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बीबीएमबी-सिटको में केंद्र के हस्तक्षेप के विरोध में उतरे किसान
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मोहाली। जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स के बाहर सोमवार को पंजाब के अलग-अलग किसान संगठनों की ओर से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक रोष प्रदर्शन किया गया। यह रोष प्रदर्शन बीबीएमबी और चंडीगढ़ के सिटको में खत्म की गई पंजाब की नुमाइंदगी के खिलाफ किया गया। किसान संगठनों की ओर से करीब अढ़ाई घंटे तक डीसी ऑफिस के बाहर हाथ में तख्तियां लेकर नारेबाजी की गई।
किसान संगठनों से जुड़े नेताओं ने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार लगातार पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और दिन प्रतिदिन कोई न कोई कदम पंजाब विरोधी उठाकर उसकी हिस्सेदारी खत्म करने पर लगी हुई है। बीते दिनों केंद्र सरकार द्वारा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब के अधिकारियों की अनदेखी करके अन्य राज्यों के अधिकारियों लगाकर मनमाने फैसले ले रही है। जबकि बीबीएमबी पंजाब की धरती पर बना हुआ हैं और इस पर पहला हक पंजाब का बनता है, लेकिन पंजाब की सदस्यता को खत्म करके केंद्र उनसे किसान आंदोलन का बदला ले रहा है।
किसान नेताओं ने बताया कि पहले पंजाब और अब चंडीगढ़ के सिटको में मनमानी ढंग से पंजाब के अधिकारियों की नुमाइंदगी न देकर अन्य राज्यों की तरजीह दी जा रही है और राजधानी चंडीगढ़ पर अभी तक पंजाब के अधिकारियों को तैनात किया जाता रहा है। इसमें भी केंद्र अपनी मनमानी करते हुए पंजाब के अधिकारों के खिलाफ फैसले लेकर धीरे-धीरे पंजाब के वर्चस्व को खत्म करने में लग गया है। सोमवार को 22 किसान संगठनों के कुल 300 से अधिक पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। इस मौके पर कृपाल सिंह, लखविंदर सिंह, जगजीत सिंह, कुलवंत सिंह, कर्म सिंह, हरदीप सिंह, गुरप्रीत सिंह, प्रोफेसर मनजीत सिंह मौजूद रहे।
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किसान संगठनों से जुड़े नेताओं ने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार लगातार पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और दिन प्रतिदिन कोई न कोई कदम पंजाब विरोधी उठाकर उसकी हिस्सेदारी खत्म करने पर लगी हुई है। बीते दिनों केंद्र सरकार द्वारा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब के अधिकारियों की अनदेखी करके अन्य राज्यों के अधिकारियों लगाकर मनमाने फैसले ले रही है। जबकि बीबीएमबी पंजाब की धरती पर बना हुआ हैं और इस पर पहला हक पंजाब का बनता है, लेकिन पंजाब की सदस्यता को खत्म करके केंद्र उनसे किसान आंदोलन का बदला ले रहा है।
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किसान नेताओं ने बताया कि पहले पंजाब और अब चंडीगढ़ के सिटको में मनमानी ढंग से पंजाब के अधिकारियों की नुमाइंदगी न देकर अन्य राज्यों की तरजीह दी जा रही है और राजधानी चंडीगढ़ पर अभी तक पंजाब के अधिकारियों को तैनात किया जाता रहा है। इसमें भी केंद्र अपनी मनमानी करते हुए पंजाब के अधिकारों के खिलाफ फैसले लेकर धीरे-धीरे पंजाब के वर्चस्व को खत्म करने में लग गया है। सोमवार को 22 किसान संगठनों के कुल 300 से अधिक पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। इस मौके पर कृपाल सिंह, लखविंदर सिंह, जगजीत सिंह, कुलवंत सिंह, कर्म सिंह, हरदीप सिंह, गुरप्रीत सिंह, प्रोफेसर मनजीत सिंह मौजूद रहे।
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