फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Mohali News ›   पशुओं से निपटने में निगम नाकाम, लोगों में दहशत

पशुओं से निपटने में निगम नाकाम, लोगों में दहशत

Fri, 01 Feb 2019 01:22 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Fri, 01 Feb 2019 01:22 AM IST
विज्ञापन
पशुओं से निपटने में निगम नाकाम, लोगों में दहशत
निगम ने प्रशासन से कहा-250 पशु लालड़ूू गौशाला में शिफ्ट किए जाएं
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। शहर की सड़कों पर लावारिस पशुओं के कारण लोगों का चलना तक मुश्किल हो चला है। उधर निगम की गौशाला में क्षमता से ज्यादा पशु होने के कारण समस्या बढ़ती जा रही है। निगम ने पशुओं को जिला प्रशासन द्वारा संचालित गौशाला में स्थानांतरित करने के लिए कहा है। बावजूद इसके शहर के लोगों को लावारिस पशुओं के आतंक से निजात मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही है।
शहर में आए दिन लावारिस पशुओं के कारण हादसे हो रहे हैं। प्रशासन व निगम की तमाम कोशिशों के बावजूद जगतपुरा से एयरपोर्ट की ओर जाने वाली बिजी रोड पर पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इतना ही नहीं फेज-11 से बलौंगी जाने वाली रोड, फेज-11 से ही न्यू बस स्टैंड की ओर जाने वाली रोड पर लावारिस पशुओं का जमघट लगा रहता है। यही हालात फेज-3 से मटौर जाने वाली सड़क पर भी रहते हैं। नागरिकों को इनके आतंक से बचाने के लिए निगम के पास महज एक कैटल कैचर वैन है जो चार मुलाजिमों के साथ काम कर रही है। हालांकि इनकी मॉनिटरिंग के लिए एक चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर सहित पूरी टीम तैनात है। इसके बावजूद शहर के लोगों को लावारिस पशुओं के आतंक से निजात नहीं मिल पा रही है।
विज्ञापन

समस्या यह है कि निगम के पास पशुओं को शहर की सड़कों से ले जाकर रखने की जगह भी नहीं बची है। निगम द्वारा फेज-1 में संचालित गौशाला में इस समय 1100 से ज्यादा लावारिस पशु हैं। यह संख्या गौशाला की क्षमता से काफी ज्यादा है। लिहाजा निगम ने 250 पशु लालड़ूू गौशाला में शिफ्ट करने का निवेदन जिला प्रशासन से किया है। डीसी ऑफिस से इसे मंजूरी दे दी गई है, हालांकि निगम में अभी तक इसकी अधिकारिक सूचना नहीं पहुंची है।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या कहते हैं लोग

फेज 3 बी 1 निवासी विक्रमजीत सिंह का कहना है कि लावारिस पशुओं के कारण यातायात तो प्रभावित होता ही है, साथ ही दुर्घटना का अंदेशा भी बना रहता है। निगम व प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाने चाहिएं।

फेज-1 में रहने वाले गगन कुमार कहते हैं कि लावारिस पशुओं को रिकवर करने में निगम नाकाम रहा है। शहर की स्वच्छता के लिए निगम बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन शहर की सड़कों पर लावारिस पशुओं के आतंक से नागरिकों को निजात नहीं मिल रही है।

फेज- 3 बी 1 के ही रहने वाले रमन सैनी शहर की सड़कों पर लावारिस पशुओं के आतंक के लिए निगम को जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि शहर की सड़कों को लावारिस पशुओं से मुक्त कराने के लिए उचित कदम नहीं उठा पा रहा है।


फेज-2 निवासी अतुल शर्मा कहते हैं कि लावारिस पशुओं की समस्या को कई बार निगम अधिकारियों के सामने उठाया जा चुका है। इसके बावजूद अभी तक कारगर कदम नहीं उठाए गए। लावारिस पशुओं से निपटने के लिए निगम के पास न तो जरूरी संसाधन हैं और न ही ट्रेंड स्टाफ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed