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लड़कियों से छेड़छाड़ की सोची भी तो सेफ्टी बेल्ट बुला लेगी पुलिस

Panchkula bureau Updated Sun, 11 Nov 2018 12:19 AM IST
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चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के तीन छात्रों ने तैयार की स्पेशल बेल्ट
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लाखों रुपये की लागत से हुई है तैयार, अपनी तरह की पहली बेल्ट है
बेल्ट के चर्चे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में, लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है

अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। युवतियों और महिलाओं से छेड़छाड़ या शारीरिक शोषण करने वालों की अब खैर नहीं। ऐसे मनचलों पर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घंड़ूूआं के छात्रों द्वारा तैयार की फीमेल सेफ्टी बेल्ट शिकंजा कसेगी। बेल्ट को उन्होंने क्वीन बेल्ट का नाम दिया है। इसमें एक ऐसी तकनीक प्रयोग की गई है कि यदि कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ जोर जबरदस्ती करने की कोशिश करता है तो बेल्ट के सॉफ्टवेयर से नजदीकी थाने समेत तीन लोगों को इस बारे में तुरंत जानकारी मिल जाएगी। विद्यार्थियों का कहना है कि यह तकनीक महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद होगी। वहीं, इससे पहनना भी काफी आसान है।

ऐसे आया सेफ्टी बेल्ट का आइडिया
जानकारी के मुताबिक यह सेफ्टी बेल्ट बीएससी कंप्यूटर साइंस के फाइनल वर्ष के तीन विद्यार्थियों की तरफ से मिलकर बनाई गई है। इन लोगों में श्री मुक्तसर साहिब निवासी जवतेश सिंह (21) पठानकोट निवासी ललिता ठाकुर (19) एवं सुशील कुमार (20) शामिल हैं। जवतेश ने बताया कि देश में हर साल 25000 बलात्कार की घटनाएं होती होती हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने की इच्छा के साथ साल 2017 के दिसंबर महीने में उसको यह बेल्ट तैयार करने के बारे में ख्याल आया।

काम कठिन था, चार माह में मिली सफलता
आइडिया आने के बाद उसने अपनी क्लास की ही ललिता ठाकुर के साथ इसे सांझा किया। तो उसकी तरफ से भी इसमें दिलचस्पी दिखाई गई। उन्होंने इंटरनेट एवं बाकी स्रोतों के द्वारा इस खोज के बारे में पढ़ाई शुरू की। क्लास का एक और साथी सुशील कुमार भी इस काम में उनके साथ जुट गया। फिर भी बेल्ट तैयार करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती था। क्योंकि यह काम कंप्यूटर साइंस विभाग की बजाय इलेक्ट्रोनिक्स विभाग का था। इसके बावजूद उन्होंने दृढ़ मेहनत करते हुए अपनी खोज जारी रखी। करीब 4 महीनों की माथा-पच्ची के बाद उन्होंने इस बेल्ट का प्रारंभिक स्वरूप तैयार कर लिया था।

ऐसे करती बेल्ट काम
बेल्ट की तैयारी में शामिल की गई तकनीक के बारे में संक्षेप में बताते खोजकर्ता जवतेश ने बताया कि उन्होंने यह बेल्ट सिम आधारित जीपीएस व सर्किट ब्रेकर तकनीक के द्वारा तैयार की है। इसको पहनने वाली औरत के कपड़ों की भीतरी सतह पर एक मैजिक टेप भी लगाई जाती है, जो पहनने वाले को बिल्कुल भी असहज नहीं महसूस करवाती। उसके साथ किसी व्यक्ति की तरफ से यदि जोर-जबरदस्ती की जाएगी तो कपड़ों में खिचाव आने पर अपने आप नजदीकी पुलिस स्टेशन, उस औरत के परिवार एवं बेल्ट के सर्वर पर ऐसओऐस-आटोमैटिक डिस्ट्रैस काल मतलब इमरजैंसी काल चली जाएगी।

लाखों की लागत से तैयार हुई, लोग आसानी से खरीद पाएंगे
ललिता ने बताया कि ख़ुद एक औरत होने के नाते मैं समझती हूं कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए इस प्रकार के उपकरण बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं, परंतु हमारे लिए समस्या यह थी कि जो इस बेल्ट का प्रारंभिक स्वरूप था, वह आकार में ज्यादा बड़ा एवं चौड़ा था। इसी के चलते हम इस बैलट का संशोधन करते हुए इसको आम बेलट की शक्ल तक ले कर आए। शुरुआती दौर में हमारा करीब 1.25 लाख रुपये का खर्च हुआ तथा दूसरे दौर में अब तक तकरीबन 1 लाख रुपया अधिक लग चुका है, परन्तु अगर इस बेल्ट को बाजार में उतारा जाये तो मैजिक टेप सहित इस क्वीन बैलट का मूल्य केवल 1300/- रुपये होगा।

आगे चलकर यह भी रूप हो सकता है
शोधकर्ताओं की टीम में से सुशील कुमार ने बेलट संबंधित अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि उन की तरफ से इस बेलट पर अधिक काम किया जा रहा है, जिस के द्वारा वह एक मोबाइल एप्लीकेशन विकसित कर रहे हैं। इस के साथ यदि 500 मीटर के घिराव में यदि किसी भी औरत के साथ जबरदस्ती की जा रही हो तो एप इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति तक खुद-ब-खुद संदेश पहुंच जाएगा। इस तरह होने पर महज मार्च या रैलियां निकालने की जगह हर आम व्यक्ति एक औरत की सुरक्षा के लिए मौके पर ही ठोस कदम उठा सकेगा। इसके साथ ही उन की इच्छा है कि भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास संबंधित मंत्रालय की तरफ से इस बेल्ट को लांच किया जाए।

साधारण परिवारों से संबंध रखते हैं सभी छात्र
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूूंआं के यह छात्र पंजाब के आम घरेलू परिवारों के साथ ही संबंधित हैं। जवतेश के पिता पटवारी हैं। सुशील कुमार के पिता फौज में हैं । जबकि ललिता की माता एक सरकारी नौकरी पर तैनात है। इस उपकरण को बनाने के दौरान खर्चा घर वालों की तरफ से ही विनम्रता सहित दिया गया जबकि यूनिवर्सिटी के अधिकारियों एवं विशेष कर उनके विभाग के हेड प्रो. कमलजीत सिंह सैनी की तरफ से उन का पूरी तरह नेतृत्व करते हुए हर संभव मदद दी गई।

बेल्ट जीत चुकी है कई अवार्ड, चर्चा विदेशों तक
विद्यार्थियों ने बताया कि यह सेफ्टी बेल्ट टेस्टिंग प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह माप दंडा पर खरी उतरी है। इसी लिए इस बेल्ट को बहुत से इनाम मिल चुके हैं। भारत सरकार के एआईसीटीयी विभाग की तरफ से करवाई गई प्रतियोगिता में यह टाप 10 में जगह बनाने में कामयाब रही है। इसी आधार पर ही छात्रा ललिता ठाकुर को कनाडा में हुई सीआईएपी कान्फ्रेंस के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली 10 औरतों में से एक और सब से युवा प्रतियोगी बनने का मौका भी मिल चुका है।

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