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सरकारी जमीन पर प्लॉट काटकर बेचे, पुलिस ने दर्ज किया केस
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खरड। सिटी पुलिस ने एक बिल्डर के खिलाफ लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। बिल्डर ने अपनी जमीन के साथ लगती एसवाईएल की जमीन को भी अपना बताकर लोगों को प्लॉट बेच दिए। जब लोगों को अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी का पता चला तो उन्होंने इसकी शिकायत एसएसपी मोहाली को दी। एसएसपी की जांच के बाद खरड़ सिटी पुलिस ने आरोपी बिल्डर अमित गोयल के खिलाफ धारा 420, 408, 465, 468, 471 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी बिल्डर अभी फरार है।
जानकारी के मुताबिक लांडरां रोड के नजदीक स्वराज एनक्लेव सोसायटी 2010 में विकसित होनी शुरू हुई थी। बिल्डर अमित गोयल की ओर से इस जमीन पर लगभग 200 प्लॉट काटकर बेचे गए थे। इन पर बाकायदा नंबर भी लगाए गए थे। बिल्डर की अपनी जमीन के साथ कुछ जमीन एसवाईएल की भी थी, जो किसानों से अधिग्रहण की गई थी। बिल्डर ने धोखे से अपने अप्रूवड प्लान में इस जमीन को भी अपना बताकर लोगों को इसमें से प्लॉट काटकर बेच दिए। एक शिकायतकर्ता मदन लाल गर्ग ने बताया कि उन्होंने 2011 में प्लॉट नंबर 297 अपनी पारिवारिक सदस्य चांदनी गर्ग के नाम पर लिया था। उस समय इस प्लॉट को अप्रूवड प्लान का हिस्सा बताकर बिल्डर ने इसकी रजिस्ट्री करवा दी। लगभग दो साल पहले मदन लाल ने इस प्लॉट के सामने मनप्रीत सिंह निवासी संतेमाजरा ने कंटीली तार लगाकर इसी दीवार कर दी गई। मदन लाल गर्ग को जब पता चला तो उन्होंने आसपड़ोस में पता किया तो खुलासा हुआ कि यह जमीन एसवाईएल प्रोजेक्ट के तहत उन किसानों से अधिग्रहण की हुई थी, जिसे पंजाब सरकार की ओर से वापस कर दिया गया है। इसी आधार पर किसान अपनी इस जमीन पर कब्जा ले रहे हैं। एसवाईएल की इस जमीन में बिल्डर की ओर से अप्रूवड प्लान के प्लाट नंबर 297, 298, 300 और 302 भी आ गए।
इसके बाद प्रभावित लोगों ने अपने साथ हुई इस ठगी की शिकायत राजस्व विभाग में देकर जांच की मांग की। जांच में पता चला कि बिल्डर ने अपनी जमीन के साथ की सरकारी जमीन भी लोगों को बेच दी है। इस पर पीड़ित लोग बिल्डर को मिले तो उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। छह हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से खरीदे गए इन प्लॉटों की कीमत अब 18 हजार रुपये प्रति गज हो चुकी है। प्रभावित लोगों ने बिल्डर से इन प्लॉटों के बदले में दूसरी जगह प्लॉट मांगे, लेकिन बिल्डर ने अनसुना कर दिया।
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एसएसपी की जांच के बाद 27 मार्च को आरोपी बिल्डर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। लेकिन खरड़ सिटी पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। जांच अधिकारी नरिंदर सिंह ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस कई बार आरोपी के घर और दफ्तर में दबिश दे रही है। उसके पुराने पते पर छापा मारने के दौरान पता चला कि आरोपी अब वहां नहीं रहता है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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जानकारी के मुताबिक लांडरां रोड के नजदीक स्वराज एनक्लेव सोसायटी 2010 में विकसित होनी शुरू हुई थी। बिल्डर अमित गोयल की ओर से इस जमीन पर लगभग 200 प्लॉट काटकर बेचे गए थे। इन पर बाकायदा नंबर भी लगाए गए थे। बिल्डर की अपनी जमीन के साथ कुछ जमीन एसवाईएल की भी थी, जो किसानों से अधिग्रहण की गई थी। बिल्डर ने धोखे से अपने अप्रूवड प्लान में इस जमीन को भी अपना बताकर लोगों को इसमें से प्लॉट काटकर बेच दिए। एक शिकायतकर्ता मदन लाल गर्ग ने बताया कि उन्होंने 2011 में प्लॉट नंबर 297 अपनी पारिवारिक सदस्य चांदनी गर्ग के नाम पर लिया था। उस समय इस प्लॉट को अप्रूवड प्लान का हिस्सा बताकर बिल्डर ने इसकी रजिस्ट्री करवा दी। लगभग दो साल पहले मदन लाल ने इस प्लॉट के सामने मनप्रीत सिंह निवासी संतेमाजरा ने कंटीली तार लगाकर इसी दीवार कर दी गई। मदन लाल गर्ग को जब पता चला तो उन्होंने आसपड़ोस में पता किया तो खुलासा हुआ कि यह जमीन एसवाईएल प्रोजेक्ट के तहत उन किसानों से अधिग्रहण की हुई थी, जिसे पंजाब सरकार की ओर से वापस कर दिया गया है। इसी आधार पर किसान अपनी इस जमीन पर कब्जा ले रहे हैं। एसवाईएल की इस जमीन में बिल्डर की ओर से अप्रूवड प्लान के प्लाट नंबर 297, 298, 300 और 302 भी आ गए।
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इसके बाद प्रभावित लोगों ने अपने साथ हुई इस ठगी की शिकायत राजस्व विभाग में देकर जांच की मांग की। जांच में पता चला कि बिल्डर ने अपनी जमीन के साथ की सरकारी जमीन भी लोगों को बेच दी है। इस पर पीड़ित लोग बिल्डर को मिले तो उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। छह हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से खरीदे गए इन प्लॉटों की कीमत अब 18 हजार रुपये प्रति गज हो चुकी है। प्रभावित लोगों ने बिल्डर से इन प्लॉटों के बदले में दूसरी जगह प्लॉट मांगे, लेकिन बिल्डर ने अनसुना कर दिया।
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एसएसपी की जांच के बाद 27 मार्च को आरोपी बिल्डर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। लेकिन खरड़ सिटी पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। जांच अधिकारी नरिंदर सिंह ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस कई बार आरोपी के घर और दफ्तर में दबिश दे रही है। उसके पुराने पते पर छापा मारने के दौरान पता चला कि आरोपी अब वहां नहीं रहता है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।