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Mohali News: ईडी का गमाडा पर आरोप, अनबिकी जमीन का आरक्षित मूल्य घटाया, दस हजार करोड़ का हुआ नुकसान
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मोहाली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। एजेंसी के अधिकारियों ने जारी बयान में कहा है कि अनबिकी जमीन का आरक्षित मूल्य घटाया गया। इससे गमाडा और पंजाब सरकार को करीब 10 हजार करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हुआ है। ईडी ने आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन की गमाडा अधिकारियों के साथ अनौपचारिक बैठकों की भी जांच की है।
यह जांच सीबीआई की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह एफआईआर तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 238 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले से संबंधित है। ईडी ने 22 से 24 सितंबर तक दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना सहित 26 ठिकानों पर कार्रवाई की। इस दौरान गमाडा और पंजाब के हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट विभाग में तलाशी ली गई। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह नुकसान अभी संभावित है। वास्तविक नुकसान की पूरी रकम अभी स्थापित नहीं हुई है। ईडी ने रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर 57 करोड़ रुपये के लाभ की भी जांच की है।
ईडी ने दावा किया है कि मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन ने गमाडा अधिकारियों के साथ अनौपचारिक बैठकें कीं। ये बैठकें मास्टर प्लान, भूखंड की नीलामी, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मामलों पर केंद्रित थीं। एजेंसी के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण फैसले जैन के निर्देशों पर अनौपचारिक रूप से लिए गए। ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि गमाडा के अधिकारी फाइलें पुडा भवन से बाहर ले जाकर चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित एक मकान में जैन और उनके ओएसडी अमरेंद्र झा से मिलते थे। यह मकान आप नेता सनी सिंह अहलूवालिया को आवंटित था। ईडी का दावा है कि झा का पुडा भवन में भी एक कमरा था, जबकि उनका वहां कोई आधिकारिक पद नहीं था।
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अन्य अनियमितताओं की जांच
रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर वैधानिक बकाया और जुर्माने में छूट दिए जाने की जांच की जा रही है। एजेंसी के अनुसार, इससे कंपनी को करीब 57 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ हुआ। रद्द किए गए भूखंडों के कथित दोबारा आवंटन और निजी डेवलपर्स को दी गई अन्य रियायतें भी जांच के दायरे में हैं। तलाशी के दौरान, 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जारी अधिनिर्णय और मुआवजे से जुड़े दस्तावेज में कथित अनियमितताएं पाई गईं। एजेंसी ने तिला कंसल्टेंसी और गमाडा के जमीन अधिग्रहण कलेक्टर कार्यालय के बीच कथित मिलीभगत की भी जांच की है। कुछ मामलों में धारा-11 की अधिसूचना के बावजूद आवश्यक अनुमति के बिना हस्तांतरण विलेख की अनुमति देने के आरोप भी हैं।
आप ने आरोपों को बताया राजनीतिक
आप ने ईडी के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी ने सिसोदिया और सत्येंद्र जैन की गमाडा मामलों में किसी भी भूमिका से इन्कार किया। आप ने दोनों नेताओं और गमाडा अधिकारियों के बीच बैठकों की खबरों को झूठा और राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया। पार्टी ने ईडी की कार्रवाई के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए। आप ने कहा कि सीबीआई एफआईआर तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी है, गमाडा से नहीं। ईडी की ओर से लगाए गए आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं और इन पर अदालत की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
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यह जांच सीबीआई की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह एफआईआर तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 238 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले से संबंधित है। ईडी ने 22 से 24 सितंबर तक दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना सहित 26 ठिकानों पर कार्रवाई की। इस दौरान गमाडा और पंजाब के हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट विभाग में तलाशी ली गई। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह नुकसान अभी संभावित है। वास्तविक नुकसान की पूरी रकम अभी स्थापित नहीं हुई है। ईडी ने रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर 57 करोड़ रुपये के लाभ की भी जांच की है।
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ईडी ने दावा किया है कि मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन ने गमाडा अधिकारियों के साथ अनौपचारिक बैठकें कीं। ये बैठकें मास्टर प्लान, भूखंड की नीलामी, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मामलों पर केंद्रित थीं। एजेंसी के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण फैसले जैन के निर्देशों पर अनौपचारिक रूप से लिए गए। ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि गमाडा के अधिकारी फाइलें पुडा भवन से बाहर ले जाकर चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित एक मकान में जैन और उनके ओएसडी अमरेंद्र झा से मिलते थे। यह मकान आप नेता सनी सिंह अहलूवालिया को आवंटित था। ईडी का दावा है कि झा का पुडा भवन में भी एक कमरा था, जबकि उनका वहां कोई आधिकारिक पद नहीं था।
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अन्य अनियमितताओं की जांच
रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर वैधानिक बकाया और जुर्माने में छूट दिए जाने की जांच की जा रही है। एजेंसी के अनुसार, इससे कंपनी को करीब 57 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ हुआ। रद्द किए गए भूखंडों के कथित दोबारा आवंटन और निजी डेवलपर्स को दी गई अन्य रियायतें भी जांच के दायरे में हैं। तलाशी के दौरान, 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जारी अधिनिर्णय और मुआवजे से जुड़े दस्तावेज में कथित अनियमितताएं पाई गईं। एजेंसी ने तिला कंसल्टेंसी और गमाडा के जमीन अधिग्रहण कलेक्टर कार्यालय के बीच कथित मिलीभगत की भी जांच की है। कुछ मामलों में धारा-11 की अधिसूचना के बावजूद आवश्यक अनुमति के बिना हस्तांतरण विलेख की अनुमति देने के आरोप भी हैं।
आप ने आरोपों को बताया राजनीतिक
आप ने ईडी के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी ने सिसोदिया और सत्येंद्र जैन की गमाडा मामलों में किसी भी भूमिका से इन्कार किया। आप ने दोनों नेताओं और गमाडा अधिकारियों के बीच बैठकों की खबरों को झूठा और राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया। पार्टी ने ईडी की कार्रवाई के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए। आप ने कहा कि सीबीआई एफआईआर तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी है, गमाडा से नहीं। ईडी की ओर से लगाए गए आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं और इन पर अदालत की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।