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हरजिंदर रंगी बने नगर काऊसिंल के प्रधान
Updated Wed, 12 Dec 2018 01:20 AM IST
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- हाईकोर्ट के हुक्मों पर प्रशासन ने मंगलवार करवाया चुनाव
- कांग्रेस के दोनों काउंसिलर रहे गैरहाजिर
- कांग्रेस की धक्केशाही के बावजूद लोकतंत्र की हुई जीत : शर्मा
अमर उजाला ने पहले ही रंगी के नाम का कर दिया था खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
डेराबस्सी। नगर काउंसिल के प्रधान पद को लेकर चल रही असमंजस मंगलवार सुबह हरजिंद्र सिंह रंगी के प्रधान बनने बाद समाप्त हो गई। एसडीएम कम चुनाव अधिकारी परमजीत सिंह के नेतृत्व में हुए चुनाव दौरान हरजिंदर सिंह रंगी को प्रधान चुना गया। रंगी का नाम भाजपा काउंसिलर परमजीत कौर सैनी की तरफ से पेश किया गया जिस पर काउंसिल के उपप्रधान व अकाली काउंसिलर मनविंदर सिंह टोनी राणा ने मोहर लगाई। इसके बाद हलका विधायक एनके शर्मा सहित मीटिंग में उपस्थित समूह 15 काउंसिलरों ने हाथ खड़े कर समर्थन दिया। रंगी इस से पहले उपप्रधान रहते हुए बतौर कार्यकारी प्रधान के तौर पर इस पद पर रह चुके हैं।
एकत्रित की जानकारी के अनुसार डेराबस्सी काउंसिल में कुल 17 वार्डों के काउंसिलर और एक वोट हलका विधायक की मिला कर कुल 18 वोट हैं, जिनमें से कांग्रेस पार्टी के दो वार्ड नंबर तीन से रानी और वार्ड नंबर आठ से सुमन बाला गैर हाजिर रहे। बता दें कि अकाली पार्षद रंगी के नाम का खुलासा अमर उजाला ने पहले कर दिया गया था।
मीटिंग बाद में हलका विधायक एनके शर्मा ने कहा कि तकरीबन नौ महीने पहले काउंसिल के पूर्व प्रधान भुपिंदर सिंह सैनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से प्रधानगी का चुनाव लटक रहा था। शर्मा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार के राजनीतिक दबाव के चलते चुनाव को जानबूझ कर लटकाया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली भाजपा काउंसिलरों के पास पूर्ण बहुमत होने के बावजूद पंजाब सरकार चुनाव को जानबूझ कर लटका रही थी, जिसके लिए समूह पार्षदों की ओर से कई बार स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों को चुनाव करवाने की अपील की गई। परंतु इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस दौरान नगर काउंसिल के सीनियर उपप्रधान मुकेश गांधी बतौर कार्यकारी प्रधान का पद संभाल रहे थे। काउंसिलरों की कोई सुनवाई न होने पर उनकी तरफ से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। इस पर सुनवाई करते अदालत ने पंद्रह दिनों के अंदर स्थानीय निकाय विभाग को चुनाव करवाने के आदेश दिया था। शर्मा ने हाईकोर्ट का धन्यवाद करते कहा कि यदि अदालत दखल न देती तो पंजाब सरकार की तरफ से इस चुनाव में ओर देरी की जानी थी, जिसके साथ शहर के विकास पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि रंगी के प्रधान बनने साथ अब शहर के विकास में तेजी लाई जाएगी।
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एसडीएम परमजीत सिंह ने कहा कि चुनाव पूर्ण तौर पर शांतिपूर्ण ढंग के साथ हुआ है। उन्होंने कहा कि रंगी के अलावा किसी भी ओर काउंसिलर की तरफ से दावेदारी पेश नहीं की गई।
