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Mohali News: जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला, बिल्डर को देने होंगे 13.14 लाख रुपये
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मोहाली। एक महत्वपूर्ण फैसले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बरनाला बिल्डर्स को शिकायतकर्ता प्रदीप कौर को एक महीने के भीतर 13 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि बिल्डर ने सेवाओं में भारी कटौती की, गलत व्यावसायिक व्यवहार अपनाया और गलत जानकारी देकर उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाया। शिकायत के अनुसार प्रदीप कौर ने माया गार्डन मैग्नेशिया प्रोजेक्ट में दूसरी मंजिल पर एक व्यावसायिक दुकान संख्या 202 (55) बुक की थी। इस इकाई का सुपर एरिया 562 वर्ग फुट और कारपेट एरिया 422.156 वर्ग फुट था, जिसकी कुल कीमत 32,24,794 रुपये थी। शिकायतकर्ता ने अब तक संपत्ति के लिए चेक के माध्यम से 29,11,953 रुपये का भुगतान किया है। समझौते के अनुसार बिल्डर को सितंबर 2022 तक कब्जा सौंपना था।
बिल्डर ने 15 अप्रैल, 2021 को कब्जा पत्र जारी किया, जिसमें केवल 291.470 वर्ग फुट का कारपेट एरिया दिया गया, जो निर्धारित क्षेत्रफल से 130.686 वर्ग फुट कम था। इस कमी के कारण शिकायतकर्ता को 9,98,248.30 रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। इसके अलावा बिल्डर ने गलत तरीके से 5,28,246 रुपये का अतिरिक्त बकाया मांगा, जबकि वास्तविक बकाया 3,12,841 रुपये था। यह भी पाया गया कि परियोजना के पास न तो पूर्णता प्रमाण पत्र था और न ही अधिभोग प्रमाण पत्र, जिसके कारण कब्जा अवैध माना गया।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डर को क्षेत्रीय कमी के लिए 9,98,248.30 रुपये (जिसमें से 3,12,841 रुपये समायोजित किए जाएंगे) और विश्वसनीय रिटर्न के लिए 5,28,246 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के लिए 1,00,000 रुपये का मुआवजा भी देना होगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह राशि निर्धारित समय के भीतर नहीं चुकाई जाती है, तो इस पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी लगाया जाएगा।
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बिल्डर ने 15 अप्रैल, 2021 को कब्जा पत्र जारी किया, जिसमें केवल 291.470 वर्ग फुट का कारपेट एरिया दिया गया, जो निर्धारित क्षेत्रफल से 130.686 वर्ग फुट कम था। इस कमी के कारण शिकायतकर्ता को 9,98,248.30 रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। इसके अलावा बिल्डर ने गलत तरीके से 5,28,246 रुपये का अतिरिक्त बकाया मांगा, जबकि वास्तविक बकाया 3,12,841 रुपये था। यह भी पाया गया कि परियोजना के पास न तो पूर्णता प्रमाण पत्र था और न ही अधिभोग प्रमाण पत्र, जिसके कारण कब्जा अवैध माना गया।
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आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डर को क्षेत्रीय कमी के लिए 9,98,248.30 रुपये (जिसमें से 3,12,841 रुपये समायोजित किए जाएंगे) और विश्वसनीय रिटर्न के लिए 5,28,246 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के लिए 1,00,000 रुपये का मुआवजा भी देना होगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह राशि निर्धारित समय के भीतर नहीं चुकाई जाती है, तो इस पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी लगाया जाएगा।
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