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शहर की तीसरी आंख खराब
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जीरकपुर। जीरकपुर सहित पंचकूला और चंडीगढ़ में अपराधी अपराध कर जीरकपुर हाईवे के रास्ते आसानी से निकल जाते हैं क्योंकि हाईवे के मुख्य प्वाइंटों पर लगाए गए 12 सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। शनिवार को मोहाली डीसी के दौरे के बाद लोगों को कुछ उम्मीद जगी है कि हाईवे किनारे खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को डीसी के निर्देेश के बाद जल्द सही करवाया जाएगा।
खराब सीसीटीवी कैमरों और बंद पड़े ट्रैफिक लाइट प्वाइंट्स को लेकर डीसी ने नगर काउंसिल सहित प्रशासनिक अधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई। फिलहाल इन कैमरों का पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। वहीं बंद पड़ी ट्रैफिक लाइट्स प्वाइंट जाम के कारण बन रहे हैं।
जिस शहर की आबादी करीब तीन लाख है और शहर का मार्ग चंडीगढ़, पंचकूला, शिमला के लिए मुख्य मार्ग है, ऐसे में नगर काउंसिल के अधिकारियों द्वारा यह कहा जाना कि शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों को लगाने की जिम्मेदारी उनकी नहीं, क्योंकि नगर काउंसिल के एक्ट में प्रावधान नहीं है तो यह हास्यास्पद है। अब सवाल यह है कि जब एक्ट में प्रावधान ही नहीं है तो 2015 में 15 लाख रुपये की लागत से जीरकपुर और हाईवे के मुख्य प्वाइंटों पर 12 सीसीटीवी कैमरे कैसे लगा दिए गए।
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ट्रैफिक पुलिस ने नगर काउंसिल को 18 बार लिखा पत्र
ट्रैफिक पुलिस द्वारा नगर काउंसिल जीरकपुर को सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए अब तक 18 बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन काउंसिल ने सीसीटीवी कैमरे लगवाना तो दूर ट्रैफिक पुलिस द्वारा लिखे गए पत्रों का जवाब तक नहीं दिया। ट्रैफिक पुलिस की ओर से जब दो सीसीटीवी कैमरे खराब हुए थे, तब से पत्र लिखा जा रहा है। अब एक-एक करके 12 जगहों पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरे खराब हो चुके हैं।
साहब जो टैक्स भरते हैं, उनकी सोच लीजिए
दूसरे राज्यों की छोड़िए कम से कम जीरकपुर शहरी क्षेत्र में लाखों लोग नगर काउंसिल को टैक्स भरते हैं, विभाग के अधिकारी उन्हीं के बारे में सोच लें, पहले लाखों रुपये खर्च कर जीरकपुर में लोगों ने फ्लैट और जमीन खरीदी और सुरक्षा यहां जीरो है। इस ओर जिला प्रशासन का भी ध्यान नहीं है।
बस अड्डे में बनाए गए कंट्रोल रूम
नगर काउंसिल ने 15 लाख की लागत से शहर के 12 प्वाइंट पर कैमरे लगाए थे। उनका सीधा लिंक बस अड्डे में बने ट्रैफिक इंचार्ज रूम से करवाया गया था। जीरकपुर बस अड्डे में एक रूम में कंट्रोल रूम व स्क्रीन लगाई गई थी, जहां से ट्रैफिक पुलिस कैमरों से सारी गतिविधियों पर नजर रखती थी। यही नहीं शहर में कोई वारदात होते ही संबंधित थाना पुलिस भी इस कंट्रोल का फायदा उठाती थी, लेकिन अब करीब दो साल से ये सारे कैमरे बंद पड़े हैं।
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खराब सीसीटीवी कैमरों और बंद पड़े ट्रैफिक लाइट प्वाइंट्स को लेकर डीसी ने नगर काउंसिल सहित प्रशासनिक अधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई। फिलहाल इन कैमरों का पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। वहीं बंद पड़ी ट्रैफिक लाइट्स प्वाइंट जाम के कारण बन रहे हैं।
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जिस शहर की आबादी करीब तीन लाख है और शहर का मार्ग चंडीगढ़, पंचकूला, शिमला के लिए मुख्य मार्ग है, ऐसे में नगर काउंसिल के अधिकारियों द्वारा यह कहा जाना कि शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों को लगाने की जिम्मेदारी उनकी नहीं, क्योंकि नगर काउंसिल के एक्ट में प्रावधान नहीं है तो यह हास्यास्पद है। अब सवाल यह है कि जब एक्ट में प्रावधान ही नहीं है तो 2015 में 15 लाख रुपये की लागत से जीरकपुर और हाईवे के मुख्य प्वाइंटों पर 12 सीसीटीवी कैमरे कैसे लगा दिए गए।
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ट्रैफिक पुलिस ने नगर काउंसिल को 18 बार लिखा पत्र
ट्रैफिक पुलिस द्वारा नगर काउंसिल जीरकपुर को सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए अब तक 18 बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन काउंसिल ने सीसीटीवी कैमरे लगवाना तो दूर ट्रैफिक पुलिस द्वारा लिखे गए पत्रों का जवाब तक नहीं दिया। ट्रैफिक पुलिस की ओर से जब दो सीसीटीवी कैमरे खराब हुए थे, तब से पत्र लिखा जा रहा है। अब एक-एक करके 12 जगहों पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरे खराब हो चुके हैं।
साहब जो टैक्स भरते हैं, उनकी सोच लीजिए
दूसरे राज्यों की छोड़िए कम से कम जीरकपुर शहरी क्षेत्र में लाखों लोग नगर काउंसिल को टैक्स भरते हैं, विभाग के अधिकारी उन्हीं के बारे में सोच लें, पहले लाखों रुपये खर्च कर जीरकपुर में लोगों ने फ्लैट और जमीन खरीदी और सुरक्षा यहां जीरो है। इस ओर जिला प्रशासन का भी ध्यान नहीं है।
बस अड्डे में बनाए गए कंट्रोल रूम
नगर काउंसिल ने 15 लाख की लागत से शहर के 12 प्वाइंट पर कैमरे लगाए थे। उनका सीधा लिंक बस अड्डे में बने ट्रैफिक इंचार्ज रूम से करवाया गया था। जीरकपुर बस अड्डे में एक रूम में कंट्रोल रूम व स्क्रीन लगाई गई थी, जहां से ट्रैफिक पुलिस कैमरों से सारी गतिविधियों पर नजर रखती थी। यही नहीं शहर में कोई वारदात होते ही संबंधित थाना पुलिस भी इस कंट्रोल का फायदा उठाती थी, लेकिन अब करीब दो साल से ये सारे कैमरे बंद पड़े हैं।