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जीरकपुर : मैरिज पैलेसों के अंदर ऊंची आवाज से बजने वाले डीजे की साउंड से लोगों का जीना हुआ मुहाल,
Updated Wed, 12 Dec 2018 01:20 AM IST
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- जीरकपुर में मैरिज पैलेसों में ऊंची आवाज से बजने वाले डीजे की साउंड से लोगों का जीना हुआ मुहाल
- पुलिस विभाग के अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान, लोगों ने पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई करने की उठाई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
जीरकपुर। शहर में पंचकूला, चंडीगढ़, अंबाला और पटियाला रोड के विभिन्न क्षेत्रों में बने मैरिज पैलेस लोगों के लिए सिरदर्दी बने हुए हैं। देर रात तक ऊंची आवाज में चलाए जाने वाले म्यूजिक ने लोगों की नींद खराब करके रख दी है। इन इलाकों में यहां स्थित मैरिज पैलेस व रिजॉर्ट में शादी समारोह होने के कारण रात दस बजे के बाद तेज आवाज में यहां म्यूजिक बजने की शिकायतें मिल रही हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रात 10 बजे के बाद ऊंची आवाज में म्यूजिक और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है, बावजूद इसके पुलिस विभाग के आलाधिकारी कार्रवाई करते नजर नहीं आते।
जानकारी के मुताबिक, बलटाना, पभात, लोहगढ़, ढकोली के रिहायशी क्षेत्रों में भारी संख्या में मैरिज पैलेस, बैंक्वट और रिजार्ट आदि का निर्माण हो रखा है, जिनके अंदर इन दिनों होने वाले विवाह आदि समारोह में रात तक पार्टियों का आयोजन किया जाता है। इसके साथ देर रात चलने वाली इन पार्टियों के अंदर डीजे की तेज म्यूजिक साउंड की वजह से इनके आसपास रिहायशी कालोनी के अंदर रहने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि लोगों द्वारा इसकी शिकायत पुलिस थानों में मौजूद अधिकारियों को दी गई, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
रसूखदारों के है मैरिज पैलेस, इसलिए पुलिस नहीं करती कार्रवाई
गौरतलब है कि बेर रात तक मैरिज पैलेस और फार्म हाउस में तेज ध्वनि से म्यूजिक बजता है। मैरिज पैलेस या तो किसी न किसी रसूखदार के हैं या किसी न किसी रसूखदार का कार्यक्रम होता है। उनमें सभी नियम कायदों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लोग शिकायत भी करते हैं, लेकिन फिर भी पुलिस कोई करवाई नहीं करती। वहीं, मानसिक परेशानियों भरे दौर में जहां मनुष्य को अपने मानसिक तनाव को कम करने के लिए राहत की जरूरत होती है, वहीं उसको और अधिक तनाव ध्वनि प्रदूषण के रूप में मिल रहा है। बेशक ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए हमारे संविधान में अनेकों कानून बनाए गए हैं, लेकिन स्पीकरों की आवाज संबंधित स्थानों की हद में रखने की हिदायत की थी पर कई लोगों को इसकी कोई परवाह नहीं।
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पाबंदी के बावजूद देर रात तक बजते हैं डीजे
जानकारी के अनुसार, त्यौहारों व विवाह के सीजन शुरू होते ही ऊंची आवाज वाले डीजे बजने शुरू हो जाते हैं। आलम यह है कि देर रात 12 बजे तक भी कई पैलेसों, होटलों व प्राइवेट कोठियों में विवाह समारोह में काफी ऊंची आवाज में डीजे को कई 100 मीटर तक क्षेत्र में सुना जा सकता है जो ध्वनि प्रदूषण का एक बहुत अहम कारण बन गया है। ध्यानयोग्य है कि जिला प्रशासन ने बीते वर्ष लोकहित में एक फैसला लेते हुए आदेश जारी करके जिले के सभी पैलेसों व होटलों में रात के 10 बजे उपरांत डीजे चलाने पर रोक लगा दी थी पर इस बार अभी तक ऐसे आदेश न होने के फिलहाल इन मैरिज पैलेस मालिकों पर असर नजर नहीं आ रहा न ही पुलिस कार्रवाई कर रही है।
