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Mohali News: निगम को ''झाड़ू-पोछा'' लगाने का संस्थान बताने पर पार्षद ने जताई नाराजगी
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मोहाली। पार्षद सरबजीत सिंह समाणा ने मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने निगम को ''''झाड़ू-पोछा'''' लगाने वाला संस्थान बताया था। उधर मेयर का कहना है कि उन्होंने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है। पार्षद समाणा ने इसे निगम की गरिमा और शहरवासियों की मेहनत के खिलाफ बताया और कहा कि यह बयान निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि मोहाली जैसे विकासशील शहर में अगर मेयर स्वयं निगम की भूमिका को कमतर आंकते हैं, तो यह सोच की संकीर्णता और प्रशासनिक असफलता को दर्शाता है। पार्षद ने कहा कि नगर निगम केवल सफाई सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बुनियादी ढांचे, सड़क निर्माण, पार्कों के रखरखाव, स्ट्रीट लाइट्स, पुस्तकालयों और नए विकास कार्यों की जिम्मेदारी भी निभाता है। निगम का बजट 200 करोड़ रुपये से अधिक है, ऐसे में इस प्रकार की टिप्पणी पूरी संस्था के योगदान को नजरअंदाज करने वाली है।
समाणा ने डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी और सीनियर डिप्टी मेयर अमरीक सिंह सोमल से अपील की है कि वे भी इस विषय पर अपना स्टैंड स्पष्ट करें कि क्या वे मेयर की सोच से सहमत हैं। दूसरी तरफ मेयर जीती सिद्धू का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। बरसाती पानी की निकासी के प्रबंधों के लिए 200 करोड़ रुपये के फंड की जरूरत है, जो सरकार को मुहैया करवाना चाहिए, क्योंकि नगर निगम के पास जो बजट है, उससे केवल चार पहाड़ियों के बुनियादी ढांचे की सफाई और रखरखाव ही हो सकता है। उनका कहना है कि विपक्षी पार्षदों को भी सिर्फ विरोध करने की जगह शहर के विकास में सहयोग करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि मोहाली जैसे विकासशील शहर में अगर मेयर स्वयं निगम की भूमिका को कमतर आंकते हैं, तो यह सोच की संकीर्णता और प्रशासनिक असफलता को दर्शाता है। पार्षद ने कहा कि नगर निगम केवल सफाई सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बुनियादी ढांचे, सड़क निर्माण, पार्कों के रखरखाव, स्ट्रीट लाइट्स, पुस्तकालयों और नए विकास कार्यों की जिम्मेदारी भी निभाता है। निगम का बजट 200 करोड़ रुपये से अधिक है, ऐसे में इस प्रकार की टिप्पणी पूरी संस्था के योगदान को नजरअंदाज करने वाली है।
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समाणा ने डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी और सीनियर डिप्टी मेयर अमरीक सिंह सोमल से अपील की है कि वे भी इस विषय पर अपना स्टैंड स्पष्ट करें कि क्या वे मेयर की सोच से सहमत हैं। दूसरी तरफ मेयर जीती सिद्धू का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। बरसाती पानी की निकासी के प्रबंधों के लिए 200 करोड़ रुपये के फंड की जरूरत है, जो सरकार को मुहैया करवाना चाहिए, क्योंकि नगर निगम के पास जो बजट है, उससे केवल चार पहाड़ियों के बुनियादी ढांचे की सफाई और रखरखाव ही हो सकता है। उनका कहना है कि विपक्षी पार्षदों को भी सिर्फ विरोध करने की जगह शहर के विकास में सहयोग करना चाहिए।
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