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Mohali News: जीरकपुर में फ्लैट दिलाने के नाम पर 98 लाख की ठगी, सुषमा बेलेजा प्रोजेक्ट के डायरेक्टरों पर केस दर्ज
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जीरकपुर। पीआर-7 रोड के सुषमा बेलेजा प्रोजेक्ट में फ्लैट दिलाने के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में प्रोजेक्ट के डायरेक्टर प्रतीक मित्तल, भरत मित्तल, सेल्स हेड नितिन गोयल सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह एफआईआर रिटायर्ड मेजर जनरल डॉ. राजन कोचर की शिकायत पर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ग्रेटर नोएडा के निवासी हैं। उसने आरोप लगाया कि उनके साथ करीब 98.25 लाख की ठगी की गई है। उन्होंने वर्ष 2022 में एक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के माध्यम से इस प्रोजेक्ट में 3 बीएचके का फ्लैट बुक कराया था।
उसकी कुल कीमत लगभग 1.04 करोड़ तय हुई थी। शिकायत के अनुसार कंपनी के अधिकारियों ने अलग-अलग किश्तों के नाम पर भुगतान लिया और बड़ी रकम नकद देने के लिए दबाव बनाया। आरोप है कि शिकायतकर्ता ने करीब 48 लाख नकद और बाकी रकम बैंक ट्रांसफर के जरिए दी। इससे कुल भुगतान 98.25 लाख तक पहुंच गया। मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है कि नकद राशि लेने के बाद कंपनी ने पहले जारी अलॉटमेंट लेटर को बदलकर कम कीमत का नया लेटर जारी कर दिया। इससे पूरे लेन-देन पर संदेह गहरा गया। एग्रीमेंट के मुताबिक फ्लैट का कब्जा 11 अगस्त 2024 तक दिया जाना था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी न कब्जा मिला और न ही कोई डिमांड लेटर जारी किया गया।
जब शिकायतकर्ता साइट पर पहुंचे तो निर्माण कार्य भी बंद मिला। शिकायतकर्ता ने 8 दिसंबर 2025 को एसएसपी मोहाली को शिकायत दी थी, जिस पर आरोपियों ने दो माह में मामला सुलझाने का भरोसा दिया था। समय बीतने के बाद भी न तो रकम लौटाई गई और न ही फ्लैट दिया गया। एसएचओ जीरकपुर सतिंद्र सिंह के अनुसार प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों और भुगतान के साक्ष्यों के आधार पर आरोप सही मिले हैं। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया गया। सभी वित्तीय लेन-देन और प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं अन्य खरीदारों के साथ भी इसी तरह की ठगी तो नहीं हुई।
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उसकी कुल कीमत लगभग 1.04 करोड़ तय हुई थी। शिकायत के अनुसार कंपनी के अधिकारियों ने अलग-अलग किश्तों के नाम पर भुगतान लिया और बड़ी रकम नकद देने के लिए दबाव बनाया। आरोप है कि शिकायतकर्ता ने करीब 48 लाख नकद और बाकी रकम बैंक ट्रांसफर के जरिए दी। इससे कुल भुगतान 98.25 लाख तक पहुंच गया। मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है कि नकद राशि लेने के बाद कंपनी ने पहले जारी अलॉटमेंट लेटर को बदलकर कम कीमत का नया लेटर जारी कर दिया। इससे पूरे लेन-देन पर संदेह गहरा गया। एग्रीमेंट के मुताबिक फ्लैट का कब्जा 11 अगस्त 2024 तक दिया जाना था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी न कब्जा मिला और न ही कोई डिमांड लेटर जारी किया गया।
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जब शिकायतकर्ता साइट पर पहुंचे तो निर्माण कार्य भी बंद मिला। शिकायतकर्ता ने 8 दिसंबर 2025 को एसएसपी मोहाली को शिकायत दी थी, जिस पर आरोपियों ने दो माह में मामला सुलझाने का भरोसा दिया था। समय बीतने के बाद भी न तो रकम लौटाई गई और न ही फ्लैट दिया गया। एसएचओ जीरकपुर सतिंद्र सिंह के अनुसार प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों और भुगतान के साक्ष्यों के आधार पर आरोप सही मिले हैं। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया गया। सभी वित्तीय लेन-देन और प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं अन्य खरीदारों के साथ भी इसी तरह की ठगी तो नहीं हुई।
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