पहले से ही तय थी रंगी की प्रधानगी
हरजिंद्र सिंह रंगी के नाम का खुलासा अमर उजाला की ओर से पहले ही कर दिया था। असल में नगर परिषद के चुनावों में अकाली भाजपा को क्लीन स्वीप किया था, जिस समय प्रधानगी के लिए भुपिंद्र सिंह सैनी व हरजिंद्र सिंह रंगी दो पार्षद दावेदार थे। इसका हल निकालते हुए हलका विधायक शमा ने ढाई ढाई साल के लिए दोनों को प्रधानगी देना तय किया था। इसके तहत ही पहले भुपिंद्र सैनी को प्रधान चुना गया जिन्होंने ढाई साल की बजाय तीन साल बाद इस्तीफा दिया। इसके बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण प्रधानगी का चुनाव में देरी होती रही, जिस दौरान तकरीबन नौ महीने भाजपा के पार्षद सीनियर उपप्रधान मुकेश गांधी ने बतौर कार्यकारी प्रधान के तौर पर पद संभाल रहे थे। हाई कोर्ट के दखल पर चुनाव होने पर शर्मा ने अपना वादा निभा दिया। हालांकि दो अन्य अकाली पार्षदों की ओर से प्रधानगी के लिए दावा पेश किया जा रहा था जिनको शर्मा मनाने में सफल रहे। हरजिंद्र सिंह रंगी का प्रधान बनने पहले से ही तय था। इसके सुबूत के तौर पर चुनाव से पहले ही हरजिंद्र सिंह रंगी घर से प्रधानगी की तैयारी कर आए थे। बड़ी गिनती में रंगी के समर्थक पहले ही ढोल व हार के साथ पहुंचे हुए थे। रंगी की पत्नी व अन्य करीबी भी चुनाव से पहले ही हार लेकर बाहर खड़े थे, जिससे पहले से नाम तय होना स्पष्ट है।
कैपशन-हरजिंद्र सिंह रंगी प्रधान बनने के बाद हलका विधायक एनके शर्मो व अन्य पार्षदों के साथ।
कैप्शन -प्रधान बनने बाद में हरजिंदर सिंह रंगी हलका विधायक श्री शर्मा व अन्य काऊसिलरों के साथ खुशी मनाते हुए।
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- कांग्रेस के दोनों काउंसिलर रहे गैरहाजिर
- कांग्रेस की धक्केशाही के बावजूद लोकतंत्र की हुई जीत : शर्मा
अमर उजाला ने पहले ही रंगी के नाम का कर दिया था खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
डेराबस्सी। नगर काउंसिल के प्रधान पद को लेकर चल रही असमंजस मंगलवार सुबह हरजिंद्र सिंह रंगी के प्रधान बनने बाद समाप्त हो गई। एसडीएम कम चुनाव अधिकारी परमजीत सिंह के नेतृत्व में हुए चुनाव दौरान हरजिंदर सिंह रंगी को प्रधान चुना गया। रंगी का नाम भाजपा काउंसिलर परमजीत कौर सैनी की तरफ से पेश किया गया जिस पर काउंसिल के उपप्रधान व अकाली काउंसिलर मनविंदर सिंह टोनी राणा ने मोहर लगाई। इसके बाद हलका विधायक एनके शर्मा सहित मीटिंग में उपस्थित समूह 15 काउंसिलरों ने हाथ खड़े कर समर्थन दिया। रंगी इस से पहले उपप्रधान रहते हुए बतौर कार्यकारी प्रधान के तौर पर इस पद पर रह चुके हैं।
एकत्रित की जानकारी के अनुसार डेराबस्सी काउंसिल में कुल 17 वार्डों के काउंसिलर और एक वोट हलका विधायक की मिला कर कुल 18 वोट हैं, जिनमें से कांग्रेस पार्टी के दो वार्ड नंबर तीन से रानी और वार्ड नंबर आठ से सुमन बाला गैर हाजिर रहे। बता दें कि अकाली पार्षद रंगी के नाम का खुलासा अमर उजाला ने पहले कर दिया गया था।