क्या है ध्वनि प्रदूषण एक्ट
ध्वनि प्रदूषण एक्ट 1956 की धारा-3 के तहत कोई भी व्यक्ति जिला मैजिस्ट्रेट की मंजूरी के बगैर स्पीकर का प्रयोग नहीं कर सकता व इसके तहत 6 माह की कैद व 2 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है। इस संबंधी चीफ जस्टिस आरसी लाहोटी व जस्टिस अशोक भान के डिवीजन बैच ने 18/7/2005 को संविधान की धारा 141, 142 के अधिकारों का प्रयोग करते हुए शाम 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रिहायशी इलाकों में गाड़ियों के हार्नों, लाउड स्पीकरों व पटाकों आदि पर पाबंदी संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए थे पर आज तक इसको अमली रूप में लागू नहीं किया गया। जबकि ध्वनि प्रदूषण के नुकसान ध्वनि प्रदूषण को डैसीबल में मापा जाता है। डब्ल्यूएचओ अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में 45 डैसीबल, शहरी क्षेत्रों में 55 डैसीबल, औद्योगिक क्षेत्रों में 75 डैसीबल होने के अलावा स्कूलों/अस्पतालों के जोन में पूरी तरह से शांति होनी जरूरी है पर हकीकत में यह शोर प्रदूषण निर्धारित सीमा से कहीं अधिक पाया जा रहा है। जानकारी अनुसार नोएका प्रदूषण से दिल की धड़कन में तेजी, चिड़चिड़ापन, गुस्से में बढ़ावा, मानसिक तनाव, नींद न आना, ब्लड प्रैशर आदि का शिकार होता है। मैरिज पैलेसों, बैंक्वट हॉल और विभिन्न फार्म हाउस के अंदर होने वाले विवाह समारोह के अंदर देर रात तक चलने वाले डीजे साउंड को लेकर पुलिस के पास शिकायतें आई है। अब एक टीम का गठन किया गया हैं, जो स्पेशल तौर पर रात 10 बजे के बाद उन मैरिज पैलेसों, बैंक्वट के बाहर तैनात रहेगा, जो नियमों की उल्लंघना कर रहे हैं।
- गुरजीत सिंह, एसएचओ, जीरकपुर।
- पुलिस विभाग के अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान, लोगों ने पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई करने की उठाई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
जीरकपुर। शहर में पंचकूला, चंडीगढ़, अंबाला और पटियाला रोड के विभिन्न क्षेत्रों में बने मैरिज पैलेस लोगों के लिए सिरदर्दी बने हुए हैं। देर रात तक ऊंची आवाज में चलाए जाने वाले म्यूजिक ने लोगों की नींद खराब करके रख दी है। इन इलाकों में यहां स्थित मैरिज पैलेस व रिजॉर्ट में शादी समारोह होने के कारण रात दस बजे के बाद तेज आवाज में यहां म्यूजिक बजने की शिकायतें मिल रही हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रात 10 बजे के बाद ऊंची आवाज में म्यूजिक और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है, बावजूद इसके पुलिस विभाग के आलाधिकारी कार्रवाई करते नजर नहीं आते।
जानकारी के मुताबिक, बलटाना, पभात, लोहगढ़, ढकोली के रिहायशी क्षेत्रों में भारी संख्या में मैरिज पैलेस, बैंक्वट और रिजार्ट आदि का निर्माण हो रखा है, जिनके अंदर इन दिनों होने वाले विवाह आदि समारोह में रात तक पार्टियों का आयोजन किया जाता है। इसके साथ देर रात चलने वाली इन पार्टियों के अंदर डीजे की तेज म्यूजिक साउंड की वजह से इनके आसपास रिहायशी कालोनी के अंदर रहने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि लोगों द्वारा इसकी शिकायत पुलिस थानों में मौजूद अधिकारियों को दी गई, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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रसूखदारों के है मैरिज पैलेस, इसलिए पुलिस नहीं करती कार्रवाई
