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एरोट्रोपोलिस परियोजना : सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को नजरअंदाज करने पर पत्तों के ग्रामीण नाराज, दर्ज कराई आपत्तियां
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मोहाली। गमाडा की महत्वाकांक्षी और प्रमुख परियोजना एरोट्रोपोलिस के विस्तार को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस परियोजना के तहत आठ गांवों की लगभग 3,553 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जानी है। कुरड़ी, बाड़ी और किशनपुरा के बाद अब गांव पत्तों के निवासियों ने भी भूमि अधिग्रहण में जल्दबाजी पर सवाल उठाकर गमाडा के समक्ष औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं। गांव पत्तों के लोगों ने गमाडा के सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (एसआईए) पर गंभीर आपत्ति जताई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस सर्वेक्षण में किसानों और स्थानीय निवासियों पर पड़ने वाले सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को नजरअंदाज किया गया है। पूर्व सरपंच हरमिंदर सिंह पत्तों, मौजूदा सरपंच गुरजंट सिंह, राजिंदर सिंह, नंबरदार मनिंदर सिंह और पंच सुखविंदर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण कलेक्टर को अपने लिखित एतराज सौंपे। ग्रामीण प्रतिनिधियों ने बताया कि जब तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं सुना जाता, तब तक वे अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं।
यह हैं प्रमुख मांगें
प्रमुख मांगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार, लैंड पूलिंग नीति के तहत अधिक विकसित प्लॉट, गांवों के लिए कम से कम पांच एकड़ भूमि आरक्षित करना और गांव को 200 फीट चौड़ी सड़क से जोड़ना शामिल है। उनका कहना है कि एरोट्रोपोलिस जैसी बड़ी परियोजना से विकास तो होगा, लेकिन इसका लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि दबाव बनाकर या जबरन भूमि अधिग्रहण की कोशिश की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि विकास के नाम पर किसानों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है और उनकी मांगें पूरी किए बिना एरोट्रोपोलिस परियोजना को आगे बढ़ाने का विरोध किया जाएगा।
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ग्रामीणों का कहना है कि इस सर्वेक्षण में किसानों और स्थानीय निवासियों पर पड़ने वाले सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को नजरअंदाज किया गया है। पूर्व सरपंच हरमिंदर सिंह पत्तों, मौजूदा सरपंच गुरजंट सिंह, राजिंदर सिंह, नंबरदार मनिंदर सिंह और पंच सुखविंदर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण कलेक्टर को अपने लिखित एतराज सौंपे। ग्रामीण प्रतिनिधियों ने बताया कि जब तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं सुना जाता, तब तक वे अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं।
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यह हैं प्रमुख मांगें
प्रमुख मांगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार, लैंड पूलिंग नीति के तहत अधिक विकसित प्लॉट, गांवों के लिए कम से कम पांच एकड़ भूमि आरक्षित करना और गांव को 200 फीट चौड़ी सड़क से जोड़ना शामिल है। उनका कहना है कि एरोट्रोपोलिस जैसी बड़ी परियोजना से विकास तो होगा, लेकिन इसका लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि दबाव बनाकर या जबरन भूमि अधिग्रहण की कोशिश की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि विकास के नाम पर किसानों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है और उनकी मांगें पूरी किए बिना एरोट्रोपोलिस परियोजना को आगे बढ़ाने का विरोध किया जाएगा।
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