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मीटिंग बाद में हलका विधायक एनके शर्मा ने कहा कि तकरीबन नौ महीने पहले काउंसिल के पूर्व प्रधान भुपिंदर सिंह सैनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से प्रधानगी का चुनाव लटक रहा था। शर्मा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार के राजनीतिक दबाव के चलते चुनाव को जानबूझ कर लटकाया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली भाजपा काउंसिलरों के पास पूर्ण बहुमत होने के बावजूद पंजाब सरकार चुनाव को जानबूझ कर लटका रही थी, जिसके लिए समूह पार्षदों की ओर से कई बार स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों को चुनाव करवाने की अपील की गई। परंतु इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस दौरान नगर काउंसिल के सीनियर उपप्रधान मुकेश गांधी बतौर कार्यकारी प्रधान का पद संभाल रहे थे। काउंसिलरों की कोई सुनवाई न होने पर उनकी तरफ से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। इस पर सुनवाई करते अदालत ने पंद्रह दिनों के अंदर स्थानीय निकाय विभाग को चुनाव करवाने के आदेश दिया था। शर्मा ने हाईकोर्ट का धन्यवाद करते कहा कि यदि अदालत दखल न देती तो पंजाब सरकार की तरफ से इस चुनाव में ओर देरी की जानी थी, जिसके साथ शहर के विकास पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि रंगी के प्रधान बनने साथ अब शहर के विकास में तेजी लाई जाएगी।
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एसडीएम परमजीत सिंह ने कहा कि चुनाव पूर्ण तौर पर शांतिपूर्ण ढंग के साथ हुआ है। उन्होंने कहा कि रंगी के अलावा किसी भी ओर काउंसिलर की तरफ से दावेदारी पेश नहीं की गई।
पहले से ही तय थी रंगी की प्रधानगी
हरजिंद्र सिंह रंगी के नाम का खुलासा अमर उजाला की ओर से पहले ही कर दिया था। असल में नगर परिषद के चुनावों में अकाली भाजपा को क्लीन स्वीप किया था, जिस समय प्रधानगी के लिए भुपिंद्र सिंह सैनी व हरजिंद्र सिंह रंगी दो पार्षद दावेदार थे। इसका हल निकालते हुए हलका विधायक शमा ने ढाई ढाई साल के लिए दोनों को प्रधानगी देना तय किया था। इसके तहत ही पहले भुपिंद्र सैनी को प्रधान चुना गया जिन्होंने ढाई साल की बजाय तीन साल बाद इस्तीफा दिया। इसके बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण प्रधानगी का चुनाव में देरी होती रही, जिस दौरान तकरीबन नौ महीने भाजपा के पार्षद सीनियर उपप्रधान मुकेश गांधी ने बतौर कार्यकारी प्रधान के तौर पर पद संभाल रहे थे। हाई कोर्ट के दखल पर चुनाव होने पर शर्मा ने अपना वादा निभा दिया। हालांकि दो अन्य अकाली पार्षदों की ओर से प्रधानगी के लिए दावा पेश किया जा रहा था जिनको शर्मा मनाने में सफल रहे। हरजिंद्र सिंह रंगी का प्रधान बनने पहले से ही तय था। इसके सुबूत के तौर पर चुनाव से पहले ही हरजिंद्र सिंह रंगी घर से प्रधानगी की तैयारी कर आए थे। बड़ी गिनती में रंगी के समर्थक पहले ही ढोल व हार के साथ पहुंचे हुए थे। रंगी की पत्नी व अन्य करीबी भी चुनाव से पहले ही हार लेकर बाहर खड़े थे, जिससे पहले से नाम तय होना स्पष्ट है।
कैपशन-हरजिंद्र सिंह रंगी प्रधान बनने के बाद हलका विधायक एनके शर्मो व अन्य पार्षदों के साथ।
कैप्शन -प्रधान बनने बाद में हरजिंदर सिंह रंगी हलका विधायक श्री शर्मा व अन्य काऊसिलरों के साथ खुशी मनाते हुए।