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जीरकपुर के दर्जनों कालोनियों में सीवरेज और केमिकल युक्त काला पानी भरा, लोग सड़कों पर उतरे
Updated Wed, 21 Nov 2018 01:47 AM IST
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लोगों का गुस्सा देखकर मौके से भागे एसडीओ
लोगों ने ऑफिस में सीवरेज का गंदा पानी फेंका तो समाधान के बजाय ईओ बोले, मामला दर्ज कराऊंगा
जीरकपुर की आधा दर्जन कालोनियों में सीवरेज और केमिकल युक्त काला पानी भरा, स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे
नगर काउंसिल ऑफिस के बाहर लोगों ने किया रोष प्रदर्शन, कहा- ईओ साहब एक दिन हमारे घर रहकर देखो
दीपक शाही
जीरकपुर। मंगलवार की सुबह 6 बजे का समय। जीरकपुर की आधा दर्जन कालोनियों के लोगों की नींद खुली तो सीवरेज की गंदी बदबू से। बाहर आकर देखा तो सीवरेज और केमिकल का काला पानी घरों के बाहर दो फुट तक भरा हुआ था। महीनों बाद सोमवार की शाम स्थानीय लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली थी कि कालोनियों में भरा सीवरेज का गंदा पानी अब धीरे-धीरे निकलने लगा है। एक उम्मीद जगी थी कि कल से ग्वाला दूध घर तक लेकर आएगा। बच्चे घर से बाहर बिना किसी परेशानी के स्कूल के लिए निकल सकेंगे, लेकिन नगर काउंसिल की लापरवाह कार्य प्रणाली की वजह से लोगों की उम्मींदें टूट गईं।
मंगलवार सुबह लोगों ने नगर काउंसिल के एसडीओ को बुलाया, लेकिन लोगों का गुस्सा देख एसडीओ मौके से भाग निकले। बता दें कि इस समस्या से पिछले तीन साल से गांव पभात स्थित शिवा एनक्लेव, गुरदेव नगर, जेमिदारा एनक्लेव, एके एस वन और एके एस टू सोसाइटी के करीब 90 हजार लोग परेशान हैं।
एसडीओ के मौके से भागते ही लोगों का गुस्सा फूटा और सैकड़ों लोग नगर काउंसिल कार्यालय के बाहर बोतल में गंदा पानी भरकर पहुंच गए, लेकिन कार्यालय में कोई अधिकारी सुबह 11 बजे मौजूद नहीं था। महीनों से नगर काउंसिल कार्यालय का चक्कर काटकर थक चुके लोग अधिकारियों के कार्यालय में नहीं मिलने पर आगबबूला हो गए। लोग जो सीवरेज का गंदा पानी बोतलों में भर कर लाए थे उन्होंने उसे नगर काउंसिल कार्यालय की सीढ़ियों से लेकर एसडीओ के कार्यालय की सीट तक फेंक दिया। लोगों का कहना है कि यह पानी कार्यालय में इसलिए फेंका ताकि इसकी दुर्गंध से काउंसिल के अधिकारियों को अहसास हो कि वह अपने घर में नहीं किसी गटर में रह रहे हैं।
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सीवरेज और केमिकल युक्त गंदे पानी से परेशान लोगों को जैसे ही सूचना मिली कि दोपहर को ईओ मौके पर पहुंचे हैं, वे घर से बाहर निकले और ईओ को वहीं घेर लिया। ईओ ने कहा कि नगर काउंसिल ऑफिस में सीवरेज का पानी किसने फेंका। गुस्साए लोगों ने कहा कि आप अपने परिवार के साथ यहां एक दिन रहकर देखिए। ईओ गुस्से में आ गए और कहा कि मामला दर्ज करवाऊंगा। लोगों ने कहा यहां सैकड़ों परिवार हैं, किसके किसके नाम एफआईआर करवानी है।
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नगर काउंसिल ने ट्यूबवेल के जरिए सीवरेज का पानी निकलवाया
फिलहाल लोगों को राहत देने के लिए एक बजे के बाद नगर काउंसिल के अधिकारियों ने कालोनियों से सीवरेज का पानी ट्यूबवेल के जरिए निकलवा दिया। तब जाकर लोगों गुस्सा शांत हुआ। लोगों ने कहा कि अगर इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे सड़क पर ट्रैफिक जाम करेंगे।
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लाखों का फ्लैट खरीदा, अब दीवारों में दरारें पड़ीं
दुर्गा एनक्लेव के 50 फ्लैट मालिकों का कहना है कि 2012 में सोसाइटी में रहना शुरू किया है, लेकिन सीवरेज और केमिकल युक्त गंदा पानी सोसाइटियों में भरने से घरों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। सारे घर का पेंट सीलन से खराब हो रहा है। घर के एक से दूसरे छोर तक सीवरेज का पानी जमीन के रास्ते निकलने से मकान की नींव कमजोर होता जा रहा है। कब गिर जाएं कहा नहीं जा सकता। अगर जानमाल का नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी सिर्फ नगर काउंसिल की होगी।
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पूरी सड़क और दीवारों पर केमिकल के निशान
