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ड्रग्स तस्करी मामला: बिक्रम मजीठिया पहुंचे कोर्ट, मोहाली जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल

Thu, 23 Dec 2021 01:24 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 23 Dec 2021 01:24 PM IST
सार

याचिका में उनके वकीलों ने दलील दी है कि मजीठिया पर जो केस दर्ज किया गया है, वह राजनीति से प्रेरित है। पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में इस चीज का फायदा लेने का प्रयास किया जा रहा है। 

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Akali leader Bikram Majithia Filed anticipatory bail petition in Mohali district court
बिक्रम सिंह मजीठिया। - फोटो : twitter @bsmajithia

विस्तार

पंजाब के पूर्व मंत्री और अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम मजीठिया ने जेल से बचने के लिए जिला अदालत की शरण ली है। उन्होंने अपने वकीलों के माध्यम से गुरुवार को सीआरपीसी की धारा-438 के तहत जमानत याचिका दायर की। अदालत में उनके वकीलों ने कई दलीलें रखीं और उनका कहना था कि बिक्रम मजीठिया पर दर्ज केस राजनीति से प्रेरित हैं। 

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राज्य की मौजूदा कांग्रेस सरकार ने आने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर झूठा केस दर्ज किया है। इसके बाद अदालत ने पुलिस को केस से जुड़ा रिकॉर्ड लेकर शुक्रवार को पेश होने का आदेश दिया है। मजीठिया के वकीलों ने दलील दी कि मजीठिया पर केस दर्ज करने के लिए तीन महीने में तीन डीजीपी तक बदल दिए गए। यहां तक कि जब पूर्व डीजीपी इकबाल प्रीत सिंह सहोता ने केस दर्ज करने से मना किया तो उन्हें रातों रात बदल दिया। इसके बाद सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को कार्यकारी डीजीपी लगाया गया। हालांकि नियमित डीजीपी की अभी नियुक्ति नहीं हुई। 
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उन्होंने कहा कि मौजूदा डीजीपी की शिरोमणि अकाली दल से पुरानी दुश्मनी रही है। बादल परिवार पर उन्होंने 2003 में केस दर्ज किया था। जिसमें परिवार 2010 में बरी हुआ था। मजीठिया के वकीलों ने कहा कि जब यह ड्रग केस चल रहा था। उस समय में बिक्रम मजीठिया को किसी भी कोर्ट ने समन भेजकर तलब नहीं किया था। 
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अदालत में कहा गया है कि एसटीएफ प्रमुख ने अपनी रिपोर्ट में तीन व्यक्तियों के बयानों को भी पुन: प्रस्तुत किया। यह ध्यान देने योग्य है कि पंजाब पुलिस की ओर से दर्ज किए गए किसी भी बयान में याचिकाकर्ता की मिलीभगत के किसी भी आरोप का उल्लेख नहीं मिलता है। मजीठिया के वकीलों ने सत्ताधारी दल के एक विधायक की वीडियो भी अदालत को सौंपी है। इसमें दावा किया गया है कि वह वकीलों को उक्त केस की पैरवी करने से रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि जब केस दर्ज हुआ तो इस संबंधी लोगों को जानकारी पुलिस या जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि कांग्रेस के राज्य प्रधान की ओर से दी गई। 

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