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अपनी दस फीसदी कमाई सामाजिक कार्यों पर खर्चती हैं डॉ. रीचा सेतिया
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मोहाली। समाज के लिए अगर कुछ करने की चाहत हो तो कहीं जाने की जरूरत नहीं है। बल्कि, आप अपने आसपास ही जाकर समाज सेवा कर सकते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है चैरिटेबल ट्रस्ट में बतौर फिजिशियन डॉ. रीचा सेतिया ने, जो खुद परिवार के साथ मिलकर लंबे समय से अपनी कमाई का 10 फीसदी हिस्सा सामाजिक कार्यों पर खर्च करती हैं। इस पैसे से जरूरतमंद लोगों का इलाज, दवाई, गरीब परिवार के लोगों को पेट भरती हैं। जब कोई त्योहार आने वाला होता है तो डॉ. रीचा सेतिया परिवार के साथ झुग्गी-झोंपड़ियों में पहुंच जाती हैं और खाने पीने के सामान के साथ कपड़े बांटकर खुशी साझा करती हैं।
पति की मौत पर कम नहीं हुआ हौसला
डॉ. रीचा सेतिया ने बताया कि सामाजिक कार्यों में आगे होकर भूमिका निभाना परिवार का रिवाज है। इसको सबसे पहले पति के दादा ने शुरू किया था। यह सेवा उन्होंने अपनी कमाई का 10 फीसदी निकला जरूरतमंद परिवार में अनाज और चावल बांटकर शुरू किया। उनके बाद पति के पिता यानी मेरे ससुर ने इस जिम्मेदारी को निभाया। लेकिन, 2016 में अचानक हुई पति की मौत से सब कुछ रुक गया और उनको सदमा लगा। लेकिन, पति की मौत के बाद परिवार के इस रिवाज को जारी रखने का बीड़ा खुद उठाया। डॉ. रीचा खुद की कमाई में से 10 फीसदी झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों को खाना बांटने में करती हैं। साथ एक डॉक्टर होते हुए चैरिटेबल संस्था में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का मुफ्त इलाज करती हैं।
महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनीं डॉ. रीचा सेतिया
डॉ. रीचा सेतिया जो जिम्मेदारी खुद उठा रहीं हैं इसी को निभाने के लिए अन्य महिलाओं को जागरूक करने का काम कर रही हैं। वह इनरव्हील नामक समाजसेवी संस्था के साथ जुड़कर इसकी महिला सदस्यों को सामाजिक कार्यों के लिए आगे बढ़कर काम करने के लिए जागरूक कर रही हैं। क्लब की महिलाएं पहले किटी पार्टियों में पैसा खर्च करती थीं। जो डॉ. रीचा सेतिया से प्रेरित होकर लोक भलाई के काम कर रही हैं। इनमें संस्था की सदस्य निहारिका अनाथ बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान कर रही हैं और सिमरन बेदी कड़ाके की ठंड में रात के समय परिवार के साथ सड़कों पर सो रहे प्रवासियों को मुफ्त कंबल बांटकर समाज सेवा का काम कर रही हैं। इनका कहना है कि डॉ. रीचा सेतिया से प्रभावित होकर वह सामाजिक कार्य करने लगी हैं।
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पति की मौत पर कम नहीं हुआ हौसला
डॉ. रीचा सेतिया ने बताया कि सामाजिक कार्यों में आगे होकर भूमिका निभाना परिवार का रिवाज है। इसको सबसे पहले पति के दादा ने शुरू किया था। यह सेवा उन्होंने अपनी कमाई का 10 फीसदी निकला जरूरतमंद परिवार में अनाज और चावल बांटकर शुरू किया। उनके बाद पति के पिता यानी मेरे ससुर ने इस जिम्मेदारी को निभाया। लेकिन, 2016 में अचानक हुई पति की मौत से सब कुछ रुक गया और उनको सदमा लगा। लेकिन, पति की मौत के बाद परिवार के इस रिवाज को जारी रखने का बीड़ा खुद उठाया। डॉ. रीचा खुद की कमाई में से 10 फीसदी झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों को खाना बांटने में करती हैं। साथ एक डॉक्टर होते हुए चैरिटेबल संस्था में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का मुफ्त इलाज करती हैं।
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महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनीं डॉ. रीचा सेतिया
डॉ. रीचा सेतिया जो जिम्मेदारी खुद उठा रहीं हैं इसी को निभाने के लिए अन्य महिलाओं को जागरूक करने का काम कर रही हैं। वह इनरव्हील नामक समाजसेवी संस्था के साथ जुड़कर इसकी महिला सदस्यों को सामाजिक कार्यों के लिए आगे बढ़कर काम करने के लिए जागरूक कर रही हैं। क्लब की महिलाएं पहले किटी पार्टियों में पैसा खर्च करती थीं। जो डॉ. रीचा सेतिया से प्रेरित होकर लोक भलाई के काम कर रही हैं। इनमें संस्था की सदस्य निहारिका अनाथ बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान कर रही हैं और सिमरन बेदी कड़ाके की ठंड में रात के समय परिवार के साथ सड़कों पर सो रहे प्रवासियों को मुफ्त कंबल बांटकर समाज सेवा का काम कर रही हैं। इनका कहना है कि डॉ. रीचा सेतिया से प्रभावित होकर वह सामाजिक कार्य करने लगी हैं।
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