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घरेलू कलह से तंग डीएसपी ने की खुदकुशी
अमर उजाला, मोहाली(खरड़)
Updated Fri, 20 Sep 2013 02:08 AM IST
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घरेलू कलह से तंग पंजाब पुलिस के एक डीएसपी ने बुधवार को खुदकुशी कर ली। वह इन दिनों पंजाब पुलिस के सुरक्ष मुख्यालय सेक्टर-9 में तैनात थे।
खरड़ सिसटी पुलिस ने मृतक की कार से एक फाइल बरामद की है। फाइल में 20 पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ है। सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी खुदकुशी की वजह पत्नी से बिगड़े संबंधों से उत्पन्न तनाव को बताया है।
पुलिस को मृतक के मोबाइल में सुसाइड रिकार्डिंग भी मिली है। इसमें उसने अपनी मौत के लिए खुद को जिम्मेदार बताया है। यह सुसाइड नोट प्रेस, पुलिस एवं हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम संबोधित है।
इसे 18 सितंबर सुबह सवा एक बजे लिखा गया है। मृतक डीएसपी ने अपने पीछे तीन बच्चे छोड़े हैं। वह इन दिनों खरड़ की गुरु तेग बहादुर नगर कालोनी में स्थित कुंदन रत्न कुटिया में रह रहा थे।
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वहीं पर अपने आपको सेवादार बताया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 45 वर्षीय डीएसपी मनमिंदर सिंह ने 17/18 सिंतबर की रात 1.15 बजे जहर निगल लिया।
इसके बाद उन्होंने अपने एक परिचित को फोन किया। लेकिन फोन नहीं मिला। 18 सितंबर की सुबह 9 बजे के करीब उनका परिचित उनके घर पर आया, तो पता चला कि डीएसपी ने जहर निगल लिया है।
उसने प्राथमिक उपचार की कोशिश की। सफल न होने पर डीएसपी के कहने पर उन्हें मोरिंडा स्थित एक निजी अस्पताल में ले गया। उन्होंने उपचार के दौरान बुधवार रात 9 बजे दम तोड़ दिया। इस दौरान डीएसपी ने एक फाइल कार में रखवा ली थी। बाद में पुलिस को उनकी कार में रखी फाइल से सुसाइड नोट मिला।
क्या लिखा है सुसाइ़ड नोट में
चीफ जस्टिस, हाइकोर्ट के नाम लिखे सुसाइड नोट में डीएसपी ने अपने घरेलू कलह का जिक्र किया है। उन्होंने नोट में पहले तो अदालत से माफी मांगी है।
बाद में लिखा है कि उसने 1995 में गांव बेलगाम, कर्नाटक निवासी हरजिंदर कौर से प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद पत्नी अक्सर उससे झगड़ा करती थी।
उसके तीन बच्चे हैं। पुलिस में अधिकारी होने के कारण बदनामी के डर से उसने कभी किसी से कुछ नहीं कहा। वह पत्नी से झगड़े चुपचाप झेलता रहा।
वर्ष 2004 में उसने जालंधर में एक प्लॉट लिया। रुपयों का इंतजाम कम होने के कारण जमीन की रजिस्ट्री दो बार में कराई। पहली रजिस्ट्री 205 वर्ग गज प्लॉट की 19 मई 2004 में उसने अपनी मां शीतल कौर के नाम पर कराई।
उस समय उसे पता नहीं चला कि पत्नी हरजिंदर कौर ने 5 मई को ही उसकी मां के नाम पर स्टॉप पेपर खरीदकर जाली पॉवर ऑफ अटोर्नी तैयार करा ली।
यह उसने रजिस्ट्री के समय ही अपने नाम पर करा ली थी। दूसरी रजिस्ट्री 11 नंवबर 2004 को हुई। इस समय उसने बैंक से लोन भी लिया। वर्ष 2005-06 में उसने मकान बनाना शुरू किया।
