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शहर बनेगा कैटल फ्री, अब पशु डेयरियां जाएंगी बाहर, पांच साल बाद नगर निगम ने शुरू किया काम
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मोहाली। शहर को कैटल फ्री बनाने के प्रोजेक्ट पर नगर निगम ने एक बार फिर से काम शुरू किया है। इस बार कोशिश यहीं है कि निगम के अधीन आते इलाकों से पशु डेयरियों को बाहर निकाला जाए। इसके लिए पशु मालिकों को जगह भी मुहैया करवाई जाएगी। निगम की तरफ से करीब दस से 12 एकड़ जगह की निशानदेही भी की गई है, जहां पर डेयरियों को शिफ्ट किया जाएगा। नगर निगम के डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मोहाली कैटल फ्री बनेगा तो इससे इलाके के लोगों का फायदा होगा। शहर की सुंदरता बढ़ेगी । साथ ही सड़क हादसों पर लगाम लगेगी।
जानकारी के मुुताबिक मोहाली शहर को चंडीगढ़ की तर्ज पर बसाया गया है। शहर के अंदर किसी भी तरह के पशु रखने की किसी को अनुमति नहीं है। कुछ समय पहले मोहाली नगर निगम के अधीन छह गांव आए थे। इन एरिया में लोगों ने पशु रखे हुए थे। जब लोगों से इस बारे सवाल जवाब किया तो लोगों की दलील थी कि उनका जीवन इन्हीं के सहारे चलता है। वह दूध बेचकर अपना काम चलाते हैं। हालांकि यह पशु शहर के लिए मुसीबत बन गए हैं। क्योकि पशु पालक पशुओं से दूध लेने के बाद उन्हें चरने के लिए सड़कों पर छोड़ देते हैं। जिस वजह से कई बार हादसे तक होते रहे हैं। यहां पर पशुुओं की गंदगी स्ट्रॉम और सीवरेज की लाइन जाम होने की दिक्कत आती है। यह मामला कई बार हाउस की मीटिंग में उठा। वहीं, पांच साल पहले भी इस दिशा में काम शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो पाया था। लेकिन उम्मीद है कि इस बार यह प्रोजेक्ट सिरे चढ़ सकता है। क्योंकि सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इतना ही नहीं खरड़ के पास स्थित एक गांव में कुछ समय पहले जगह की निशानदेही भी की गई थी। लेकिन इसके बाद यह प्रोजेक्ट अधर में रह गया था।
एयरपोर्ट रोड समेत भी सड़कों पर पशुओं की समस्या
जानकारी के मुताबिक पशुओं की वजह से सबसे ज्यादा दिक्कत फेज-11 से एयरपोर्ट रोड, एयरपोर्ट रोड से खरड़ हाईवे तक, इसके अलावा सभी अंदरूनी सड़कों पर पशु मुंह मारते हुए देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं कुछ साल पहले फेज-7 से मटौर जा रही सड़क पर बाइक सवार दंपति के आगे लावारिस पशु आ गए थे। जिसकी वजह से बाइक का संतुलन बिगड़ गया था ओर दोनों सड़क पर गिर गए थे। इस हादसे में पति की मौत हो गई थी।
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पशु पकड़ने वाली टीम पर हो चुके हैं हमले
शहर में घुमने वाले अधिकतर पशु पालतू हैं। जब भी नगर निगम की टीम लावारिस पशु को पकड़ने जाती है, तो पशु मालिक नगर निगम की टीम से भिड़ जाते हैं। इतना ही नहीं टीम पर हमला कर पशुओं को छुड़ाने के मामले सामने आ चुके हैं। इस संबंधी थानों में भी केस दर्ज है । वहीं, कुछ समय पहले लावारिस पशुओं से निपटने के लिए बलौंगी में एक नई गोशला तक बनाई गई है।
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जानकारी के मुुताबिक मोहाली शहर को चंडीगढ़ की तर्ज पर बसाया गया है। शहर के अंदर किसी भी तरह के पशु रखने की किसी को अनुमति नहीं है। कुछ समय पहले मोहाली नगर निगम के अधीन छह गांव आए थे। इन एरिया में लोगों ने पशु रखे हुए थे। जब लोगों से इस बारे सवाल जवाब किया तो लोगों की दलील थी कि उनका जीवन इन्हीं के सहारे चलता है। वह दूध बेचकर अपना काम चलाते हैं। हालांकि यह पशु शहर के लिए मुसीबत बन गए हैं। क्योकि पशु पालक पशुओं से दूध लेने के बाद उन्हें चरने के लिए सड़कों पर छोड़ देते हैं। जिस वजह से कई बार हादसे तक होते रहे हैं। यहां पर पशुुओं की गंदगी स्ट्रॉम और सीवरेज की लाइन जाम होने की दिक्कत आती है। यह मामला कई बार हाउस की मीटिंग में उठा। वहीं, पांच साल पहले भी इस दिशा में काम शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो पाया था। लेकिन उम्मीद है कि इस बार यह प्रोजेक्ट सिरे चढ़ सकता है। क्योंकि सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इतना ही नहीं खरड़ के पास स्थित एक गांव में कुछ समय पहले जगह की निशानदेही भी की गई थी। लेकिन इसके बाद यह प्रोजेक्ट अधर में रह गया था।
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एयरपोर्ट रोड समेत भी सड़कों पर पशुओं की समस्या
जानकारी के मुताबिक पशुओं की वजह से सबसे ज्यादा दिक्कत फेज-11 से एयरपोर्ट रोड, एयरपोर्ट रोड से खरड़ हाईवे तक, इसके अलावा सभी अंदरूनी सड़कों पर पशु मुंह मारते हुए देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं कुछ साल पहले फेज-7 से मटौर जा रही सड़क पर बाइक सवार दंपति के आगे लावारिस पशु आ गए थे। जिसकी वजह से बाइक का संतुलन बिगड़ गया था ओर दोनों सड़क पर गिर गए थे। इस हादसे में पति की मौत हो गई थी।
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पशु पकड़ने वाली टीम पर हो चुके हैं हमले
शहर में घुमने वाले अधिकतर पशु पालतू हैं। जब भी नगर निगम की टीम लावारिस पशु को पकड़ने जाती है, तो पशु मालिक नगर निगम की टीम से भिड़ जाते हैं। इतना ही नहीं टीम पर हमला कर पशुओं को छुड़ाने के मामले सामने आ चुके हैं। इस संबंधी थानों में भी केस दर्ज है । वहीं, कुछ समय पहले लावारिस पशुओं से निपटने के लिए बलौंगी में एक नई गोशला तक बनाई गई है।