पूरी सड़क और दीवारों पर केमिकल के निशान पड़ गए हैं। लोगों के घरों के सामने टाइलें उखड़ चुकी हैं। गलियां सीवरेज के पानी से भरी पड़ी हैं। बदबू इतनी कि लोग घर के बाहर पांच मिनट खड़े नहीं हो सकते। स्थानीय सोसाइटी वासियों का कहना है कि सारे घर का पेंट खराब हो चुका है, एक बार पेंट कराने में 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आता है, इसका भुगतान कौन करेगा।
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लोगों ने ऑफिस में सीवरेज का गंदा पानी फेंका तो समाधान के बजाय ईओ बोले, मामला दर्ज कराऊंगा
जीरकपुर की आधा दर्जन कालोनियों में सीवरेज और केमिकल युक्त काला पानी भरा, स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे
नगर काउंसिल ऑफिस के बाहर लोगों ने किया रोष प्रदर्शन, कहा- ईओ साहब एक दिन हमारे घर रहकर देखो
दीपक शाही
जीरकपुर। मंगलवार की सुबह 6 बजे का समय। जीरकपुर की आधा दर्जन कालोनियों के लोगों की नींद खुली तो सीवरेज की गंदी बदबू से। बाहर आकर देखा तो सीवरेज और केमिकल का काला पानी घरों के बाहर दो फुट तक भरा हुआ था। महीनों बाद सोमवार की शाम स्थानीय लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली थी कि कालोनियों में भरा सीवरेज का गंदा पानी अब धीरे-धीरे निकलने लगा है। एक उम्मीद जगी थी कि कल से ग्वाला दूध घर तक लेकर आएगा। बच्चे घर से बाहर बिना किसी परेशानी के स्कूल के लिए निकल सकेंगे, लेकिन नगर काउंसिल की लापरवाह कार्य प्रणाली की वजह से लोगों की उम्मींदें टूट गईं।
मंगलवार सुबह लोगों ने नगर काउंसिल के एसडीओ को बुलाया, लेकिन लोगों का गुस्सा देख एसडीओ मौके से भाग निकले। बता दें कि इस समस्या से पिछले तीन साल से गांव पभात स्थित शिवा एनक्लेव, गुरदेव नगर, जेमिदारा एनक्लेव, एके एस वन और एके एस टू सोसाइटी के करीब 90 हजार लोग परेशान हैं।
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एसडीओ के मौके से भागते ही लोगों का गुस्सा फूटा और सैकड़ों लोग नगर काउंसिल कार्यालय के बाहर बोतल में गंदा पानी भरकर पहुंच गए, लेकिन कार्यालय में कोई अधिकारी सुबह 11 बजे मौजूद नहीं था। महीनों से नगर काउंसिल कार्यालय का चक्कर काटकर थक चुके लोग अधिकारियों के कार्यालय में नहीं मिलने पर आगबबूला हो गए। लोग जो सीवरेज का गंदा पानी बोतलों में भर कर लाए थे उन्होंने उसे नगर काउंसिल कार्यालय की सीढ़ियों से लेकर एसडीओ के कार्यालय की सीट तक फेंक दिया। लोगों का कहना है कि यह पानी कार्यालय में इसलिए फेंका ताकि इसकी दुर्गंध से काउंसिल के अधिकारियों को अहसास हो कि वह अपने घर में नहीं किसी गटर में रह रहे हैं।
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नगर काउंसिल ने ट्यूबवेल के जरिए सीवरेज का पानी निकलवाया
फिलहाल लोगों को राहत देने के लिए एक बजे के बाद नगर काउंसिल के अधिकारियों ने कालोनियों से सीवरेज का पानी ट्यूबवेल के जरिए निकलवा दिया। तब जाकर लोगों गुस्सा शांत हुआ। लोगों ने कहा कि अगर इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे सड़क पर ट्रैफिक जाम करेंगे।
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लाखों का फ्लैट खरीदा, अब दीवारों में दरारें पड़ीं
दुर्गा एनक्लेव के 50 फ्लैट मालिकों का कहना है कि 2012 में सोसाइटी में रहना शुरू किया है, लेकिन सीवरेज और केमिकल युक्त गंदा पानी सोसाइटियों में भरने से घरों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। सारे घर का पेंट सीलन से खराब हो रहा है। घर के एक से दूसरे छोर तक सीवरेज का पानी जमीन के रास्ते निकलने से मकान की नींव कमजोर होता जा रहा है। कब गिर जाएं कहा नहीं जा सकता। अगर जानमाल का नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी सिर्फ नगर काउंसिल की होगी।
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पूरी सड़क और दीवारों पर केमिकल के निशान
पूरी सड़क और दीवारों पर केमिकल के निशान पड़ गए हैं। लोगों के घरों के सामने टाइलें उखड़ चुकी हैं। गलियां सीवरेज के पानी से भरी पड़ी हैं। बदबू इतनी कि लोग घर के बाहर पांच मिनट खड़े नहीं हो सकते। स्थानीय सोसाइटी वासियों का कहना है कि सारे घर का पेंट खराब हो चुका है, एक बार पेंट कराने में 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आता है, इसका भुगतान कौन करेगा।