फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Mohali News ›   Budget deteriorating at the time of admission, Education Department kept silent

दाखिले के समय में बिगड़ रहा बजट, शिक्षा विभाग खामोश

Tue, 17 Mar 2020 02:21 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2020 02:21 AM IST
विज्ञापन
Budget deteriorating at the time of admission, Education Department kept silent
मोहाली। प्राइवेट स्कूलों में परिजनों से भारी-भरकम रकम वसूलने के लिए फीस के विभिन्न मद निर्धारित हैं। दाखिले से लेकर आईडी कार्ड, मैंटीनेंस, डेवलपमेंट और पैरेंट्स-टीचर मीटिंग तक का पूरा खर्चा परिजनों से वसूला जा रहा है। प्ले ग्रुप से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक क्लासों में फीस की बात करें तो कोई मानक नहीं हैं। इन पर न तो प्रशासन का ही अंकुश है और न ही शिक्षा विभाग का। वीआईपी सिटी में दो दर्जन से ज्यादा प्राइवेट स्कूल हैं, जो परिजनों की जेब पर भारी होने के बाद भी मजबूरी बने हुए हैं। प्राइवेट स्कूल राइट टू एजुकेशन की धज्जियां उड़ा रहे हैं और शिक्षा विभाग शिकायत के इंतजार में है।
विज्ञापन

सीबीएसई ने विभिन्न कक्षाओं के बच्चों के लिए फीस के क्या प्रावधान किए हैं, इस बारे में परिजनों को कभी कोई जानकारी भी नहीं दी जाती। प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस के साथ डोनेशन वसूला जा रहा है। देखा गया है कि डोनेशन नर्सरी से लेकर बारहवीं तक अलग-अलग राशि में लिया जा रहा है। सामान्यत: परिवार के दो बच्चों का एडमिशन करवाने के लिए परिजनों को 80 हजार से 1 लाख का खर्च करना पड़ रहा है। लिहाज प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें तय हैं, लेकिन इसके पालन पर संशय बरकरार है।
विज्ञापन

क्या कहना है परिजनों का
मध्यम वर्ग के लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में अच्छी शिक्षा तो देना चाहते हैं, लेकिन निजी स्कूलों में वसूली जा रही मनमानी फीस व डोनेशन उनके बजट को बिगाड़कर रख देता है। वे लोग जो बजट में इस अतिरिक्त भार को वहन नहीं कर पाते वे अपने बच्चों को चाहते हुए भी प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ा पा रहे हैं। स्कूल बेहतर सुविधाओं व अच्छे शिक्षक के नाम पर बड़ी रकम वसूल रहे हैं, जिस पर सरकार भी मौन है। - नितिन गुप्ता
विज्ञापन
विज्ञापन

अदालत के आदेश व सरकार की नीतियां प्राइवेट स्कूलों पर लगाम नहीं लगा सकीं। इन स्कूलों ने वसूली का तरीका बदल दिया है। शिक्षा व सेहत कमाऊ सेक्टर हैं। इनमें राजनेताओं और रसूखदार लोगों का पैसा लगा है। लिहाजा इन पर सरकारी विभाग व प्रशासन भी कार्रवाई नहीं करता। बच्चों के एडमिशन के दौरान बजट बिगड़ जाता है, लेकिन बच्चों का भविष्य संवारने के लिए मजबूरी है। - कीरत सिंह
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के लिए सभी जिम्मेदार हैं। महंगी फीस पैरेंट्स के लिए स्टेटस सिंबल है, उसके लिए चाहे जितना भी परेशान होना पड़े। इसी का फायदा प्राइवेट स्कूल उठा रहे हैं। समाज में भेड़चाल है और सरकार इस तरफ गंभीर नहीं है। सरकारी अधिकारियों व मंत्रियों की तो छोड़िए सरकारी स्कूल के टीचर्स के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ते। सरकार स्कूलों का स्तर सुधारे तो हम भी बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने को तैयार हैं। - अतुल शर्मा
प्राइवेट स्कूलों पर कोई अंकुश नहीं है। अदालत के आदेश और सरकार की गाइडलाइन के बाद भी पैरेंट्स को कोई राहत नहीं मिली। स्कूलों ने अपने तरीके बदल लिए। आज भी किताबों से लेकर स्कूल ड्रेस व अन्य सामान निर्धारित दुकानों पर ही मिलता है। एडमिशन के समय तो बड़ी रकम फीस के तौर पर देनी ही पड़ती है। नियमित तौर पर भी हर माह स्कूल किसी न किसी बहाने वसूली करते रहते हैं। बच्चों को पढ़ाना है तो मजबूरी है, क्योंकि न तो सरकार कुछ कर रही है और न ही न्यायपालिका। - नरिंदर सिंह कटवाल
क्या कहते हैं अधिकारी
स्कूल में अतिरिक्त सुविधा को जस्टिफाई करने के साथ प्राइवेट स्कूल हर साल 8 प्रतिशत तक फीस में इजाफा कर सकते हैं। स्कूल को किताबों व यूनिफार्म के लिए 7-8 दुकानों के नाम कैंपस में प्रदर्शित करने होते हैं। स्कूल कैंपस में इन्हें नहीं बेचा जा सकता। जब भी कोई शिकायत आती है तो उसकी तुरंत जांच कर हल किया जाता है। कोई भी परिजन डीसी ऑफिस या शिक्षा विभाग के कार्यालय में अपनी शिकायत दे सकता है। - हिम्मत सिंह, डीईओ सेकेंडरी मोहाली

कोट्स
जब भी कोई शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाती है। जब कोई परिजन शिकायत ही न करे तो विभाग क्या कर सकता है। विभाग के पास कोई शिकायत पेंडिंग नहीं है। नियमित रूप से भी प्राइवेट स्कूलों की जांच की जाती है। फिलहाल बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। इसके बाद फिर से नियमित जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। - गुरप्रीत कौर, डीईओ एलिमेंटरी मोहाली
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed