{"_id":"5dffccb88ebc3e879937bdf4","slug":"driving-a-car-under-overspeed-is-a-serious-crime-mohali-news-pkl3608095184","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अलर्टः गंभीर अपराध है ओवरस्पीड में कार चलाना, गति सीमा 60 और गाड़ियां दौड़ाते 100 से ऊपर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलर्टः गंभीर अपराध है ओवरस्पीड में कार चलाना, गति सीमा 60 और गाड़ियां दौड़ाते 100 से ऊपर
Mon, 23 Dec 2019 04:00 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर
दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Dec 2019 04:00 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीरकपुर फ्लाईओवर पर चढ़ते ही 60 किमी प्रति घंटा की स्पीड लिमिट का बोर्ड नजर आता है। इसके बावजूद दिन-रात यहां से गुजरने वाले वाहन 100 किमी प्रति घंटा से अधिक रफ्तार से गुजरते हैं। आए दिन इस पर हादसे होते हैं लेकिन लोग सुधरने को तैयार नहीं। फ्लाईओवर पर चार साल में पांच बड़े हादसे चुके हैं, जिसमें छह से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
घटनास्थल को देखकर लगता है कि दिल्ली से आ रही इस टैक्सी की रफ्तार भी ज्यादा थी। कर्व पर मोड़ते समय रफ्तार अधिक होने से चालक इस पर नियंत्रण खो बैठा। पहले कार फ्लाईओवर के एक छोर की दीवार से टकराई, जब चालक ने ब्रेक लगाते हुए मोड़ा तो डिवाइडर पर लगे पोल से टकराकर पलट गई और दिल्ली निवासी दो युवक अपनी जान से हाथ धो बैठे जबकि तीसरा जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
दिल्ली की तरह जीरकपुर फ्लाईओवर पर लोहे की ग्रिल क्यों नहीं
दिल्ली सेक्टर एक के द्वारका में फ्लाईओवर पर सेफ्टी के लिए लोहे की ग्रिल लगाई गई है। ताकि सड़क हादसे के बाद वाहन फ्लाईओवर से नीचे नहीं गिरे। लेकिन जीरकपुर में 2015 में हुए इतने बड़े सड़क हादसे के बाद भी प्रशासन सबक नहीं ले पाया है, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। यहां फ्लाईओवर के दोनों छोर पर लोहे की ग्रिल बनाई जानी चाहिए। ताकि कोई वाहन फ्लाईओवर से नीचे न गिरे। इसके अलावा फ्लाईओवर के डिवाइडर पर लोहे की ग्रिल लगी होनी चाहिए। ताकि सड़क हादसे के बाद गाड़ी पलटे नहीं और बचाव हो सके।
विज्ञापन
ग्रिल तो लगवा दें, कोई बड़ा हादसा तो हो: प्रोजेक्ट मैनेजर
इस संबंध में एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर इकबाल सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर के दोनों तरफ लोहे की ग्रिल लगाई जा सकती है, लेकिन अभी कोई इतना बड़ा हादसा नहीं हुआ है कि लोहे की ग्रिल लगाने की जरूरत है। फ्लाईओवर पर डिवाइडर के बीच ग्रिल लगाना संभव नहीं है।
विज्ञापन
घटनास्थल को देखकर लगता है कि दिल्ली से आ रही इस टैक्सी की रफ्तार भी ज्यादा थी। कर्व पर मोड़ते समय रफ्तार अधिक होने से चालक इस पर नियंत्रण खो बैठा। पहले कार फ्लाईओवर के एक छोर की दीवार से टकराई, जब चालक ने ब्रेक लगाते हुए मोड़ा तो डिवाइडर पर लगे पोल से टकराकर पलट गई और दिल्ली निवासी दो युवक अपनी जान से हाथ धो बैठे जबकि तीसरा जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
विज्ञापन
दिल्ली की तरह जीरकपुर फ्लाईओवर पर लोहे की ग्रिल क्यों नहीं
दिल्ली सेक्टर एक के द्वारका में फ्लाईओवर पर सेफ्टी के लिए लोहे की ग्रिल लगाई गई है। ताकि सड़क हादसे के बाद वाहन फ्लाईओवर से नीचे नहीं गिरे। लेकिन जीरकपुर में 2015 में हुए इतने बड़े सड़क हादसे के बाद भी प्रशासन सबक नहीं ले पाया है, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। यहां फ्लाईओवर के दोनों छोर पर लोहे की ग्रिल बनाई जानी चाहिए। ताकि कोई वाहन फ्लाईओवर से नीचे न गिरे। इसके अलावा फ्लाईओवर के डिवाइडर पर लोहे की ग्रिल लगी होनी चाहिए। ताकि सड़क हादसे के बाद गाड़ी पलटे नहीं और बचाव हो सके।
विज्ञापन
ग्रिल तो लगवा दें, कोई बड़ा हादसा तो हो: प्रोजेक्ट मैनेजर
इस संबंध में एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर इकबाल सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर के दोनों तरफ लोहे की ग्रिल लगाई जा सकती है, लेकिन अभी कोई इतना बड़ा हादसा नहीं हुआ है कि लोहे की ग्रिल लगाने की जरूरत है। फ्लाईओवर पर डिवाइडर के बीच ग्रिल लगाना संभव नहीं है।
फ्लाईओवर पर हुए हादसे
फरवरी 2012 में सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई थी। सितंबर 2013 में जीरकपुर फ्लाईओवर पर कार पलट गई थी। इसके चलते कार चालक जख्मी हो गया था। 6 फरवरी 2015 को जीरकपुर फ्लाईओवर पर पजेरो और आई-20 कार की टक्कर में चार लोगों की मौत हुई थी। मई 2017 में आपस में नौ गाड़ियां एक के बाद एक आपस में भिड़ गई थीं।
जून 2017 में तेज रफ्तार के चलते कार चार बार पलटी। इस कारण कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि लड़की की जान बच गई। अक्तूबर 2018 को कालका फ्लाईओवर पर सड़क हादसे में दो लोग जख्मी हुए थे। नवंबर 2018 में जीरकपुर-शिमला हाईवे पर बलटाना लाइट प्वाइंट के पास सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी।
39 ब्लैक स्पॉट में से 22 जीरकपुर में
डेराबस्सी सब-डिविजन के जीरकपुर क्षेत्र में जिले के सर्वाधिक 39 ब्लैक स्पॉट्स हैं। इनमें से 22 तो जीरकपुर शहर में ही हैं। यहां हो रही दुर्घटनाओं का कारण गलत इंजीनियरिंग, ब्लैक स्पॉट्स वाली जगह पर साइन बोर्ड और स्पीड ब्रेकर का न होना, लाइटिंग की कमी आदि हैं। यातायात पुलिस के मुताबिक ब्लैक स्पॉट समय के साथ बदल जाते हैं। यदि किसी स्थान पर पिछले तीन साल में पांच या इससे अधिक मौतें हुई हैं तो उसे ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया जाता है।
हादसे रोकने का मुद्दा रोड सेफ्टी की बैठक तक सिमटा
सड़क हादसों के कारणों को दूर करने का मुद्दा रोड सेफ्टी की हर बैठक में उठता है। उच्च अधिकारी कारणों को दूर करने के निर्देश देते हैं लेकिन इनका पालन नहीं होता। एक-दूसरे विभाग को पत्र लिखकर चुप हो जाते हैं। हाईवे पर पैदल पार पथ नहीं है। जीरकपुर के मेट्रो मॉल के नजदीक अक्सर लोग जान जोखिम में डालकर तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच सड़क पार करते हैं। कई जगह से सांकेतिक बोर्ड व रेलिंग गायब है।
जून 2017 में तेज रफ्तार के चलते कार चार बार पलटी। इस कारण कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि लड़की की जान बच गई। अक्तूबर 2018 को कालका फ्लाईओवर पर सड़क हादसे में दो लोग जख्मी हुए थे। नवंबर 2018 में जीरकपुर-शिमला हाईवे पर बलटाना लाइट प्वाइंट के पास सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी।
39 ब्लैक स्पॉट में से 22 जीरकपुर में
डेराबस्सी सब-डिविजन के जीरकपुर क्षेत्र में जिले के सर्वाधिक 39 ब्लैक स्पॉट्स हैं। इनमें से 22 तो जीरकपुर शहर में ही हैं। यहां हो रही दुर्घटनाओं का कारण गलत इंजीनियरिंग, ब्लैक स्पॉट्स वाली जगह पर साइन बोर्ड और स्पीड ब्रेकर का न होना, लाइटिंग की कमी आदि हैं। यातायात पुलिस के मुताबिक ब्लैक स्पॉट समय के साथ बदल जाते हैं। यदि किसी स्थान पर पिछले तीन साल में पांच या इससे अधिक मौतें हुई हैं तो उसे ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया जाता है।
हादसे रोकने का मुद्दा रोड सेफ्टी की बैठक तक सिमटा
सड़क हादसों के कारणों को दूर करने का मुद्दा रोड सेफ्टी की हर बैठक में उठता है। उच्च अधिकारी कारणों को दूर करने के निर्देश देते हैं लेकिन इनका पालन नहीं होता। एक-दूसरे विभाग को पत्र लिखकर चुप हो जाते हैं। हाईवे पर पैदल पार पथ नहीं है। जीरकपुर के मेट्रो मॉल के नजदीक अक्सर लोग जान जोखिम में डालकर तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच सड़क पार करते हैं। कई जगह से सांकेतिक बोर्ड व रेलिंग गायब है।
इन जगहों पर सड़क हादसों की संभावना बढ़ी
- 6 किलोमीटर लंबे पीआर 7 एयरपोर्ट रोड पर।
- जीरकपुर-चंडीगढ़ बैरियर पर।
- टीएम पेट्रोल पंप के सामने।
- मेट्रो मॉल के नजदीक।
- सिंघपुरा चौक पर।
- मैकडोनल्ड चौक पर।
- भंखरपुर गांव के पास पड़ते फ्लाईओवर पर।
- पटियाला रोड के छत लाइट्स पर।
- नाभा सीएनजी पंप के पास।
- पटियाला चौक पर।
- जीरकपुर-चंडीगढ़ बैरियर पर।
- टीएम पेट्रोल पंप के सामने।
- मेट्रो मॉल के नजदीक।
- सिंघपुरा चौक पर।
- मैकडोनल्ड चौक पर।
- भंखरपुर गांव के पास पड़ते फ्लाईओवर पर।
- पटियाला रोड के छत लाइट्स पर।
- नाभा सीएनजी पंप के पास।
- पटियाला चौक पर।