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सुखना चो में गिराया जा रहा भूजल
Updated Mon, 18 Dec 2017 02:02 AM IST
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सुखना चो में गिराया जा रहा भूजल
माया गार्डन मैग्नेशिया पर भूमिगत पानी के दुरुपयोग का आरोप
डीसी मोहाली ने मामले की जांच कराने की बात कही
कहा : ऐसा अपराध करने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
जीरकपुर।
शहर के नामी कंस्ट्रशन कंपनी द्वारा भूमिगत पानी का दुरुपयोग किया जा रहा है। एक मामला माया गार्डन मैग्नेशिया द्वारा बनाए जा रहे शॉपिंग मॉल में देखने को मिला है। कंपनी द्वारा भूमिगत पानी को मोटी पाइपलाइन की मदद से सुखना चो में गिराया जा रहा है। जिक्रयोग है कि शहर के अंदर भूजल का स्तर 15 वर्ष पहले 45 फुट था, वह बढ़कर अब 500 से 600 फुट हो चुका है। अगर ऐसे ही बिल्डर द्वारा पानी का दुरुपयोग किया गया तो आने वाले दिनों में लोगों के पास पैसे तो होंगे, लेकिन पीने के लिए पानी नसीब नहीं होगा।
जानकारी के मुताबिक, अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे स्थित माया गार्डन मैग्नेशिया कंपनी द्वारा शॉपिंग मॉल का निर्माण किया जा रहा है। कंपनी द्वारा कंस्ट्रक्शन के लिए दर्जनों फुट नीचे खुदाई की गई। इस दौरान जो भूजल बाहर आया, उसे वाटर लिफ्टिंग पंप की मदद से एक टंकी में स्टोर किया गया। इसके बाद इस पानी को 20 इंच मोटी प्लास्टिक की पाइप के जरिए करीब तीन किलोमीटर दूर गांव नगला से होकर गुजरने वाले सुखना चो में गिराया जा रहा है।
दूसरी ओर, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के नियमों की मानें तो ऐसा करना कानूनी अपराध है, ऐसी सूरत में बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अनुसार, भूमिगत पानी की ऐसी स्थिति के समय बिल्डर को यह मामला सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के अधिकारियों के संज्ञान में लाना जरूरी है, जो इसके प्रयोग को लेकर आगामी निर्देश जारी करेंगे।
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भूमिगत पानी के दुरुपयोग पर सात वर्ष की सजा का प्रावधान
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति मकान बनाने के लिए हर महीने एक लाख लीटर भूमिगत जल का बिना मंजूरी इस्तेमाल कर सकता है। इससे ज्यादा लिमिट में भूमिगत पानी को निकालने के लिए स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य है। जबकि इन दोनों ही परिस्थितियों में पानी को गंदे नाले, सीवर आदि में फालतू न बहाने की शर्त होती है। यदि ऐसा करते पाए जाने पर एक लाख रुपये तक जुर्माना और सात साल तक की सजा हो सकती है।
कोट्स :::::::
भूमिगत पानी को सुखना चो में गिराकर नष्ट किया जाना सरासर कानूनी अपराध है। इस मामले की अधिकारियों से जांच कराई जाएगी और अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- गुरप्रीत कौर सपरा, डिप्टी कमिश्नर, जिला मोहाली।
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माया गार्डन मैग्नेशिया पर भूमिगत पानी के दुरुपयोग का आरोप
डीसी मोहाली ने मामले की जांच कराने की बात कही
कहा : ऐसा अपराध करने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
जीरकपुर।
शहर के नामी कंस्ट्रशन कंपनी द्वारा भूमिगत पानी का दुरुपयोग किया जा रहा है। एक मामला माया गार्डन मैग्नेशिया द्वारा बनाए जा रहे शॉपिंग मॉल में देखने को मिला है। कंपनी द्वारा भूमिगत पानी को मोटी पाइपलाइन की मदद से सुखना चो में गिराया जा रहा है। जिक्रयोग है कि शहर के अंदर भूजल का स्तर 15 वर्ष पहले 45 फुट था, वह बढ़कर अब 500 से 600 फुट हो चुका है। अगर ऐसे ही बिल्डर द्वारा पानी का दुरुपयोग किया गया तो आने वाले दिनों में लोगों के पास पैसे तो होंगे, लेकिन पीने के लिए पानी नसीब नहीं होगा।
जानकारी के मुताबिक, अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे स्थित माया गार्डन मैग्नेशिया कंपनी द्वारा शॉपिंग मॉल का निर्माण किया जा रहा है। कंपनी द्वारा कंस्ट्रक्शन के लिए दर्जनों फुट नीचे खुदाई की गई। इस दौरान जो भूजल बाहर आया, उसे वाटर लिफ्टिंग पंप की मदद से एक टंकी में स्टोर किया गया। इसके बाद इस पानी को 20 इंच मोटी प्लास्टिक की पाइप के जरिए करीब तीन किलोमीटर दूर गांव नगला से होकर गुजरने वाले सुखना चो में गिराया जा रहा है।
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दूसरी ओर, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के नियमों की मानें तो ऐसा करना कानूनी अपराध है, ऐसी सूरत में बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अनुसार, भूमिगत पानी की ऐसी स्थिति के समय बिल्डर को यह मामला सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के अधिकारियों के संज्ञान में लाना जरूरी है, जो इसके प्रयोग को लेकर आगामी निर्देश जारी करेंगे।
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भूमिगत पानी के दुरुपयोग पर सात वर्ष की सजा का प्रावधान
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति मकान बनाने के लिए हर महीने एक लाख लीटर भूमिगत जल का बिना मंजूरी इस्तेमाल कर सकता है। इससे ज्यादा लिमिट में भूमिगत पानी को निकालने के लिए स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य है। जबकि इन दोनों ही परिस्थितियों में पानी को गंदे नाले, सीवर आदि में फालतू न बहाने की शर्त होती है। यदि ऐसा करते पाए जाने पर एक लाख रुपये तक जुर्माना और सात साल तक की सजा हो सकती है।
कोट्स :::::::
भूमिगत पानी को सुखना चो में गिराकर नष्ट किया जाना सरासर कानूनी अपराध है। इस मामले की अधिकारियों से जांच कराई जाएगी और अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- गुरप्रीत कौर सपरा, डिप्टी कमिश्नर, जिला मोहाली।