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जीरकपुर फ्लाइओवर के नीचे खुले में सो रहे हैं राहगीर और गरीब
Updated Sun, 25 Nov 2018 01:06 AM IST
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नगर काउंसिल की ओर से नहीं दी जा रही लोगों को रैन बसेरे की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
जीरकपुर। नगर काउंसिल की ओर से आम लोगों के टैक्स के पैसों में से लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए रैन-बसेरे का यात्रियों और बेघर जरूरतमंदों को कोई फ़ायदा नहीं मिल रहा। काउंसिल की ओर से न तो लोगों को इसकी जानकारी दी जा रही है और न ही कोई ऐसा बोर्ड लगाया गया है कि लोग इस रैन बसेरे के बारे में जान सकें। इस लापरवाही के चलते खुले में जीरकपुर फ्लाईओवर के नीचे हाइवे के किनारे गरीबों को रात गुजारनी पड़ रही है।
नवजीवन फाउंडेशन के चेयरमैन पवन नेहरू ने बताया कि बेसहारा लोगों के लिए नगर काउंसिल की ओर से बनाऐ गए रैन-बसेरे में आज तक कोई भी व्यक्ति रहने नहीं आया। रैन बसेरे में रहने न आने का कारण है काउंसिल की ओर से इस बनाए गए रात-बसेरा का कोई जीरकपुर शहर व आसपास प्रचार नहीं किया गया और न ही सार्वजनिक जगह पर कोई रैनबसेरे को दर्शाता कोई उपयुक्त बोर्ड लगाया गया है। इस कारण यह रैनबसेरा नाम का ही बसेरा बन कर रह गया है। हालत यह है कि इस रैनबसेरे पर हर समय ताला लगा रहता है। संपर्क करने के लिए गेट पर लिखे बोर्ड पर कुछ काउंसिल कर्मचारियों के मोबाइल नंबर ही दिए गए हैं। उधर यदि इस रैनबसेरो में रहने के लिए किसी व्यक्ति ने प्रयास किया भी है तो वह इसको लगे हुए ताले को देखकर निराश हो कर वापस लौट जाता है। उन्होंने नगर काउंसिल के अधिकारियों से मांग कि है कि इस रैनबसेरा की हालत सुधार कर पक्के मुलाजिम तैनात किए जाएं। उन्होंने जिला प्रशासन से फ्लाईओवर के नीचे टैंपरेरी तौर पर एक रैन बसेरा बनाने के लिए जगह की भी मांग की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जीरकपुर। नगर काउंसिल की ओर से आम लोगों के टैक्स के पैसों में से लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए रैन-बसेरे का यात्रियों और बेघर जरूरतमंदों को कोई फ़ायदा नहीं मिल रहा। काउंसिल की ओर से न तो लोगों को इसकी जानकारी दी जा रही है और न ही कोई ऐसा बोर्ड लगाया गया है कि लोग इस रैन बसेरे के बारे में जान सकें। इस लापरवाही के चलते खुले में जीरकपुर फ्लाईओवर के नीचे हाइवे के किनारे गरीबों को रात गुजारनी पड़ रही है।
नवजीवन फाउंडेशन के चेयरमैन पवन नेहरू ने बताया कि बेसहारा लोगों के लिए नगर काउंसिल की ओर से बनाऐ गए रैन-बसेरे में आज तक कोई भी व्यक्ति रहने नहीं आया। रैन बसेरे में रहने न आने का कारण है काउंसिल की ओर से इस बनाए गए रात-बसेरा का कोई जीरकपुर शहर व आसपास प्रचार नहीं किया गया और न ही सार्वजनिक जगह पर कोई रैनबसेरे को दर्शाता कोई उपयुक्त बोर्ड लगाया गया है। इस कारण यह रैनबसेरा नाम का ही बसेरा बन कर रह गया है। हालत यह है कि इस रैनबसेरे पर हर समय ताला लगा रहता है। संपर्क करने के लिए गेट पर लिखे बोर्ड पर कुछ काउंसिल कर्मचारियों के मोबाइल नंबर ही दिए गए हैं। उधर यदि इस रैनबसेरो में रहने के लिए किसी व्यक्ति ने प्रयास किया भी है तो वह इसको लगे हुए ताले को देखकर निराश हो कर वापस लौट जाता है। उन्होंने नगर काउंसिल के अधिकारियों से मांग कि है कि इस रैनबसेरा की हालत सुधार कर पक्के मुलाजिम तैनात किए जाएं। उन्होंने जिला प्रशासन से फ्लाईओवर के नीचे टैंपरेरी तौर पर एक रैन बसेरा बनाने के लिए जगह की भी मांग की है।
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