गौरतलब है कि बेर रात तक मैरिज पैलेस और फार्म हाउस में तेज ध्वनि से म्यूजिक बजता है। मैरिज पैलेस या तो किसी न किसी रसूखदार के हैं या किसी न किसी रसूखदार का कार्यक्रम होता है। उनमें सभी नियम कायदों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लोग शिकायत भी करते हैं, लेकिन फिर भी पुलिस कोई करवाई नहीं करती। वहीं, मानसिक परेशानियों भरे दौर में जहां मनुष्य को अपने मानसिक तनाव को कम करने के लिए राहत की जरूरत होती है, वहीं उसको और अधिक तनाव ध्वनि प्रदूषण के रूप में मिल रहा है। बेशक ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए हमारे संविधान में अनेकों कानून बनाए गए हैं, लेकिन स्पीकरों की आवाज संबंधित स्थानों की हद में रखने की हिदायत की थी पर कई लोगों को इसकी कोई परवाह नहीं।
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पाबंदी के बावजूद देर रात तक बजते हैं डीजे
जानकारी के अनुसार, त्यौहारों व विवाह के सीजन शुरू होते ही ऊंची आवाज वाले डीजे बजने शुरू हो जाते हैं। आलम यह है कि देर रात 12 बजे तक भी कई पैलेसों, होटलों व प्राइवेट कोठियों में विवाह समारोह में काफी ऊंची आवाज में डीजे को कई 100 मीटर तक क्षेत्र में सुना जा सकता है जो ध्वनि प्रदूषण का एक बहुत अहम कारण बन गया है। ध्यानयोग्य है कि जिला प्रशासन ने बीते वर्ष लोकहित में एक फैसला लेते हुए आदेश जारी करके जिले के सभी पैलेसों व होटलों में रात के 10 बजे उपरांत डीजे चलाने पर रोक लगा दी थी पर इस बार अभी तक ऐसे आदेश न होने के फिलहाल इन मैरिज पैलेस मालिकों पर असर नजर नहीं आ रहा न ही पुलिस कार्रवाई कर रही है।
क्या है ध्वनि प्रदूषण एक्ट
ध्वनि प्रदूषण एक्ट 1956 की धारा-3 के तहत कोई भी व्यक्ति जिला मैजिस्ट्रेट की मंजूरी के बगैर स्पीकर का प्रयोग नहीं कर सकता व इसके तहत 6 माह की कैद व 2 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है। इस संबंधी चीफ जस्टिस आरसी लाहोटी व जस्टिस अशोक भान के डिवीजन बैच ने 18/7/2005 को संविधान की धारा 141, 142 के अधिकारों का प्रयोग करते हुए शाम 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रिहायशी इलाकों में गाड़ियों के हार्नों, लाउड स्पीकरों व पटाकों आदि पर पाबंदी संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए थे पर आज तक इसको अमली रूप में लागू नहीं किया गया। जबकि ध्वनि प्रदूषण के नुकसान ध्वनि प्रदूषण को डैसीबल में मापा जाता है। डब्ल्यूएचओ अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में 45 डैसीबल, शहरी क्षेत्रों में 55 डैसीबल, औद्योगिक क्षेत्रों में 75 डैसीबल होने के अलावा स्कूलों/अस्पतालों के जोन में पूरी तरह से शांति होनी जरूरी है पर हकीकत में यह शोर प्रदूषण निर्धारित सीमा से कहीं अधिक पाया जा रहा है। जानकारी अनुसार नोएका प्रदूषण से दिल की धड़कन में तेजी, चिड़चिड़ापन, गुस्से में बढ़ावा, मानसिक तनाव, नींद न आना, ब्लड प्रैशर आदि का शिकार होता है। मैरिज पैलेसों, बैंक्वट हॉल और विभिन्न फार्म हाउस के अंदर होने वाले विवाह समारोह के अंदर देर रात तक चलने वाले डीजे साउंड को लेकर पुलिस के पास शिकायतें आई है। अब एक टीम का गठन किया गया हैं, जो स्पेशल तौर पर रात 10 बजे के बाद उन मैरिज पैलेसों, बैंक्वट के बाहर तैनात रहेगा, जो नियमों की उल्लंघना कर रहे हैं।
- गुरजीत सिंह, एसएचओ, जीरकपुर।