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कैंसर से मिलकर निपटेंगे भारत और मिस्र, मिली शुरुआती कामयाबी
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मोहाली। भारत और मिस्र द्वारा संयुक्त रूप से कैंसर की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे रिसर्च प्रोजेक्ट के अच्छे नतीजे सामने आने लगे हैं। मोहाली के नाइपर संस्थान और मिस्र के मेनॉफिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा कैंसर की रोकथाम के लिए मैटल कांप्लेक्स पर काम किया जा रहा है। इसी रिसर्च के सिलसिले में मेनॉफिया यूनिवर्सिटी के दो वैज्ञानिक इन दिनों नाइपर में 10 दिन के दौरे पर हैं।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग पर भारत और मिस्र के बीच हुए समझौते के तहत दोनों देशों के वैज्ञानिक ज्वाइंट रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसके लिए भारत से राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर) मोहाली और मिस्र से मेनॉफिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम को चुना गया था। दो साल की इस परियोजना के तहत दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक एक-दूसरे के संस्थानों का दौरा कर प्रोजेक्ट पर अपनी रिसर्च का आदान-प्रदान कर रहे हैं। 2017 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण में है। इस परियोजना के एक हिस्से के रूप में अलग-अलग मैटल कांप्लेक्स का हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (यकृत को होने वाले नुकसान) पर मूल्यांकन किया गया है। वैज्ञानिकों को इसमें सफलता भी हासिल हुई है। कुछ महत्वपूर्ण मैटल कांप्लेक्स जैसे सिलिको, इनविट्रो और विवो संतोषजनक मेडिकल प्रोफाइल दिखा रहे हैं।
ज्वाइंट रिसर्च टीम की विशेषता
ज्वाइंट रिसर्च के लिए मोहाली के नाइपर पहुंचे मेनॉफिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक अब्दु साद अल-तब्ल प्रसिद्ध बायलॉजिकल केमिस्ट हैं। वह मेनॉफिया यूनिवर्सिटी के अकार्बनिक और जैव रासायनिक समूह, रसायन विज्ञान विभाग व विज्ञान संकाय के प्रमुख हैं। डॉ. अब्दु साद अल-तब्ल ने दुनिया की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी और संस्थानों के साथ काम किया है। उनके साथ आए प्रो. मोशीरा मोहम्मद अब्दएल वाहेद मेनॉफिया यूनिवर्सिटी के मेडिसिन संकाय के पैथोलॉजी विभाग से हैं। उनकी विशेषज्ञता इन विट्रो और विवो फार्माकोलॉजी में है। इसी तरह भारत की टीम की विशेषज्ञता कंप्यूटरीकृत तरीके से मैटल के रंगीकरण के लिए जैविक लिगैंड को डिजाइन और संशोधित करना है। अनुसंधान का फोकस कई सी-एनबॉन्ड वाले मिश्रण पर है।
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग पर भारत और मिस्र के बीच हुए समझौते के तहत दोनों देशों के वैज्ञानिक ज्वाइंट रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसके लिए भारत से राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर) मोहाली और मिस्र से मेनॉफिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम को चुना गया था। दो साल की इस परियोजना के तहत दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक एक-दूसरे के संस्थानों का दौरा कर प्रोजेक्ट पर अपनी रिसर्च का आदान-प्रदान कर रहे हैं। 2017 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण में है। इस परियोजना के एक हिस्से के रूप में अलग-अलग मैटल कांप्लेक्स का हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (यकृत को होने वाले नुकसान) पर मूल्यांकन किया गया है। वैज्ञानिकों को इसमें सफलता भी हासिल हुई है। कुछ महत्वपूर्ण मैटल कांप्लेक्स जैसे सिलिको, इनविट्रो और विवो संतोषजनक मेडिकल प्रोफाइल दिखा रहे हैं।
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ज्वाइंट रिसर्च टीम की विशेषता
ज्वाइंट रिसर्च के लिए मोहाली के नाइपर पहुंचे मेनॉफिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक अब्दु साद अल-तब्ल प्रसिद्ध बायलॉजिकल केमिस्ट हैं। वह मेनॉफिया यूनिवर्सिटी के अकार्बनिक और जैव रासायनिक समूह, रसायन विज्ञान विभाग व विज्ञान संकाय के प्रमुख हैं। डॉ. अब्दु साद अल-तब्ल ने दुनिया की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी और संस्थानों के साथ काम किया है। उनके साथ आए प्रो. मोशीरा मोहम्मद अब्दएल वाहेद मेनॉफिया यूनिवर्सिटी के मेडिसिन संकाय के पैथोलॉजी विभाग से हैं। उनकी विशेषज्ञता इन विट्रो और विवो फार्माकोलॉजी में है। इसी तरह भारत की टीम की विशेषज्ञता कंप्यूटरीकृत तरीके से मैटल के रंगीकरण के लिए जैविक लिगैंड को डिजाइन और संशोधित करना है। अनुसंधान का फोकस कई सी-एनबॉन्ड वाले मिश्रण पर है।
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