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1971 के शहीदों के परिवारों में रोष, हक नहीं मिला तो लौटाएंगे मेडल
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
Updated Tue, 14 Jun 2016 09:47 AM IST
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1971 के शहीदों के परिवारों में रोष, हक नहीं मिला तो लौटाएंगे मेडल
- फोटो : अमर उजाला
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साल 1962, 65 और 71 के युद्ध में अपनी जान कुर्बान करने वाले वीर सपूतों की विधवाओं व पारिवारिक मेंबरों को अपने हकों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकार शहीदों के परिवारों को उनके बनते हक नहीं दे पा रही है। इससे उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। मजबूरी में इन परिवारों को संघर्ष की राह पर आना पड़ा है। सोमवार को शहीदों के परिवार एयरफोर्स के पूर्व जूनियर वारंट अफसर करनैल सिंह वैदवान के सोहाना स्थित निवास स्थान पर जुटे।
साथ ही संघर्ष को तेज करने के लिए रणनीति तय की। उन्होंने कहा कि अगर जल्द उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे अपने मेडल व सम्मान चिह्न वापस कर देंगे। जानकारी के मुताबिक, सोमवार को 1962, 65 और 71 की जंग में शहीद सैनिकों के करीब 20 परिवारों के सदस्यों मीटिंग में शामिल हुए। पीड़ित परिवारों ने कहा कि सैनिकों के शहीदी के समय राज्य सरकार की ओर से सम्मान के तौर पर 10-10 एकड़ जमीन देने की घोषणा की गई थी। लेकिन 40-45 वर्ष बाद भी वादे पूरे नहीं किए हैं। सौ से ज्यादा परिवारों के इस संबंध में मामले पंजाब के माल व पुनर्वास विभाग के पास पैंडिंग पड़े हैं।
पीड़ित परिवारों ने कहा कि 1965 की लड़ाई की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। लेकिन उनकी कई मांगें पूरी नहीं की जा रही हैं। वहीं, वैदवान ने कहा कि मलाल इस बात है की पूर्व सैनिकों और देश पर कुर्बान होने वाले सैनिकों की विधवाएं, उनके पारिवारिक सदस्यों की हमेशा अनदेखी की गई है। यह लोग सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो जंग के दौरान मिले सम्मान सरकार को वापस कर दिए जाएंगे।
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साथ ही संघर्ष को तेज करने के लिए रणनीति तय की। उन्होंने कहा कि अगर जल्द उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे अपने मेडल व सम्मान चिह्न वापस कर देंगे। जानकारी के मुताबिक, सोमवार को 1962, 65 और 71 की जंग में शहीद सैनिकों के करीब 20 परिवारों के सदस्यों मीटिंग में शामिल हुए। पीड़ित परिवारों ने कहा कि सैनिकों के शहीदी के समय राज्य सरकार की ओर से सम्मान के तौर पर 10-10 एकड़ जमीन देने की घोषणा की गई थी। लेकिन 40-45 वर्ष बाद भी वादे पूरे नहीं किए हैं। सौ से ज्यादा परिवारों के इस संबंध में मामले पंजाब के माल व पुनर्वास विभाग के पास पैंडिंग पड़े हैं।
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पीड़ित परिवारों ने कहा कि 1965 की लड़ाई की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। लेकिन उनकी कई मांगें पूरी नहीं की जा रही हैं। वहीं, वैदवान ने कहा कि मलाल इस बात है की पूर्व सैनिकों और देश पर कुर्बान होने वाले सैनिकों की विधवाएं, उनके पारिवारिक सदस्यों की हमेशा अनदेखी की गई है। यह लोग सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो जंग के दौरान मिले सम्मान सरकार को वापस कर दिए जाएंगे।
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