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Mohali News: आज से चातुर्मास का मंगलमय प्रवेश, 4 महीने तक चलेगा
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जीरकपुर। जैन समाज के जीरकपुर शहर में विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम चल रहे हैं। 10 जुलाई को चातुर्मास का मंगलमय प्रवेश हो रहा है। इस संबंध में जैन समाज की मधुरवक्ता महा साध्वी श्री मधुरता जी महाराज तथा चंद्रिका साध्वी श्री ममता जी महाराज, सेवाभावी साध्वी श्री महक जी महाराज द्वारा प्रवेश यात्रा शुरू की हुई है।
जैन सभा जीरकपुर में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में महासाध्वी मधुरता जी महाराज ने बताया कि चातुर्मास वर्षा ऋतु में आने वाला वह विशेष 4 महीने का कालखंड है जब जैन साधु संत एक स्थान पर ठहरते हैं। इस ठहराव का उद्देश्य पर्यावरण की विवशता नहीं बल्कि आत्म शुद्धि तपस्या और लाखों सूक्ष्म जीवों की रक्षा करना है।
इस मौके पर चंद्रिका साध्वी ममता जी महाराज ने चार मौलिक सूत्रों के माध्यम से आत्मिक उद्यान का मार्ग बताया। पहला आत्मा में स्थिर होना ही सच्चा धर्म है। दूसरा दान कई गुना होकर लौटता है, यह दान आत्मिक उन्नति का साधन है। तीसरा सेवा में मनुष्य का अहंकार शून्य होता है, विनम्रता आत्मा को प्रभु से जोड़ती है। चौथा आत्मा की शुद्ध अवस्था ही ईश्वर है, ईश्वर कहीं बाहर नहीं वह हमारे भीतर ही है। इस प्रवचन सभा में जैन सभा जीरकपुर के संरक्षक विनोद जैन, सरपरस्त हरीश जैन, अध्यक्ष जनक जैन, महासचिव उमेश जैन, कोषाध्यक्ष प्रेम जैन सहित समूह के सदस्य उपस्थित थे।
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जैन सभा जीरकपुर में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में महासाध्वी मधुरता जी महाराज ने बताया कि चातुर्मास वर्षा ऋतु में आने वाला वह विशेष 4 महीने का कालखंड है जब जैन साधु संत एक स्थान पर ठहरते हैं। इस ठहराव का उद्देश्य पर्यावरण की विवशता नहीं बल्कि आत्म शुद्धि तपस्या और लाखों सूक्ष्म जीवों की रक्षा करना है।
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इस मौके पर चंद्रिका साध्वी ममता जी महाराज ने चार मौलिक सूत्रों के माध्यम से आत्मिक उद्यान का मार्ग बताया। पहला आत्मा में स्थिर होना ही सच्चा धर्म है। दूसरा दान कई गुना होकर लौटता है, यह दान आत्मिक उन्नति का साधन है। तीसरा सेवा में मनुष्य का अहंकार शून्य होता है, विनम्रता आत्मा को प्रभु से जोड़ती है। चौथा आत्मा की शुद्ध अवस्था ही ईश्वर है, ईश्वर कहीं बाहर नहीं वह हमारे भीतर ही है। इस प्रवचन सभा में जैन सभा जीरकपुर के संरक्षक विनोद जैन, सरपरस्त हरीश जैन, अध्यक्ष जनक जैन, महासचिव उमेश जैन, कोषाध्यक्ष प्रेम जैन सहित समूह के सदस्य उपस्थित थे।
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