मकान तैयार होने पर वह यहां आकर रहने लगे। सुसाइड नोट में आगे लिखा है कि इस दौरान पति-पत्नी का तालमेल बिगड़ता गया। पत्नी कई बार बच्चोंको लेकर घर से भी भागी।
वह जिद करने लगी कि मकान की रजिस्ट्री उसके नाम पर कराई जाए। इस दौरान पत्नी ने जाली पॉवर ऑफ अटोर्नी के द्वारा मकान अपनी मां अजमेर कौर के नाम करा दिया।
तनाव बढ़ता गया और 2008 में वह दो बार घर से भागी। एक बार वह चंडीगढ़ में पीजी में रही, तो दूसरी बार उसे बेलगाम से डीएसपी मनाकर लाए।
इसके बाद वर्ष 2008 में पत्नी ने उस पर अवैध संबधों के आरोप लगाने शुरू कर दिए। सितंबर 2010 में वह दोबारा भाग गई एवं दो महीनों तक उसका कुछ पता नहीं चला।
जब उसके बारे में सूचना मिली, तो वह उसे मनाने गया। इस दौरान उसने झगड़ा किया।
सितंबर में ही उसे हाईकोर्ट का नोटिस मिला।
इससे उसे पता चला कि पत्नी के उसके विरुद्ध दहेज प्रताड़ना संबंधी मामला दर्ज करने के लिए याचिका दायर की है। फिर भी वह पत्नी को समझाता रहा।
वह नहीं मानी और 15 अक्तूबर 2011 को उसके विरुद्ध मारपीट एवं हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करा दिया। वह इस मामले में 4 नवंबर 2011 से 16 नवंबर 2011 तक कपूरथला जेल में बंद रहा।
उच्च न्यायालय से जमानत मिलने पर वह बाहर आया।
घरेलू कलह के चलते उसके बच्चों के स्कूल छूट गए। उसका बेटा 7वीं में फेल हो गया। वह जेल से बाहर आया तो उसने अपने बच्चों के दाखिलों एवं बिजली के बिल आदि पर 54 हजार रुपये खर्च किए।
इसके बाद वह पत्नी को पांच हजार रुपये सप्ताह खर्च देने लगा। पत्नी ने कहा कि वह जज की परीक्षा के लिए कोचिंग लेने वाली है। उसे दस हजार रुपये सप्ताह खर्च दिया जाए।
वह इस पर भी राजी हो गया। इस तरह वह अपना वैवाहिक जीवन से टूट चुका था। इन सब के चलते उसने सुसाइड करने का निर्णय लिया।
उन्होंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर अपने लिए न्याय मांगा कि उसने नहीं, बल्कि उसकी पत्नी ने उसे तंग कर रखा था।
शव पिता को ही सौंपा जाए
डीएसपी तेजिंदर सिंह, थाना प्रभारी सिटी विजय कुमार पुलिस टीम सहित मृतक के घर में पहुंचे। उन्होंने कई घंटे तक जांच की।
प्राथमिक जांच में पुलिस को मृतक के घर से एक डायरी भी मिली। पुलिस को कार से मिले सुसाइड नोट के पहले पन्ने पर लिखा था कि एसएचओ एवं प्रेस को पहले बुलाकर कमरा खोलें।
उसने यह भी लिखा कि उसने सुसाइड का बयान मोबाइल में भी रिकार्ड कर रखा है। उसने अपनी कार के बारे में लिखा है यह कार उसके पिता अवतार सिंह को दे दी जाए।
उसने यह भी लिखा कि वह खरड़ में जिस कोठी में रहता है, वह कोठी बाबा मंजीत सिंह नानकसर ठाठ, चमकौर साहिब वालों के नाम पर है एवं इस कोठी में रखा सारा सामान उन्हीं का है।
अगर कोई सामान डीएसपी का हुआ भी तो वह भी बाबा जी को दान कर रहे हैं। इस पर पत्नी का हक नहीं होगा। उसने सुसाइड नोट में अपने पिता, भाई, जीजा एवं मोरिंडा निवासी जगजीत सिंह के नाम और फोन नंबर भी लिखे थे।
पुलिस को घर से मिली डायरी में लिखा कि 11 सितंबर 2013 को उसकी पत्नी उसके खरड़ स्थित घर पर आई एवं उससे झगड़ा किया तथा गाली गलौज करके गई। 12 सितंबर को उसने सुसाइड की योजना बनाई। 13 सितंबर को तैयारी की। 14 सितंबर को जहर खरीदा एवं 18 सितंबर को जहर निगला। यह भी लिखा है कि उसका शव पिता को ही सौंपा जाए।
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खरड़ सिसटी पुलिस ने मृतक की कार से एक फाइल बरामद की है। फाइल में 20 पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ है। सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी खुदकुशी की वजह पत्नी से बिगड़े संबंधों से उत्पन्न तनाव को बताया है।
पुलिस को मृतक के मोबाइल में सुसाइड रिकार्डिंग भी मिली है। इसमें उसने अपनी मौत के लिए खुद को जिम्मेदार बताया है। यह सुसाइड नोट प्रेस, पुलिस एवं हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम संबोधित है।
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इसे 18 सितंबर सुबह सवा एक बजे लिखा गया है। मृतक डीएसपी ने अपने पीछे तीन बच्चे छोड़े हैं। वह इन दिनों खरड़ की गुरु तेग बहादुर नगर कालोनी में स्थित कुंदन रत्न कुटिया में रह रहा थे।
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वहीं पर अपने आपको सेवादार बताया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 45 वर्षीय डीएसपी मनमिंदर सिंह ने 17/18 सिंतबर की रात 1.15 बजे जहर निगल लिया।
इसके बाद उन्होंने अपने एक परिचित को फोन किया। लेकिन फोन नहीं मिला। 18 सितंबर की सुबह 9 बजे के करीब उनका परिचित उनके घर पर आया, तो पता चला कि डीएसपी ने जहर निगल लिया है।
उसने प्राथमिक उपचार की कोशिश की। सफल न होने पर डीएसपी के कहने पर उन्हें मोरिंडा स्थित एक निजी अस्पताल में ले गया। उन्होंने उपचार के दौरान बुधवार रात 9 बजे दम तोड़ दिया। इस दौरान डीएसपी ने एक फाइल कार में रखवा ली थी। बाद में पुलिस को उनकी कार में रखी फाइल से सुसाइड नोट मिला।
क्या लिखा है सुसाइ़ड नोट में
चीफ जस्टिस, हाइकोर्ट के नाम लिखे सुसाइड नोट में डीएसपी ने अपने घरेलू कलह का जिक्र किया है। उन्होंने नोट में पहले तो अदालत से माफी मांगी है।
बाद में लिखा है कि उसने 1995 में गांव बेलगाम, कर्नाटक निवासी हरजिंदर कौर से प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद पत्नी अक्सर उससे झगड़ा करती थी।
उसके तीन बच्चे हैं। पुलिस में अधिकारी होने के कारण बदनामी के डर से उसने कभी किसी से कुछ नहीं कहा। वह पत्नी से झगड़े चुपचाप झेलता रहा।
वर्ष 2004 में उसने जालंधर में एक प्लॉट लिया। रुपयों का इंतजाम कम होने के कारण जमीन की रजिस्ट्री दो बार में कराई। पहली रजिस्ट्री 205 वर्ग गज प्लॉट की 19 मई 2004 में उसने अपनी मां शीतल कौर के नाम पर कराई।
उस समय उसे पता नहीं चला कि पत्नी हरजिंदर कौर ने 5 मई को ही उसकी मां के नाम पर स्टॉप पेपर खरीदकर जाली पॉवर ऑफ अटोर्नी तैयार करा ली।
यह उसने रजिस्ट्री के समय ही अपने नाम पर करा ली थी। दूसरी रजिस्ट्री 11 नंवबर 2004 को हुई। इस समय उसने बैंक से लोन भी लिया। वर्ष 2005-06 में उसने मकान बनाना शुरू किया।
मकान तैयार होने पर वह यहां आकर रहने लगे। सुसाइड नोट में आगे लिखा है कि इस दौरान पति-पत्नी का तालमेल बिगड़ता गया। पत्नी कई बार बच्चोंको लेकर घर से भी भागी।
