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फैसला: HDFC की बीमा कंपनी को देना होगा मुआवजा
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Sun, 03 Apr 2016 01:19 AM IST
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न्यायालय
- फोटो : file photo
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स्थायी लोक अदालत ने एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है। अदालत ने कंपनी को सेवाओं में कोताही का दोषी करार दिया है। साथ ही कंपनी को 22,500 रुपये देने के आदेश दिए हैं। कंपनी को दस हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में कंपनी को चुकाने होंगे।
वहीं, सारी रकम का भुगतान तीस दिन में करना होगा। तय समय में भुगतान न करने पर कंपनी को पूरी रकम पर ब्याज भी देना होगा। यह फैसला जज जगरूप सिंह महल की अदालत ने सुनाया है। अदालत में इस संबंधी केस जिला रूपनगर, तहसील आनंदपुर साहिब के गांव निक्कुवाल निवासी गगनदीप सिंह ने दायर किया था।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने गुरु कृपा ऑटो मोबाइल से ट्रैक्टर खरीदा था। इसका बीमा एचडीएफसी एर्गो से करवाया था। कंपनी की तरफ से वायदा किया गया था अगर भविष्य में हादसा या कोई अन्य घटना होती है तो गुरु कृपा आटोमोबाइल की तरफ से बिना किसी भुगतान के ट्रैक्टर की मरम्मत की जाएगी। उन्हें कोई खर्च नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इसी बीच ट्रैक्टर का एक्सिडेंट हो गया।
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हादसे में वह खुद भी गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद गुरुकृपा ऑटो मोबाइल कंपनी की तरफ से ट्रैक्टर की मरम्मत की गई। इसका बिल 92234 रुपये का बना था। इंश्योरेंस कंपनी ने उन्हें बिल भेज दिया। कंपनी ने सिर्फ 34592 का भुगतान किया। इसके बाद उन्होंने कंपनी के खिलाफ अदालत में केस दायर किया।
कंपनी ने अदालत में दिया यह तर्क
अदालत की ओर से एर्गो को नोटिस जारी किया गया। कंपनी ने अदालत में कबूला की ट्रैक्टर की उनकी कंपनी से इंश्योरेंस हुई थी। वहीं, हादसे संबंधी भी उन्हें सूचना मिली थी। कंपनी ने स्वीकार किया कि 34592 रुपये का भुगतान किया। बाकी सर्वेयर ने पेमेंट से इनकार कर दिया था। इसलिए भुगतान करने से मना कर दिया।
अदालत ने ऐसे ठुकराया कंपनी का तर्क
अदालत ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनी ने जो ट्रैक्टर के पार्ट बदले थे। उसका मुआवजा नहीं दिया गया। वहीं, अदालत ने माना कि जिस सर्वेयर ने सर्वे किया था, उसने बदले गए सामान के मुआवजे का जिक्र नहीं किया था। वहीं, कंपनी से अदालत ने पूछा कि उक्त सामान का मुआवजा क्यों नहीं दिया गया। कंपनी ने कहा कि कॉमर्शियल वाहनों के लिए एक नियम है। उसके लिए अतिरिक्त प्रीमियम देना पड़ता है। ऐसे में कंपनी सारा भुगतान करती है। उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर प्राइवेट व्हीकल है। वहीं, उसका प्रयोग खेतीबाड़ी के लिए होता था। ऐसे में यह शर्त उक्त कंपनी पर अप्लाई नहीं होती। हालांकि अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
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वहीं, सारी रकम का भुगतान तीस दिन में करना होगा। तय समय में भुगतान न करने पर कंपनी को पूरी रकम पर ब्याज भी देना होगा। यह फैसला जज जगरूप सिंह महल की अदालत ने सुनाया है। अदालत में इस संबंधी केस जिला रूपनगर, तहसील आनंदपुर साहिब के गांव निक्कुवाल निवासी गगनदीप सिंह ने दायर किया था।
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शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने गुरु कृपा ऑटो मोबाइल से ट्रैक्टर खरीदा था। इसका बीमा एचडीएफसी एर्गो से करवाया था। कंपनी की तरफ से वायदा किया गया था अगर भविष्य में हादसा या कोई अन्य घटना होती है तो गुरु कृपा आटोमोबाइल की तरफ से बिना किसी भुगतान के ट्रैक्टर की मरम्मत की जाएगी। उन्हें कोई खर्च नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इसी बीच ट्रैक्टर का एक्सिडेंट हो गया।
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हादसे में वह खुद भी गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद गुरुकृपा ऑटो मोबाइल कंपनी की तरफ से ट्रैक्टर की मरम्मत की गई। इसका बिल 92234 रुपये का बना था। इंश्योरेंस कंपनी ने उन्हें बिल भेज दिया। कंपनी ने सिर्फ 34592 का भुगतान किया। इसके बाद उन्होंने कंपनी के खिलाफ अदालत में केस दायर किया।
कंपनी ने अदालत में दिया यह तर्क
अदालत की ओर से एर्गो को नोटिस जारी किया गया। कंपनी ने अदालत में कबूला की ट्रैक्टर की उनकी कंपनी से इंश्योरेंस हुई थी। वहीं, हादसे संबंधी भी उन्हें सूचना मिली थी। कंपनी ने स्वीकार किया कि 34592 रुपये का भुगतान किया। बाकी सर्वेयर ने पेमेंट से इनकार कर दिया था। इसलिए भुगतान करने से मना कर दिया।
अदालत ने ऐसे ठुकराया कंपनी का तर्क
अदालत ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनी ने जो ट्रैक्टर के पार्ट बदले थे। उसका मुआवजा नहीं दिया गया। वहीं, अदालत ने माना कि जिस सर्वेयर ने सर्वे किया था, उसने बदले गए सामान के मुआवजे का जिक्र नहीं किया था। वहीं, कंपनी से अदालत ने पूछा कि उक्त सामान का मुआवजा क्यों नहीं दिया गया। कंपनी ने कहा कि कॉमर्शियल वाहनों के लिए एक नियम है। उसके लिए अतिरिक्त प्रीमियम देना पड़ता है। ऐसे में कंपनी सारा भुगतान करती है। उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर प्राइवेट व्हीकल है। वहीं, उसका प्रयोग खेतीबाड़ी के लिए होता था। ऐसे में यह शर्त उक्त कंपनी पर अप्लाई नहीं होती। हालांकि अदालत ने इसे खारिज कर दिया।