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उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला : हादसे में जान गंवाने वाले ड्राइवर की विधवा को मिलेगी 90% पेंशन
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मोहाली। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग मोहाली ने एक विधवा के हक में बड़ा फैसला सुनाकर कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने आदेश दिया है कि हादसे में जान गंवाने वाले ड्राइवर अमरजीत सिंह की पत्नी को उनके वेतन की 90 फीसदी राशि बतौर मासिक पेंशन (आश्रित लाभ) दी जाए। साथ ही विभाग को 35,000 रुपये का मुआवजा और मृत्यु की तिथि से ब्याज भी चुकाना होगा। अमरजीत सिंह मोहाली के जेपीआई अस्पताल में ड्राइवर था। वह नियमित रूप से अपनी कम कमाई से ईएसआई का हिस्सा जमा करते थे।
8 फरवरी 2018 को ड्यूटी के बाद घर लौटते समय उनका एक्सीडेंट हो गया। उन्हें खरड़ सिविल अस्पताल से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां 19 फरवरी 2018 को उनकी मृत्यु हो गई। अमरजीत की मौत के बाद उनकी विधवा पत्नी पेंशन के लिए विभाग के चक्कर काटती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थक-हारकर उन्होंने 13 दिसंबर 2022 को उपभोक्ता आयोग में केस दर्ज कराया। आयोग के अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि विभाग की ओर से सेवा में कमी की गई है। आयोग ने आदेश दिया कि विधवा को उनके पति की मृत्यु की तारीख (19/02/2018) से 9% ब्याज के साथ सारा बकाया भुगतान किया जाए।
अगर विभाग 30 दिन के भीतर यह भुगतान नहीं करता है, तो ब्याज दर बढ़कर 12% हो जाएगी। मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के रूप में 35,000 रुपये अलग से देने होंगे। वकील जसबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ईएसआई जैसे संस्थानों का काम मजदूरों की मदद करना है, उन्हें परेशान करना नहीं। निगम गरीब कामगारों के ही पैसे से उन्हीं के खिलाफ केस लड़कर उन्हें प्रताड़ित कर रहा है, जो कि कानूनन और नैतिक रूप से गलत है।
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8 फरवरी 2018 को ड्यूटी के बाद घर लौटते समय उनका एक्सीडेंट हो गया। उन्हें खरड़ सिविल अस्पताल से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां 19 फरवरी 2018 को उनकी मृत्यु हो गई। अमरजीत की मौत के बाद उनकी विधवा पत्नी पेंशन के लिए विभाग के चक्कर काटती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थक-हारकर उन्होंने 13 दिसंबर 2022 को उपभोक्ता आयोग में केस दर्ज कराया। आयोग के अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि विभाग की ओर से सेवा में कमी की गई है। आयोग ने आदेश दिया कि विधवा को उनके पति की मृत्यु की तारीख (19/02/2018) से 9% ब्याज के साथ सारा बकाया भुगतान किया जाए।
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अगर विभाग 30 दिन के भीतर यह भुगतान नहीं करता है, तो ब्याज दर बढ़कर 12% हो जाएगी। मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के रूप में 35,000 रुपये अलग से देने होंगे। वकील जसबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ईएसआई जैसे संस्थानों का काम मजदूरों की मदद करना है, उन्हें परेशान करना नहीं। निगम गरीब कामगारों के ही पैसे से उन्हीं के खिलाफ केस लड़कर उन्हें प्रताड़ित कर रहा है, जो कि कानूनन और नैतिक रूप से गलत है।
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