वह जिद करने लगी कि मकान की रजिस्ट्री उसके नाम पर कराई जाए। इस दौरान पत्नी ने जाली पॉवर ऑफ अटोर्नी के द्वारा मकान अपनी मां अजमेर कौर के नाम करा दिया।
तनाव बढ़ता गया और 2008 में वह दो बार घर से भागी। एक बार वह चंडीगढ़ में पीजी में रही, तो दूसरी बार उसे बेलगाम से डीएसपी मनाकर लाए।
इसके बाद वर्ष 2008 में पत्नी ने उस पर अवैध संबधों के आरोप लगाने शुरू कर दिए। सितंबर 2010 में वह दोबारा भाग गई एवं दो महीनों तक उसका कुछ पता नहीं चला।
जब उसके बारे में सूचना मिली, तो वह उसे मनाने गया। इस दौरान उसने झगड़ा किया।
सितंबर में ही उसे हाईकोर्ट का नोटिस मिला।
इससे उसे पता चला कि पत्नी के उसके विरुद्ध दहेज प्रताड़ना संबंधी मामला दर्ज करने के लिए याचिका दायर की है। फिर भी वह पत्नी को समझाता रहा।
वह नहीं मानी और 15 अक्तूबर 2011 को उसके विरुद्ध मारपीट एवं हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करा दिया। वह इस मामले में 4 नवंबर 2011 से 16 नवंबर 2011 तक कपूरथला जेल में बंद रहा।
उच्च न्यायालय से जमानत मिलने पर वह बाहर आया।
घरेलू कलह के चलते उसके बच्चों के स्कूल छूट गए। उसका बेटा 7वीं में फेल हो गया। वह जेल से बाहर आया तो उसने अपने बच्चों के दाखिलों एवं बिजली के बिल आदि पर 54 हजार रुपये खर्च किए।
इसके बाद वह पत्नी को पांच हजार रुपये सप्ताह खर्च देने लगा। पत्नी ने कहा कि वह जज की परीक्षा के लिए कोचिंग लेने वाली है। उसे दस हजार रुपये सप्ताह खर्च दिया जाए।
वह इस पर भी राजी हो गया। इस तरह वह अपना वैवाहिक जीवन से टूट चुका था। इन सब के चलते उसने सुसाइड करने का निर्णय लिया।
उन्होंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर अपने लिए न्याय मांगा कि उसने नहीं, बल्कि उसकी पत्नी ने उसे तंग कर रखा था।
शव पिता को ही सौंपा जाए
डीएसपी तेजिंदर सिंह, थाना प्रभारी सिटी विजय कुमार पुलिस टीम सहित मृतक के घर में पहुंचे। उन्होंने कई घंटे तक जांच की।
प्राथमिक जांच में पुलिस को मृतक के घर से एक डायरी भी मिली। पुलिस को कार से मिले सुसाइड नोट के पहले पन्ने पर लिखा था कि एसएचओ एवं प्रेस को पहले बुलाकर कमरा खोलें।
उसने यह भी लिखा कि उसने सुसाइड का बयान मोबाइल में भी रिकार्ड कर रखा है। उसने अपनी कार के बारे में लिखा है यह कार उसके पिता अवतार सिंह को दे दी जाए।
उसने यह भी लिखा कि वह खरड़ में जिस कोठी में रहता है, वह कोठी बाबा मंजीत सिंह नानकसर ठाठ, चमकौर साहिब वालों के नाम पर है एवं इस कोठी में रखा सारा सामान उन्हीं का है।
अगर कोई सामान डीएसपी का हुआ भी तो वह भी बाबा जी को दान कर रहे हैं। इस पर पत्नी का हक नहीं होगा। उसने सुसाइड नोट में अपने पिता, भाई, जीजा एवं मोरिंडा निवासी जगजीत सिंह के नाम और फोन नंबर भी लिखे थे।
पुलिस को घर से मिली डायरी में लिखा कि 11 सितंबर 2013 को उसकी पत्नी उसके खरड़ स्थित घर पर आई एवं उससे झगड़ा किया तथा गाली गलौज करके गई। 12 सितंबर को उसने सुसाइड की योजना बनाई। 13 सितंबर को तैयारी की। 14 सितंबर को जहर खरीदा एवं 18 सितंबर को जहर निगला। यह भी लिखा है कि उसका शव पिता को ही सौंपा जाए।