फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Mohali News ›   Arguments over

Mohali News: मोबाइल बंद करने पर बहस, गेम में हार से चिड़चिड़ापन... बच्चों की पढ़ाई और नींद पर पड़ रहा असर

Tue, 20 Oct 2026 02:24 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 02:24 AM IST
विज्ञापन
Arguments over
मोहाली। ऑनलाइन गेम में जीतने की चाह बच्चों को घंटों मोबाइल स्क्रीन के सामने बैठा रही है। गेम में हारने पर गुस्सा करना, मोबाइल बंद करने पर बहस करना और खेलते समय समय का ध्यान नहीं रहना अभिभावकों के लिए परेशानी बन रहा है। कई बार बच्चों की दिनचर्या इस तरह बदल जाती है कि वे देर रात तक गेम खेलते हैं, सुबह उठने में परेशानी होती है और पढ़ाई के दौरान भी ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। फेज-6 स्थित जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. प्रिया अरोड़ा के अनुसार, बच्चों की इन आदतों को नजरअंदाज करने के बजाय उनके व्यवहार और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है।
विज्ञापन


केस-1: मोबाइल बंद करते ही नाराजगी

एक उदाहरण ऐसी स्थिति का है, जिसमें बच्चा ऑनलाइन गेम खेलते समय समय का ध्यान नहीं रखता। घरवाले मोबाइल बंद करने के लिए कहते हैं तो वह नाराज होकर बहस करने लगता है। अभिभावकों के लिए हर दिन स्क्रीन टाइम को लेकर समझाना चुनौती बन जाता है। ऐसे में बच्चे को डांटने के बजाय उसकी बात सुनना और गेम खेलने का समय निर्धारित करना मददगार हो सकता है।
विज्ञापन


केस-2: देर रात तक गेम, सुबह उठने में परेशानी

दूसरी स्थिति में बच्चा देर रात तक मोबाइल पर गेम खेलता रहता है। सुबह स्कूल जाने के समय उठने में परेशानी होती है और पढ़ाई पर ध्यान लगाने में दिक्कत आती है। ऐसे में परिवार को सोने-जागने का समय तय करने और रात में मोबाइल इस्तेमाल सीमित करने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बच्चों को डांटने के बजाय समझाएं : डॉ. प्रिया अरोड़ा
फेज 6 जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. प्रिया अरोड़ा ने बताया कि ऑनलाइन गेम की आदत बच्चों की दिनचर्या, नींद और पढ़ाई को प्रभावित कर सकती है। गेम में हारने पर गुस्सा करना, मोबाइल बंद करने पर चिड़चिड़ापन दिखाना और बार-बार खेलने की जिद करना ऐसे संकेत हैं, जिन पर अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए। बच्चों को डांटने या अचानक मोबाइल छीनने के बजाय प्यार से समझाएं और उनके साथ मिलकर स्क्रीन टाइम तय करें। बच्चों को आउटडोर खेलों, शारीरिक गतिविधियों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें। यदि बच्चा गेम खेलने पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा है और उसकी पढ़ाई, नींद या व्यवहार पर लगातार असर पड़ रहा है तो मनोचिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed