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Mohali News: फर्श पर सो रहे तीमारदार जच्चा-बच्चा वार्ड में भारी भीड़, एक बेड पर दो दो मरीज
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मोहाली। फेज-6 स्थित जिला अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण एक ही बेड पर दो महिलाओं को भर्ती किया जा रहा है। वहीं, तीमारदारों को रात फर्श पर सोकर गुजारनी पड़ रही है, जिससे व्यवस्थाओं की खामियां उजागर हुई हैं।
बुधवार को अस्पताल में पड़ताल के दौरान वार्ड में मरीजों का अत्यधिक दबाव देखा गया। उपलब्ध बेड कम पड़ने से प्रसव के बाद भर्ती महिलाओं को एक ही बेड पर दो-दो करके रखा जा रहा था। परिजनों का कहना है कि मरीजों की संख्या अधिक होने के बावजूद वार्ड में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। तीमारदारों के लिए भी वार्ड में जगह नहीं है, जिससे उन्हें जमीन पर चादर बिछाकर सोना पड़ता है। रात के समय उचित स्थान न मिलने से उन्हें काफी परेशानी होती है। खरड़ से आए मनोज ने बताया कि मरीज के साथ रहना जरूरी है लेकिन अस्पताल में उनके बैठने और आराम करने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। फेज 6 की रानी ने कहा कि प्रसव के बाद महिलाओं और नवजात बच्चों की देखभाल के लिए साफ-सुथरी और पर्याप्त जगह जरूरी है। भीड़ बढ़ने से संक्रमण और स्वच्छता को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
मरीजों की बढ़ती असुविधा
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार अधिक बनी रहती है। इसका सीधा असर जच्चा-बच्चा वार्ड की व्यवस्था पर दिख रहा है। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से वार्ड की क्षमता बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने तीमारदारों के लिए भी बैठने और आराम करने की व्यवस्था करने को कहा है, ताकि इलाज के दौरान असुविधा न हो।
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अस्पताल प्रशासन का पक्ष
अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित अग्रवाल ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन हर मरीज को बेड उपलब्ध कराने का प्रयास करता है। मरीजों की संख्या अधिक होने पर कई बार बेड की कमी हो जाती है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मरीजों को सुविधाएं देने की कोशिश कर रहा है।
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बुधवार को अस्पताल में पड़ताल के दौरान वार्ड में मरीजों का अत्यधिक दबाव देखा गया। उपलब्ध बेड कम पड़ने से प्रसव के बाद भर्ती महिलाओं को एक ही बेड पर दो-दो करके रखा जा रहा था। परिजनों का कहना है कि मरीजों की संख्या अधिक होने के बावजूद वार्ड में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। तीमारदारों के लिए भी वार्ड में जगह नहीं है, जिससे उन्हें जमीन पर चादर बिछाकर सोना पड़ता है। रात के समय उचित स्थान न मिलने से उन्हें काफी परेशानी होती है। खरड़ से आए मनोज ने बताया कि मरीज के साथ रहना जरूरी है लेकिन अस्पताल में उनके बैठने और आराम करने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। फेज 6 की रानी ने कहा कि प्रसव के बाद महिलाओं और नवजात बच्चों की देखभाल के लिए साफ-सुथरी और पर्याप्त जगह जरूरी है। भीड़ बढ़ने से संक्रमण और स्वच्छता को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
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मरीजों की बढ़ती असुविधा
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार अधिक बनी रहती है। इसका सीधा असर जच्चा-बच्चा वार्ड की व्यवस्था पर दिख रहा है। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से वार्ड की क्षमता बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने तीमारदारों के लिए भी बैठने और आराम करने की व्यवस्था करने को कहा है, ताकि इलाज के दौरान असुविधा न हो।
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अस्पताल प्रशासन का पक्ष
अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित अग्रवाल ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन हर मरीज को बेड उपलब्ध कराने का प्रयास करता है। मरीजों की संख्या अधिक होने पर कई बार बेड की कमी हो जाती है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मरीजों को सुविधाएं देने की कोशिश कर रहा है।