{"_id":"655bc1089206889f6804917a","slug":"farmer-groups-surrounded-dc-office-in-protest-against-filing-case-on-stubble-burning-mohali-news-c-71-1-mli1004-8109-2023-11-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mohali News: पराली जलाने पर केस करने के विरोध में किसान जत्थेबंदियों ने घेरा डीसी दफ्तर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mohali News: पराली जलाने पर केस करने के विरोध में किसान जत्थेबंदियों ने घेरा डीसी दफ्तर
विज्ञापन
मोहाली। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में उत्तर भारत के 18 किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ किसान यूनियन सिद्धुपुर ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के सामने धरना दिया। इस धरने का नेतृत्व किसान यूनियन सिद्धुपुर से राज्य प्रेस सचिव मेहर सिंह थेड़ी और जिला अध्यक्ष रविंदर ने किया। इस दौरान डीसी आशिका जैन के देरी से पहुंचने पर किसान संगठनों ने अपनी साथ लाई पराली सड़क पर जलाने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकना चाहा लेकिन वह नहीं माने और पराली को सड़क पर रखकर जला दिया। उन्होंने पंजाब सरकार से मांग करते कहा कि जिन किसानों को अन्नदाता कहा जाता है कि उन्हें जुर्माना करके और अन्य भेदभावपूर्ण कदम उठाकर समाज का विरोधी न बनाया जाए बल्कि उनकी मजबूरी को समझा जाए। इस संबंध में यूनियन नेताओं ने डीसी आशिका जैन को एक मांगपत्र भी दिया। मांगपत्र में कहा गया है कि सरकार पराली जलाने के मामले में किसानों के खिलाफ कार्रवाई बंद करे। पराली को संभालने के लिए बेलर्स और किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी पर दी गई मशीनरी भी पराली के प्रबंधन के लिए बहुत कम है और सरकार खुद इस समस्या से अच्छी तरह वाकिफ है। पत्र में कहा गया है कि सरकार ने ग्रीन ट्रिब्यूनल और माननीय न्यायालय के फैसले के अनुसार किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस या पराली प्रबंधन के रूप में कोई वित्तीय सहायता नहीं दी है। वहीं, सरकार द्वारा 2500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जा रहा है जोकि काफी कम है।
बाढ़ के कारण किसान हो गए हैं बर्बाद
बाढ़ के कारण किसानों की फसलें भी नष्ट हो गईं और मोहाली जिले के डेराबस्सी, लालडू इलाके में कई गांवों की फसलों के साथ-साथ जमीन भी बह गई और किसान पूरी तरह से बर्बाद हो गए। नेताओं ने कहा कि सरकार कह रही थी कि मृत मुर्गियों व बकरियों तक का भी मुआवजा देगी लेकिन किसानों को मात्र पांच एकड़ का मुआवजा 6800 रुपये प्रति एकड़ की दर से मिल रहा है। कम आय वाली भूमि के मालिक जो गेहूं की फसल भी नहीं लगा सकते हैं, उन्हें अधिक मुआवजा दिया जाना चाहिए ताकि किसान अपनी आजीविका प्राप्त कर सकें और भूमि में सुधार कर सकें।
किसानों पर किए गए मामले, जुर्माना और रेड एंट्री वापस की जाएं
मांगपत्र में यह भी कहा गया है कि जब सरकार खुद अपने प्रयासों में विफल हो गई है तो किसानों को क्यों परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि किसानों पर किए गए मामले, जुर्माना और रेड एंट्री वापस की जाएं। यह सब जानते हुए भी अगर सरकार ने किसानों को परेशान करना बंद नहीं किया तो संयुक्त किसान मोर्चा, किसान यूनियन सिद्धूपुर और उत्तर भारत की 18 किसान यूनियनें सरकार के खिलाफ संघर्ष करने को मजबूर होंगी, जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
विज्ञापन
छोटे किसान पराली प्रबंधन का खर्च उठाने में सक्षम नहीं : किसान नेता
किसान नेताओं ने कहा कि पंजाब में अधिकतर छोटे किसान हैं और छोटे किसानों के पास छोटे ट्रैक्टर हैं। ये किसान न तो बड़ी पराली प्रबंधन मशीनें खरीद सकते हैं और न ही चला सकते हैं। वह इसे केवल किराये पर दे सकते हैं जबकि सरकार केवल मशीनरी की लागत पर मदद देती है। छोटे किसान इतना खर्च नहीं उठा सकते। इसके अलावा सहकारी समितियों द्वारा मशीनरी को खरीदने के लिए सरकार के पास पैसा जमा करने के बावजूद भी उन्हें मशीनरी उपलब्ध नहीं हुई।
विज्ञापन
बाढ़ के कारण किसान हो गए हैं बर्बाद
बाढ़ के कारण किसानों की फसलें भी नष्ट हो गईं और मोहाली जिले के डेराबस्सी, लालडू इलाके में कई गांवों की फसलों के साथ-साथ जमीन भी बह गई और किसान पूरी तरह से बर्बाद हो गए। नेताओं ने कहा कि सरकार कह रही थी कि मृत मुर्गियों व बकरियों तक का भी मुआवजा देगी लेकिन किसानों को मात्र पांच एकड़ का मुआवजा 6800 रुपये प्रति एकड़ की दर से मिल रहा है। कम आय वाली भूमि के मालिक जो गेहूं की फसल भी नहीं लगा सकते हैं, उन्हें अधिक मुआवजा दिया जाना चाहिए ताकि किसान अपनी आजीविका प्राप्त कर सकें और भूमि में सुधार कर सकें।
विज्ञापन
किसानों पर किए गए मामले, जुर्माना और रेड एंट्री वापस की जाएं
मांगपत्र में यह भी कहा गया है कि जब सरकार खुद अपने प्रयासों में विफल हो गई है तो किसानों को क्यों परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि किसानों पर किए गए मामले, जुर्माना और रेड एंट्री वापस की जाएं। यह सब जानते हुए भी अगर सरकार ने किसानों को परेशान करना बंद नहीं किया तो संयुक्त किसान मोर्चा, किसान यूनियन सिद्धूपुर और उत्तर भारत की 18 किसान यूनियनें सरकार के खिलाफ संघर्ष करने को मजबूर होंगी, जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
विज्ञापन
छोटे किसान पराली प्रबंधन का खर्च उठाने में सक्षम नहीं : किसान नेता
किसान नेताओं ने कहा कि पंजाब में अधिकतर छोटे किसान हैं और छोटे किसानों के पास छोटे ट्रैक्टर हैं। ये किसान न तो बड़ी पराली प्रबंधन मशीनें खरीद सकते हैं और न ही चला सकते हैं। वह इसे केवल किराये पर दे सकते हैं जबकि सरकार केवल मशीनरी की लागत पर मदद देती है। छोटे किसान इतना खर्च नहीं उठा सकते। इसके अलावा सहकारी समितियों द्वारा मशीनरी को खरीदने के लिए सरकार के पास पैसा जमा करने के बावजूद भी उन्हें मशीनरी उपलब्ध नहीं हुई।