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ब्रिटिश सेना ने दिया शहीदों को सम्मान..अपने भूल गए

Sun, 11 Apr 2021 01:55 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Sun, 11 Apr 2021 01:55 AM IST
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British army gave respect to martyrs ... forgot their
कुराली। प्रथम विश्व युद्ध में शहादत पाने वाले सैनिकों का सम्मान ब्रिटिश सेना ने तो किया लेकिन अपने ही राज्य की सरकारें और प्रशासन उन्हें भूल गया। इतने साल बीत जाने के बावजूद इन शहीदों की याद में गांव में कोई यादगार तक नहीं बनवाई गई। जिससे आने वाली पीढ़ियां उन्हें याद रख सकतीं।
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गांव हसनपुर निवासी सूबेदार जरनैल सिंह धनोआ ने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध में पंजाब के सिख सैनिकों ने भी भाग लिया था। इनमें गांव कुब्बाहेड़ी के अतिरिक्त हसनपुर के 21 सैनिक शामिल हुए थे। इनमें से 17 सैनिकों ने शहादत पाई थी। उनकी बहादुरी को सलाम करते हुए ब्रिटिश सेना ने उस समय गांव में यादगारी पत्थर लगवाया था ताकि लोग उन्हें याद रख सकें। आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर दीवार पर लगे यादगारी पत्थर को दिखाते हुए अमरीक सिंह ने बताया कि आज यह यादगार मिटने के कगार पर है। इतने सालों में हमने राजनेताओं से लेकर प्रशासनिक अफसरों तक गुहार लगाई लेकिन किसी ने शहीदों की याद में स्मारक बनाने के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई। गांव के ही अजीत सिंह, इंद्रजीत सिंह, बहादुर सिंह, बलवीर सिंह, अवतार सिंह, मनजीत सिंह, नाहर सिंह, गुरमीत सिंह, सरपंच सुरिन्द्र सिंह और गुरमीत सिंह ने बताया कि शहीदों के परिवार आज भी गांव में रह रहे हैं। शहीदों के प्रति सरकार और प्रशासन की ओर से किए जा रहे रवैये से परिवारों और गांववालों में रोष है। उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री खुद भी एक फौजी रहे हैं, ऐसे में उन्हें तो शहादत को सम्मान देने के लिए आगे आना चाहिए। यदि शहीदों की याद में स्मारक बन जाएगा तो आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा लेती रहेंगी।
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21 सैनिक हुए थे शामिल, 17 ने शहादत पाई
सूबेदार जरनैल सिंह धनोआ ने बताया कि सुंदर सिंह, तेजा सिंह, माधो सिंह, मनसा सिंह, हरी सिंह, राम सिंह, ईशर सिंह, नरैण सिंह, बलवंत सिंह, बौघ सिंह, मोहन सिंह, रोढल सिंह, नराता सिंह, तेजा सिंह, अनोख सिंह आदि ने शहीदी पाई थी जबकि निक्का सिंह, नराता सिंह, पूरन सिंह और तेजा सिंह वापस आए थे।
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फोटो कैप्शन: गांव हसनपुर में ब्रिटिश आर्मी द्वारा लगाए पत्थर को दिखाकर जानकारी देेते हुए पूर्व सैनिक और गांव वासी।
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