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हाईवे पर बना 25 साल पुराना मंदिर हटाया, लोगों ने फिर स्थापित किया

Sun, 15 Mar 2020 08:48 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2020 08:48 PM IST
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25 year old temple built on highway removed, people restored
जीरकपुर। स्थानीय प्रशासन शुक्रवार को डेराबस्सी-जीरकपुर हाईवे पर स्थित गांव सिंघपुरा की जमीन पर बने करीब 25 साल पुराने मंदिर को उठाकर किसी ओर जगह पर स्थापित कर रहा था। वहीं शनिवार को गांव के लोगों के सहयोग से मंदिर दोबारा पहले वाली जगह पर ही स्थापित कर दिया गया। मंदिर हटाने के लिए अधिकारी जोर अजमाइश करते नजर आए, लेकिन लोगों के विरोध के चलते मामले को सुलझाने के लिए सोमवार तक का समय दिया गया है।
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गांव के लोगों ने अधिकारियों पर आरोप लगाए कि वे राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए इस मंदिर को हटाने में लगे हुए हैं। प्रशासन का उद्देश्य मंदिर के पिछली तरफ पंजाब सरकार के एक बड़े मंत्री की जमीन को रास्ता दिलाना है। जीरकपुर प्रशासन ने द्वारा बारिश के बावजूद मंदिर को हटाकर सिंघपुरा गांव की ही शामलात जगह पर रखवा दिया था लेकिन लोगों के विरोध के चलते मंदिर को दोबारा उनके सहयोग से अपनी जगह पर स्थापित करवा दिया गया।
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‘जमीन हाईवे पर आने के बाद हड़पने की साजिश रची जा रही’
लोगों ने बताया कि पंचायत व लोगों की सहमति से करीब 25 साल पहले गांव के ही बूटी राम को मंदिर बनाने के लिए प्रस्ताव पारित करके जगह अलॉट की थी। यह जगह हाईवे पर होने से अब इसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। इसके चलते इस जमीन को हड़पने की साजिश रची जा रही है। यह मंदिर सिंघपुरा गांव की शामलात जमीन में बना हुआ है, जिसका नगर काउंसिल जीरकपुर के साथ सुप्रीम कोर्ट में एक केस अभी विचाराधीन है। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी इसे खाली करवाने में लगे हुए हैं। यही नहीं मंदिर को हटाकर जिस जगह बनाया जा रहा था, उस जगह का केस भी अदालत में चल रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक अदालत का कोई फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी अधिकारी को मनमानी नहीं करने दी जाएगी।
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गांववालों को साथ लेकर अफसरों की धक्केशाही के खिलाफ अदालत जाऊंगा : बूटी राम
मंदिर में बैठे बूटी राम ने बताया कि इस स्थान पर पीने वाले पानी का हैंडपंप लगा हुआ है। इसके अलावा बिजली विभाग ने कनेक्शन भी जारी किया हुआ है। इतना ही नहीं, नगर काउंसिल ने प्रॉपर्टी नंबर भी जारी किया हुआ है। उन्होंने प्रशासन के अधिकारियों से मांग करते हुए कहा कि यदि इस मंदिर को हटाना है तो प्रशासन कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करें और मंदिर का अपना सामान हटाने के लिए नोटिस देकर समय दें। साथ ही उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की धक्केशाही के खिलाफ गांववासियों को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात भी कही।

यहां मंदिर नहीं, झुग्गी थी : नायबतहसीलदार
इस बारे में जीरकपुर सब-तहसील के नायबतहसीलदार वरिंदर सिंह धुत्त से बात की तो उन्होंने कहा कि यहां कोई मंदिर नहीं था, बल्कि बूटी राम नामक बुजुर्ग झुग्गी बनाकर रहता था। इसे हटाकर सिंघपुरा की शामलात जगह में तबदील किया गया है। रही बात किसी राजनेता को खुश करने के लिए जमीन को खाली करवाने की तो सारे आरोप बेबुनियाद है। उन्हें तो शिकायत मिली थी कि यहां नशा बेचा जा रहा है, इसलिए कार्रवाई की गई। अब मामले को सुलझाने के लिए सोमवार का समय निर्धारित किया है। इसमें एसडीएम डेराबस्सी के समक्ष गांववासियों के साथ बैठक करके मामले को सुलझाने की कोशिश की जाएगी।
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