updated Wed, 12 May 2021 02:19 AM IST
सार
मसोल में पहले करीब 300 घर हुआ करते थे। लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां के काफी लोग दूसरी जगह चले गए हैं। इस कारण गांव में सैकड़ों घर खंडहर पड़े हैं।
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मसोल में बुनियादी सुविधाओं का है अभाव।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मसोल हरियाणा की सीमा पर बसा पंजाब का आखिरी गांव है। इस गांव का मुकद्दर आजादी के इतने साल बाद भी नहीं बदला। यहां न तो पक्का रास्ता है, न परिवहन सुविधा। कोरोना से बचाव के बारे में पूछे जाने पर एक निवासी ने तंज कसा कि साहब यहां तो लोग ही मुश्किल से पहुंच पाते हैं, कोरोना तो दूर की बात है।
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मसोल में पहले करीब 300 घर हुआ करते थे। लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां के काफी लोग दूसरी जगह चले गए हैं। इस कारण गांव में सैकड़ों घर खंडहर पड़े हैं। गांव की सरपंच नीमा कौर के पति लेख सिंह ने बताया कि गांव में केवल 85-90 घर ही बचे हैं। लेख सिंह ने बताया कि कई सरकारें बदली। लेकिन किसी भी सरकार का ध्यान हमारे गांव की तरफ नहीं गया। यहां सिर्फ 2-3 घंटे ही बिजली आती है। उसमें भी वोल्टेज इतनी कम होती है कि पंखा भी नहीं घूमता।
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गांव तक कोई पक्का रास्ता नहीं है। पहाड़ों के बीच में बहते पानी से जो रास्ता बना है। उसी का इस्तेमाल गांव वाले आम रास्ते के तौर पर करते हैं। गांव में एक प्राथमिक स्कूल है, जिसमें सिर्फ एक ही अध्यापक है। इस कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए पैदल ही दूसरे गांव जाना पड़ता है।
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गांव में पानी का संकट, 15 दिन पानी की सप्लाई
मसोल में खंडहर हो चुके मकान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांव के पंच मलकीत सिंह ने बताया कि गांव में पानी की सप्लाई टांडी गांव से आती है। यहां से पूरे हफ्ते में एक या दो दिन सिर्फ 15 मिनट के लिए पानी आता है। इस कारण गांव की महिलाओं को करीब दो किलोमीटर दूर से पैदल ही पीने का पानी लाना पड़ता है।
बुजुर्ग प्यारो देवी ने बताया कि चुनाव के दिनों में हमारे गांव में काफी नेता और गाड़ियां आती हैं, लेकिन इसके बाद यहां हमें कभी कोई नेता या सरकारी अफसर दिखाई नहीं देता। कोरोना के दौरान दूसरी जगहों पर बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। लेकिन पूरे गांव में किसी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क नहीं है, इस कारण बच्चों की पिछले एक साल से कोई पढ़ाई नहीं हो रही है।
गांव के लोगों ने टीका लगवाने और कोरोना जांच से किया इनकार
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र करोरा में कार्यरत डॉ. रेनू ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम 19 अप्रैल को गांव मसोल में टीकाकरण एवं कोरोना जांच के लिए गई थी। लेकिन गांव के लोगों ने टीकाकरण एवं जांच के लिए मना कर दिया था। उनका तर्क था कि यहां लोग तो मुश्किल से पहुंचते हैं कोरोना क्या पहुंचेगा। एक व्यक्ति ने बताया था कि हरियाणा में उनके किसी रिश्तेदार की कोरोना के टीके से मौत हो गई थी। इस कारण हम कोरोना का टीका नहीं लगवाएंगे।
बुजुर्ग प्यारो देवी ने बताया कि चुनाव के दिनों में हमारे गांव में काफी नेता और गाड़ियां आती हैं, लेकिन इसके बाद यहां हमें कभी कोई नेता या सरकारी अफसर दिखाई नहीं देता। कोरोना के दौरान दूसरी जगहों पर बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। लेकिन पूरे गांव में किसी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क नहीं है, इस कारण बच्चों की पिछले एक साल से कोई पढ़ाई नहीं हो रही है।
गांव के लोगों ने टीका लगवाने और कोरोना जांच से किया इनकार
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र करोरा में कार्यरत डॉ. रेनू ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम 19 अप्रैल को गांव मसोल में टीकाकरण एवं कोरोना जांच के लिए गई थी। लेकिन गांव के लोगों ने टीकाकरण एवं जांच के लिए मना कर दिया था। उनका तर्क था कि यहां लोग तो मुश्किल से पहुंचते हैं कोरोना क्या पहुंचेगा। एक व्यक्ति ने बताया था कि हरियाणा में उनके किसी रिश्तेदार की कोरोना के टीके से मौत हो गई थी। इस कारण हम कोरोना का टीका नहीं लगवाएंगे।