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Mohali News: बिजली कर्मचारियों का लालडू में प्रदर्शन, पुरानी पेंशन समेत कई मांगें
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लालडू। कर्मचारी एकता मंच और जॉइंट फोरम ने पंजाब सिविल सेक्रेटेरिएट कर्मचारियों के समर्थन में लालडू डिवीज़न के सामने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बिजली कर्मचारियों ने पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल प्रबंधन की नीतियों का कड़ा विरोध किया।
विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता एटीके प्रधान मोहन सिंह राणा, टीएसयू सर्कल प्रधान राजेश राणा और एमएसयू डिवीज़न लालडू प्रधान संदीप सिंह ने की। कई संगठनों के सदस्यों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में इसमें भाग लिया। वरिष्ठ नेताओं ने रैली को संबोधित करते हुए सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों की आलोचना की। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की। इसके साथ ही बकाया और डीए का भुगतान जारी करने की भी मांग की गई। कर्मचारियों ने 17 जुलाई 2020 की अधिसूचना को रद्द करने की अपील की। पेंशनरों को 2.45 की जगह 2.59 के गुणक के साथ संशोधित पेंशन देने की मांग भी उठाई गई। कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और संगठनों के साथ हुए समझौतों को तुरंत लागू करने पर जोर दिया गया।
सरकार को चेतावनी
संगठन के नेताओं ने सरकार को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारियों की मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो संघर्ष तेज किया जाएगा। नेताओं ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक शांति भंग होने पर सरकार जिम्मेदार होगी। आम लोगों को होने वाली मुश्किलों की जिम्मेदारी भी पंजाब सरकार की होगी। उन्होंने बिना समय बर्बाद किए अधिसूचना या परिपत्र जारी करने की मांग की।
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विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता एटीके प्रधान मोहन सिंह राणा, टीएसयू सर्कल प्रधान राजेश राणा और एमएसयू डिवीज़न लालडू प्रधान संदीप सिंह ने की। कई संगठनों के सदस्यों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में इसमें भाग लिया। वरिष्ठ नेताओं ने रैली को संबोधित करते हुए सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों की आलोचना की। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की। इसके साथ ही बकाया और डीए का भुगतान जारी करने की भी मांग की गई। कर्मचारियों ने 17 जुलाई 2020 की अधिसूचना को रद्द करने की अपील की। पेंशनरों को 2.45 की जगह 2.59 के गुणक के साथ संशोधित पेंशन देने की मांग भी उठाई गई। कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और संगठनों के साथ हुए समझौतों को तुरंत लागू करने पर जोर दिया गया।
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सरकार को चेतावनी
संगठन के नेताओं ने सरकार को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारियों की मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो संघर्ष तेज किया जाएगा। नेताओं ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक शांति भंग होने पर सरकार जिम्मेदार होगी। आम लोगों को होने वाली मुश्किलों की जिम्मेदारी भी पंजाब सरकार की होगी। उन्होंने बिना समय बर्बाद किए अधिसूचना या परिपत्र जारी करने की मांग की।
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